कारोबार | ABC NATIONAL NEWS | मुंबई | 28 अक्टूबर 2026
एक कंपनी शेयर बाजार में उतरती है, उसकी कीमत 12.53 लाख करोड़ रुपये आंकी जाती है और देश के सबसे बड़े कारोबारी परिवारों में से एक की संपत्ति का हिसाब अचानक चर्चा में आ जाता है। मुकेश अंबानी की जियो प्लेटफॉर्म्स की लिस्टिंग ने यही किया है। लेकिन इस कहानी में सिर्फ दौलत का बड़ा आंकड़ा नहीं, बल्कि शेयर बाजार के मूल्यांकन का एक दिलचस्प गणित भी छिपा है।
जियो की लिस्टिंग के बाद अंबानी परिवार की तीन कंपनियों—रिलायंस इंडस्ट्रीज, जियो प्लेटफॉर्म्स और जियो फाइनेंशियल सर्विसेज—में हिस्सेदारी का संयुक्त सांकेतिक मूल्य करीब 12.80 लाख करोड़ रुपये बताया गया है। हालांकि, इसे परिवार की वास्तविक कुल संपत्ति या लिस्टिंग से पैदा हुई नई दौलत मान लेना सही नहीं होगा।
IPO के 1,119 रुपये से 1,358 रुपये पर पहुंचा शेयर
जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयर 1,119 रुपये के IPO मूल्य के मुकाबले 21.36 प्रतिशत प्रीमियम पर 1,358 रुपये में सूचीबद्ध हुए। इस शुरुआत के साथ कंपनी का बाजार पूंजीकरण लगभग 12.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। जियो ने भारती एयरटेल को पीछे छोड़ते हुए रिलायंस इंडस्ट्रीज के बाद देश की दूसरी सबसे मूल्यवान कंपनी का स्थान हासिल किया।
इस लिस्टिंग ने जियो के कारोबार को स्वतंत्र बाजार मूल्य दिया है। अब निवेशक रिलायंस के भीतर मौजूद जियो के कारोबार का मूल्यांकन अलग से भी देख सकते हैं।
जियो में 8.07 लाख करोड़ रुपये की रिलायंस की हिस्सेदारी
जियो प्लेटफॉर्म्स में रिलायंस इंडस्ट्रीज की 64.41 प्रतिशत हिस्सेदारी है। जियो के 12.53 लाख करोड़ रुपये के बाजार मूल्य के आधार पर रिलायंस की इस हिस्सेदारी का मूल्य करीब 8.07 लाख करोड़ रुपये बैठता है।
दूसरी ओर, रिलायंस इंडस्ट्रीज का बाजार पूंजीकरण लगभग 16 लाख करोड़ रुपये है। इसमें अंबानी परिवार के प्रमोटर समूह की 50.44 प्रतिशत हिस्सेदारी का मूल्य भी लगभग 8.07 लाख करोड़ रुपये निकलता है।
यहीं से गणित थोड़ा पेचीदा हो जाता है।
जियो में अंबानी परिवार का अप्रत्यक्ष आर्थिक हित कितना?
रिलायंस में प्रमोटर समूह की 50.44 प्रतिशत हिस्सेदारी को जियो में रिलायंस की 64.41 प्रतिशत हिस्सेदारी से गुणा करने पर जियो में अंबानी परिवार का अप्रत्यक्ष आर्थिक हित लगभग 32.50 प्रतिशत बैठता है।
जियो के 12.53 लाख करोड़ रुपये के बाजार मूल्य पर इस अप्रत्यक्ष हिस्सेदारी की कीमत करीब 4.07 लाख करोड़ रुपये है।
इसके अलावा, प्रमोटर कंपनियों के पास जियो फाइनेंशियल सर्विसेज की 48 प्रतिशत हिस्सेदारी है। कंपनी का बाजार पूंजीकरण 1.37 लाख करोड़ रुपये मानें, तो इस हिस्सेदारी का मूल्य लगभग 65,760 करोड़ रुपये यानी 0.66 लाख करोड़ रुपये बैठता है।
इन्हीं आंकड़ों को जोड़ने पर प्रमोटर समूह की विभिन्न हिस्सेदारियों का सांकेतिक मूल्य लगभग 12.80 लाख करोड़ रुपये बताया जा रहा है।
लेकिन क्या यह पूरी रकम अंबानी परिवार की अलग-अलग संपत्ति है?
नहीं, यहीं सबसे महत्वपूर्ण सावधानी है।
जियो प्लेटफॉर्म्स पहले से रिलायंस इंडस्ट्रीज के स्वामित्व में है। जियो का कारोबार और उसकी संभावित कमाई रिलायंस के बाजार मूल्य में पहले से कुछ हद तक शामिल है। इसलिए रिलायंस में अंबानी परिवार की हिस्सेदारी के मूल्य के ऊपर जियो में उसकी अप्रत्यक्ष हिस्सेदारी का पूरा मूल्य फिर से जोड़ने पर एक ही संपत्ति की दोहरी गिनती हो सकती है।
आसान उदाहरण से समझिए: यदि किसी व्यक्ति की कंपनी का मूल्य 100 रुपये है और उस कंपनी के भीतर एक कारोबार का मूल्य 50 रुपये है, तो कंपनी के 100 रुपये के मूल्य में उस कारोबार का मूल्य पहले से शामिल हो सकता है। ऐसे में 100 रुपये के साथ 50 रुपये फिर जोड़ देने से संपत्ति का सही हिसाब नहीं निकलेगा।
इसलिए 12.80 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा हिस्सेदारियों के सांकेतिक मूल्य का जोड़ है, न कि अंबानी परिवार की कुल शुद्ध संपत्ति का अंतिम प्रमाणित आंकड़ा।
लिस्टिंग से रिलायंस और जियो की तुलना आसान
जियो की अलग लिस्टिंग से निवेशकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि बाजार उसके कारोबार को कितना मूल्य दे रहा है और रिलायंस के बाकी व्यवसायों का मूल्यांकन किस तरह हो रहा है।
हालांकि, रिलायंस का वास्तविक बाजार मूल्य आगे किस दिशा में जाएगा, यह जियो के प्रदर्शन के साथ-साथ रिलायंस के दूसरे कारोबारों, संपत्तियों, देनदारियों और निवेशकों की धारणा पर भी निर्भर करेगा।
शेयरों में तेजी आई तो प्रमोटर समूह का मूल्य भी बढ़ सकता है
विश्लेषकों के एक काल्पनिक अनुमान के अनुसार, यदि रिलायंस इंडस्ट्रीज का बाजार पूंजीकरण 16 लाख करोड़ रुपये से 5 से 8 प्रतिशत बढ़ता है, तो प्रमोटर समूह की 50.44 प्रतिशत हिस्सेदारी के मूल्य में लगभग 40,352 करोड़ से 64,563 करोड़ रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है। यह संभावित परिदृश्य है, निश्चित लाभ या वास्तविक बढ़ोतरी नहीं।
इसी तरह, शेयरों की कीमतों में गिरावट होने पर हिस्सेदारी का बाजार मूल्य घट भी सकता है। बाजार पूंजीकरण बदलने का अर्थ यह नहीं कि मालिक ने उतनी ही नकदी कमा ली है।
रिलायंस समूह का बाजार मूल्य भी चर्चा में
जियो की लिस्टिंग के बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज और जियो प्लेटफॉर्म्स का संयुक्त बाजार मूल्य लगभग 28.7 लाख करोड़ रुपये बताया गया। यह टाटा समूह की सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाजार मूल्य से करीब 3.1 लाख करोड़ रुपये अधिक था। इस तुलना में जियो फाइनेंशियल सर्विसेज को शामिल नहीं किया गया था।
बाजार मूल्य और असली दौलत में फर्क
जियो की लिस्टिंग ने कंपनी के मूल्यांकन को अधिक पारदर्शी बनाया है और अंबानी परिवार की हिस्सेदारी का नया गणित सामने रखा है। लेकिन शेयर बाजार में किसी कंपनी की कीमत, उसमें मालिक की हिस्सेदारी का मूल्य और मालिक की कुल शुद्ध संपत्ति—तीनों अलग-अलग अवधारणाएं हैं।
12.80 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा आकर्षक जरूर है, लेकिन सही तस्वीर समझने के लिए यह देखना जरूरी है कि कौन-सी हिस्सेदारी सीधे है, कौन-सी अप्रत्यक्ष और किस संपत्ति का मूल्य पहले से किसी दूसरी कंपनी के बाजार मूल्य में शामिल है।



