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इजराइल चुनाव: नेतन्याहू गुट 53 सीटों पर आगे, बहुमत से दूर; विपक्ष के सामने अरब दलों के समर्थन से सरकार बनाने की चुनौती

85.6% मतों की गिनती पूरी होने पर नेतन्याहू गुट को 53 और गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गुट को 48 सीटें; अरब दलों के खाते में 19 सीटें, गठबंधन की बातचीत पर टिकी निगाहें

अंतरराष्ट्रीय/ राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | यरुशलम | 28 अक्टूबर 2026

इजराइल के आम चुनाव में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए सत्ता की राह अब भी आसान नहीं हुई है। मतगणना के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 85.6 प्रतिशत मतों की गिनती पूरी होने तक नेतन्याहू के नेतृत्व वाला दक्षिणपंथी गठबंधन 53 सीटों पर आगे था, जबकि गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गुट को 48 सीटें मिलती दिख रही थीं। अरब दलों के खाते में 19 सीटें जाने का अनुमान सामने आया है। इसके बावजूद किसी भी गुट के पास सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटों का बहुमत नहीं है।

नेतन्याहू ने अपने समर्थकों के बीच दावा किया कि जायोनिस्ट मतदाताओं के बीच दक्षिणपंथी दलों को निर्णायक बहुमत मिला है और उन्होंने राष्ट्रीय दक्षिणपंथी सरकार बनाने की अपील की। लेकिन आंशिक नतीजों की तस्वीर बताती है कि सबसे बड़ी चुनौती अब सरकार बनाने के लिए पर्याप्त समर्थन जुटाने की है।

बहुमत का आंकड़ा दूर, गठबंधन की राजनीति निर्णायक

इजराइल की 120 सदस्यीय संसद नेसेट में सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सीटों की जरूरत है। मौजूदा आंशिक नतीजों में नेतन्याहू का गुट इस आंकड़े से आठ सीट पीछे था। विपक्षी गुट भी बहुमत से दूर दिखाई दे रहा था।

मतगणना के शुरुआती एग्जिट पोल में विपक्षी गुट को कुछ बढ़त दिखाई गई थी, लेकिन आधिकारिक मतगणना के आगे बढ़ने के साथ तस्वीर बदलती रही। अंतिम नतीजे शेष मतों की गिनती और छोटे दलों के प्रदर्शन पर निर्भर करेंगे।

इजराइल के राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग ने राजनीतिक दलों से खुला रुख अपनाने और एक और चुनाव से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि सभी पक्षों को गठबंधन वार्ता में गंभीरता और लचीलेपन के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

अरब दलों की बढ़ी ताकत, लेकिन सहयोग पर असमंजस

इस चुनाव में अरब नेतृत्व वाले दलों का प्रदर्शन खास महत्व रखता है। संयुक्त सूची और राम दलों को मिलाकर 19 सीटों तक पहुंचने का अनुमान सामने आया है। ऐसे में सरकार बनाने की कोशिशों में उनकी भूमिका अहम हो सकती है।

हालांकि, नेतन्याहू अरब दलों के समर्थन पर निर्भर सरकार बनाने के खिलाफ बयान दे चुके हैं। दूसरी ओर, विपक्ष के भीतर भी इस बात पर एकमत नहीं है कि अरब दलों को गठबंधन में शामिल किया जाए या बाहर से उनका समर्थन लिया जाए।

इजराइल की डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता यायर गोलान ने विपक्षी गुट से अरब दलों के साथ मिलकर सरकार बनाने की अपील की। वहीं, संयुक्त सूची के नेता यूसुफ जबरीन ने कहा कि नेतन्याहू सरकार का विकल्प पेश करने वाले दलों को उनकी पार्टी से बातचीत करनी होगी।

इससे विपक्ष के सामने दोहरी चुनौती है—नेतन्याहू को सत्ता से हटाने के लिए पर्याप्त समर्थन जुटाना और अरब दलों के साथ सहयोग को लेकर अपने भीतर सहमति बनाना।

नेतन्याहू ने अरब दलों के साथ सरकार बनाने का किया विरोध

नेतन्याहू ने चुनाव के बाद अपने संबोधन में कहा कि इजराइल को मजबूत दक्षिणपंथी और राष्ट्रवादी सरकार की जरूरत है। उन्होंने अरब दलों पर निर्भर सरकार बनाने का विरोध किया।

विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट ने मतदाताओं के बीच बदलाव की इच्छा का दावा किया और नेतन्याहू को चेतावनी दी कि वे कार्यवाहक प्रधानमंत्री के अधिकारों या देश की सुरक्षा का इस्तेमाल अपनी राजनीतिक जरूरतों के लिए न करें।

इस तरह चुनाव के बाद संघर्ष केवल सीटों की संख्या तक सीमित नहीं रहा। सरकार की विचारधारा, अरब नागरिकों की राजनीतिक भागीदारी और देश की सुरक्षा नीति भी बहस के केंद्र में आ गई है।

शेयर बाजार और मुद्रा पर भी असर

चुनाव में स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने की आशंका का असर इजराइल के वित्तीय बाजारों पर भी दिखाई दिया। रिपोर्ट के अनुसार, तेल अवीव स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख टीए-125 सूचकांक 1.7 प्रतिशत गिरा, जबकि इजराइली मुद्रा शेकेल अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग एक प्रतिशत कमजोर हुई।

बाजारों की यह प्रतिक्रिया राजनीतिक अनिश्चितता को लेकर निवेशकों की चिंता दर्शाती है। हालांकि, बाजार में गिरावट को केवल चुनावी नतीजों का परिणाम मानने के लिए व्यापक आर्थिक परिस्थितियों को भी देखना जरूरी होगा।

अब आगे क्या?

इजराइल में सरकार गठन की प्रक्रिया कई सप्ताह तक खिंच सकती है। छोटे दलों के साथ बातचीत, अरब दलों की भूमिका और संभावित व्यापक गठबंधन पर अंतिम फैसला इस बात को तय करेगा कि अगली सरकार का नेतृत्व कौन करेगा।

नेतन्याहू का गुट सबसे आगे होने के बावजूद बहुमत से दूर है। विपक्ष के पास भी सरकार बनाने के लिए पर्याप्त सीटें नहीं हैं। ऐसे में अंतिम मतगणना और गठबंधन वार्ताएं इजराइल की राजनीतिक दिशा तय करेंगी।

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