तमिलनाडु | ABC NATIONAL NEWS | कोयंबटूर | 23 अक्टूबर 2026
तमिलनाडु के कोयंबटूर में अनुसूचित जाति (SC) समुदाय से आने वाले 11वीं कक्षा के एक छात्र की कथित जातिगत उत्पीड़न के बाद आत्महत्या से मौत का मामला सामने आया है। घटना के दो दिन बाद पुलिस ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर को छात्र के दो सहपाठियों को गिरफ्तार किया। दोनों पर आरोप है कि वे लंबे समय से छात्र को जाति के आधार पर परेशान कर रहे थे। मामले में स्कूल के प्रधानाध्यापक और एक शिक्षक को भी निलंबित कर दिया गया है।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए दोनों नाबालिग छात्रों को किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किया गया। इसके बाद उन्हें कोयंबटूर के पापनाइकेनपालयम स्थित किशोर अवलोकन गृह भेज दिया गया।
दो महीने पहले कक्षा में अपमानित करने का आरोप
मृतक छात्र की मां ने आरोप लगाया कि लगभग दो महीने पहले एक शिक्षक ने उनके बेटे और चार अन्य विद्यार्थियों को कक्षा में खड़ा कर दिया था। मां के मुताबिक, इन विद्यार्थियों को गोमांस खाने के कारण अलग से खड़ा किया गया था। आरोप है कि इस घटना के बाद से छात्र को उसके दो सहपाठी लगातार परेशान कर रहे थे और उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे।
परिवार के आरोपों ने स्कूल में जातिगत भेदभाव और विद्यार्थियों के साथ होने वाले व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों की पूरी सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
दो सहपाठियों पर लगातार प्रताड़ना का आरोप
परिवार का कहना है कि छात्र को अपने ही स्कूल में कथित तौर पर जाति के आधार पर अपमान और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। आरोप है कि दोनों सहपाठियों की हरकतों से वह लगातार परेशान था। इसी घटनाक्रम के बीच उसने अपनी जान दे दी।
पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपित विद्यार्थियों को गिरफ्तार किया है। चूंकि वे नाबालिग हैं, इसलिए उनके खिलाफ किशोर न्याय व्यवस्था के तहत कार्रवाई की जा रही है।
प्रधानाध्यापक और शिक्षक निलंबित
मामले में स्कूल के प्रधानाध्यापक और एक शिक्षक को निलंबित किया गया है। छात्र की मां द्वारा शिक्षक पर लगाए गए आरोपों के बाद स्कूल प्रशासन की भूमिका भी जांच के दायरे में है। यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि कक्षा में कथित घटना के समय क्या हुआ था और क्या छात्र की शिकायतों पर स्कूल की ओर से कोई कार्रवाई की गई थी।
कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन, कार्रवाई की मांग
शुक्रवार को कोयंबटूर कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन भी किया गया। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानाध्यापक और संबंधित शिक्षक की गिरफ्तारी की मांग उठाई। उनका कहना था कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और छात्र को कथित रूप से प्रताड़ित किए जाने की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
यह घटना स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा, जातिगत भेदभाव और संस्थागत जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करती है। शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है; उन्हें यह भी सुनिश्चित करना होता है कि किसी विद्यार्थी को उसकी जाति, खानपान या सामाजिक पहचान के कारण अपमानित और प्रताड़ित न किया जाए।
अब पुलिस जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि छात्र के साथ क्या-क्या हुआ, आरोपित विद्यार्थियों की भूमिका क्या थी और स्कूल के जिम्मेदार अधिकारियों ने शिकायतों पर कोई कदम उठाया था या नहीं। मामले में निष्पक्ष जांच और तथ्यों के आधार पर जवाबदेही तय करना जरूरी है, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके और स्कूलों में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जा सकें।



