राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | पटना | 18 अक्टूबर 2026
बिहार की राजधानी पटना की एक अदालत ने पत्नी को तीन तलाक देने के मामले में नौशाद अहमद को दो साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर ₹6,500 का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं भरने की स्थिति में उसे एक महीने और 22 दिन की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। यह फैसला 15 अक्टूबर 2026 को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव रंजन सहाय की अदालत ने सुनाया।
अदालत ने नौशाद अहमद को मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 के साथ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 323 और 341 के तहत भी दोषी ठहराया। ये धाराएं क्रमशः स्वेच्छा से चोट पहुंचाने और गलत तरीके से रोकने से संबंधित हैं।
तीन तलाक कानून के तहत सुनाई गई सजा
तीन तलाक से जुड़े कानून के तहत एक बार में तलाक-ए-बिद्दत या इसी तरह के तत्काल और अपरिवर्तनीय तलाक की घोषणा को गैरकानूनी और शून्य माना गया है। वर्ष 2019 में बने कानून के अनुसार, ऐसा करने वाले पति के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई का प्रावधान है। कानून में दोषी पाए जाने पर तीन साल तक की कैद और जुर्माने की व्यवस्था है।
पटना की अदालत ने इसी कानून के तहत नौशाद अहमद को दो साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही अदालत ने चोट पहुंचाने और गलत तरीके से रोकने से संबंधित धाराओं में भी उन्हें दोषी ठहराया।
महिलाओं के वैवाहिक अधिकारों से जुड़ा मामला
तीन तलाक कानून का उद्देश्य तत्काल तीन तलाक की प्रथा पर कानूनी रोक लगाना और इससे प्रभावित महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करना है। कानून के तहत इस तरह तलाक देने की घोषणा वैध तलाक नहीं मानी जाती और संबंधित महिला को कानूनी उपाय अपनाने का अधिकार मिलता है।
पटना की अदालत का यह फैसला तीन तलाक से जुड़े मामलों में कानून के तहत होने वाली न्यायिक कार्रवाई का उदाहरण है। इस मामले में अदालत ने दोषसिद्धि के बाद कारावास और आर्थिक दंड दोनों की सजा सुनाई है।
फैसले के मुताबिक, नौशाद अहमद को दो साल का कठोर कारावास भुगतना होगा और ₹6,500 का जुर्माना भरना होगा। जुर्माना नहीं चुकाने पर उन्हें एक महीने और 22 दिन की अतिरिक्त कैद भी भुगतनी पड़ेगी।



