अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | पेरिस | 18 अक्टूबर 2026
फ्रांस में बढ़ती महंगाई और सार्वजनिक सेवाओं में गिरावट के खिलाफ शनिवार को हुए व्यापक प्रदर्शन कई शहरों में हिंसक हो गए। प्रदर्शनकारियों के कुछ समूहों ने सरकारी इमारतों में तोड़फोड़ की, दुकानों में लूटपाट की और पुलिस वाहनों को निशाना बनाया। लिमोज शहर का ऐतिहासिक टाउन हॉल भीषण आग की चपेट में आकर लगभग तबाह हो गया। फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू के मुताबिक, प्रदर्शनों के दौरान करीब 1,200 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
गृह मंत्रालय के अनुसार, देशभर में लगभग 5.5 लाख लोगों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया, जबकि CGT ट्रेड यूनियन ने यह संख्या आठ लाख बताई। बड़ी संख्या में लोगों ने शांतिपूर्ण मार्च निकाले, लेकिन कुछ स्थानों पर हिंसा और आगजनी के कारण हालात बिगड़ गए।
लिमोज का ऐतिहासिक टाउन हॉल आग में तबाह
लिमोज शहर का ऐतिहासिक टाउन हॉल 1873 में बनाया गया था और 1883 में इसका उद्घाटन हुआ था। यह इमारत दो विश्व युद्धों के दौर में भी सुरक्षित रही थी, लेकिन शनिवार को प्रदर्शन के दौरान लगी आग ने इसे भारी नुकसान पहुंचाया।
क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इमारत का बड़ा हिस्सा आग में नष्ट हो गया। स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी मौरिस बारात ने बताया कि इमारत की छत निचली मंजिलों पर गिर गई और पश्चिमी हिस्से को छोड़कर बाहरी ढांचे का करीब दो-तिहाई हिस्सा नष्ट हो गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नकाबपोश लोगों के एक समूह ने पहले टाउन हॉल के बाहर खड़ी पुलिस की गाड़ी में आग लगाई। इसके बाद खिड़कियां तोड़कर इमारत में आग लगा दी गई। दमकलकर्मियों ने देर रात आग पर काबू पाने की कोशिश की। अधिकारियों ने घटना को ऐतिहासिक धरोहर के लिए बड़ी क्षति बताया है।
पेरिस से मार्सेई तक तोड़फोड़ और लूटपाट
प्रदर्शन के दौरान पेरिस, मार्सेई, नीस, नांते, बोर्डो, लिमोज, लिली, टूलूज और स्ट्रासबर्ग सहित कई शहरों में दुकानों को निशाना बनाया गया। सुपरमार्केट, दवा की दुकानों, कपड़ों के शोरूम, कॉस्मेटिक स्टोर और इलेक्ट्रॉनिक सामान बेचने वाली दुकानों में लूटपाट की खबरें सामने आईं।
लियोन में एक पर्यटक कार्यालय में आग लगा दी गई, जबकि मार्सेई में प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने नगर भवन में घुसकर तोड़फोड़ की। पेरिस में पुलिस ने कुछ स्थानों पर आंसू गैस का इस्तेमाल किया। कई प्रदर्शनकारी गैस से बचने के लिए मास्क, चश्मे और हुडी पहने हुए थे।
रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ समूहों ने दुकानों की सुरक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने के बाद शीशे तोड़े और सामान लूटा। हालांकि, प्रदर्शन में शामिल कई लोगों ने कहा कि अधिकांश लोग शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें उठा रहे थे और हिंसा करने वाले समूहों ने आंदोलन को नुकसान पहुंचाया।
पेट्रोल, ऊर्जा और खाने-पीने की कीमतों से नाराजगी
फ्रांस में महंगाई का मुद्दा लगातार राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है। हाल के महीनों में पेट्रोल, ऊर्जा और खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की आर्थिक परेशानियां बढ़ाई हैं। प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह आम नागरिकों की जरूरतों और सार्वजनिक सेवाओं की समस्याओं का पर्याप्त समाधान नहीं कर रही है।
प्रदर्शनों में 2018 में शुरू हुए ‘येलो वेस्ट’ आंदोलन से जुड़े लोगों ने भी हिस्सा लिया। यह आंदोलन ईंधन कर में प्रस्तावित बढ़ोतरी और सामाजिक असमानता के खिलाफ शुरू हुआ था। इस बार सोशल मीडिया के जरिए लोगों से सड़कों पर उतरने की अपील की गई। छात्र संगठनों और ट्रेड यूनियनों ने भी प्रदर्शन का समर्थन किया।
CGT यूनियन ने अधिक वेतन और पेंशन, कम कीमतों तथा बेहतर सार्वजनिक सेवाओं की मांग उठाई। छात्र संगठन स्कूलों की स्थिति, शिक्षकों की कमी और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को लेकर पहले से प्रदर्शन कर रहे हैं।
मैक्रों सरकार पर बढ़ा राजनीतिक दबाव
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की सरकार के सामने महंगाई पर नियंत्रण और देश के बढ़ते कर्ज को संभालने की दोहरी चुनौती है। बजट योजनाओं को लेकर पहले भी सरकार को राजनीतिक विरोध का सामना करना पड़ा है।
प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू ने कहा कि सरकार हिंसा के सामने झुकेगी नहीं। उन्होंने हिंसा के लिए कट्टर वामपंथी समूहों और अपराधियों को जिम्मेदार ठहराया। राष्ट्रपति मैक्रों ने भी सरकारी कार्यालयों, दुकानों और सार्वजनिक संपत्ति पर हमले करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का भरोसा दिया।
जेडी वेंस ने आव्रजन नीति पर साधा निशाना
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने फ्रांस में हुई हिंसा को लेकर पश्चिमी देशों की आव्रजन नीतियों की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि विविधता के नाम पर आव्रजन को बढ़ावा देते समय सामाजिक समायोजन और सांस्कृतिक अनुकूलता से जुड़े सवालों को नजरअंदाज किया गया।
वेंस ने अमेरिकी नागरिकों को भी फ्रांस की घटनाओं से सबक लेने की सलाह दी। हालांकि, उपलब्ध जानकारी से यह साबित नहीं होता कि फ्रांस में हिंसा का मुख्य कारण आव्रजन है। प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में महंगाई, सामाजिक असंतोष और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़ी शिकायतें प्रमुख मुद्दे रहे हैं।
फ्रांस में अगले साल राष्ट्रपति चुनाव होने हैं। ऐसे में हिंसक प्रदर्शन सरकार पर दबाव बढ़ा रहे हैं। प्रशासन के सामने अब कानून-व्यवस्था बहाल करने के साथ-साथ आम लोगों की आर्थिक परेशानियों का समाधान खोजने की चुनौती है।



