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रक्षा PSU के टेंडर पर सवाल, पूर्व चेयरमैन की पत्नी की कंपनी को 56.8 करोड़ का ऑर्डर

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 15 अक्टूबर 2026

रक्षा क्षेत्र की सरकारी कंपनी भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) के एक टेंडर को लेकर हितों के टकराव और पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं। कंपनी ने एंटी-टैंक मिसाइलों में इस्तेमाल होने वाले ऑप्टिकल साइट्स की आपूर्ति के लिए अपने पूर्व चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक सिद्धार्थ मिश्रा की पत्नी की कंपनी ऐंद्रि डिफेंस एडवाइजरी प्राइवेट लिमिटेड को सिंगल टेंडर जारी किया। इस प्रक्रिया में दूसरी कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा नहीं हुई। कंपनी ने इसके पीछे काम की जल्द जरूरत का हवाला दिया है।

मामले के अनुसार, BDL ने मई 2026 में ऐंद्रि डिफेंस एडवाइजरी को सात महीने के भीतर 300 ऑप्टिकल साइट्स की आपूर्ति के लिए टेंडर दिया था। कंपनी की ओर से दिए गए पांच नमूनों की जांच और तकनीकी मंजूरी के बाद उसे तकनीकी चरण में सफल घोषित किया गया। इसके बाद कंपनी ने 56.8 करोड़ रुपये की बोली लगाई। फिलहाल उसकी वित्तीय बोली का मूल्यांकन किया जा रहा है।

पूर्व चेयरमैन के परिवार से जुड़ी कंपनी

ऐंद्रि डिफेंस एडवाइजरी की स्थापना सिद्धार्थ मिश्रा और उनकी पत्नी शांभवी मिश्रा ने उनके सेवानिवृत्त होने के बाद की थी। वर्तमान में कंपनी में शांभवी मिश्रा की 95 प्रतिशत हिस्सेदारी बताई गई है।

इस मामले में मुख्य सवाल यह है कि सरकारी रक्षा कंपनी ने प्रतिस्पर्धी निविदा के बजाय एक ही कंपनी को टेंडर देने का फैसला क्यों किया और इस प्रक्रिया में हितों के टकराव से बचने के लिए क्या कदम उठाए गए। किसी पूर्व अधिकारी के परिवार से जुड़ी कंपनी को सरकारी काम मिलना अपने आप में अनियमितता साबित नहीं करता, लेकिन ऐसी परिस्थितियों में निर्णय प्रक्रिया और पारदर्शिता की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।

जल्द आपूर्ति का दिया गया आधार

BDL ने टेंडर जारी करने के लिए काम की तात्कालिक जरूरत का हवाला दिया। कंपनी को सात महीने के भीतर 300 ऑप्टिकल साइट्स की आपूर्ति चाहिए थी। इससे पहले ऐंद्रि डिफेंस एडवाइजरी द्वारा दिए गए पांच नमूनों की जांच और तकनीकी मंजूरी की प्रक्रिया पूरी की गई थी।

हालांकि, सिंगल टेंडर में प्रतिस्पर्धा नहीं होने के कारण यह सवाल उठता है कि क्या दूसरी योग्य कंपनियों को भी अवसर दिया जा सकता था और क्या कीमत का निर्धारण पर्याप्त प्रतिस्पर्धा के बिना हुआ। 56.8 करोड़ रुपये की बोली फिलहाल वित्तीय मूल्यांकन के अधीन है, इसलिए इसे अंतिम स्वीकृत भुगतान या पूरा हो चुका ऑर्डर मानना उचित नहीं होगा।

पारदर्शिता और जवाबदेही का सवाल

रक्षा खरीद में समय पर सामान उपलब्ध कराना जरूरी है, लेकिन सरकारी धन के इस्तेमाल में पारदर्शिता और निष्पक्षता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। खासकर तब, जब टेंडर पाने वाली कंपनी का संबंध सरकारी रक्षा PSU के पूर्व शीर्ष अधिकारी के परिवार से हो।

अब इस मामले में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि सिंगल टेंडर का निर्णय किन नियमों के तहत लिया गया, आपूर्ति की कीमत का मूल्यांकन कैसे हो रहा है और हितों के टकराव से बचने के लिए कौन-सी प्रक्रिया अपनाई गई।

ABC NATIONAL NEWS का निष्कर्ष: BDL के इस टेंडर ने रक्षा खरीद में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा को लेकर सवाल खड़े किए हैं। कंपनी ने जल्द आपूर्ति की जरूरत को आधार बनाया है, जबकि पूर्व चेयरमैन के परिवार से जुड़ी कंपनी को टेंडर मिलने के कारण निर्णय प्रक्रिया पर अतिरिक्त स्पष्टता जरूरी हो जाती है। अब वित्तीय मूल्यांकन और टेंडर से जुड़े दस्तावेजों से यह समझने में मदद मिलेगी कि खरीद प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुरूप हुई या नहीं।

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