[the_ad id="179"]
Home » National » दिल्ली में सांसद तक सुरक्षित नहीं! जॉन ब्रिटास का आरोप—CRPF ने पीटा, गला दबाने की कोशिश की

दिल्ली में सांसद तक सुरक्षित नहीं! जॉन ब्रिटास का आरोप—CRPF ने पीटा, गला दबाने की कोशिश की

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 11 अक्टूबर 2026

दिल्ली में चुनावी पारदर्शिता और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर उठी आवाजों के बीच अब राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवानों पर गंभीर आरोप लगाकर सुरक्षा व्यवस्था और पुलिसिया कार्रवाई पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। CPI(M) के सांसद ब्रिटास के मुताबिक, मीडिया से बात करते समय उन्हें जबरन खींचकर ले जाया गया। उन्होंने खुद को सांसद बताते हुए अपनी पहचान भी स्पष्ट की, लेकिन उनका कहना है कि इसके बावजूद सुरक्षाकर्मियों का रवैया नहीं बदला। द हिंदू की 11 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, सामने आए वीडियो में सुरक्षाकर्मी ब्रिटास को मीडिया से बातचीत के दौरान खींचकर ले जाते दिखाई देते हैं।

‘सांसद बताया, फिर भी नहीं रुके; गला दबाने की कोशिश की’

जॉन ब्रिटास ने आरोप लगाया कि सुरक्षाकर्मियों को बार-बार यह बताने के बावजूद कि वह संसद के सदस्य हैं, उनके साथ कथित तौर पर मारपीट और बदसलूकी की गई। ब्रिटास के अनुसार, पुलिस वाहन के भीतर उन्हें सीट पर दबाया गया और उनका गला दबाने की कोशिश की गई। उन्होंने यह भी कहा कि बाद में उन्हें सड़क किनारे छोड़ दिया गया। यदि उनके बयान की पुष्टि होती है, तो यह केवल एक जनप्रतिनिधि के साथ दुर्व्यवहार का मामला नहीं, बल्कि हिरासत के दौरान सुरक्षा बलों के आचरण पर गंभीर सवाल होगा।

जिस देश में सांसद जनता की आवाज संसद तक पहुंचाते हैं, वहां किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि के साथ इस तरह के व्यवहार की शिकायत को हल्के में नहीं लिया जा सकता। सवाल यह है कि जब एक राज्यसभा सांसद अपनी पहचान बताने के बावजूद कथित दुर्व्यवहार की शिकायत कर रहा है, तो आम प्रदर्शनकारी हिरासत के दौरान अपने अधिकारों की रक्षा कैसे सुनिश्चित कर सकते हैं? कानून-व्यवस्था के नाम पर कार्रवाई करने वाले बलों की जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी है, जितनी सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी।

चुनावी सवालों के बीच पुलिस कार्रवाई पर घिरा प्रशासन

दिल्ली में CJP और अन्य संगठनों के प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबरों के बीच ब्रिटास का मामला सामने आया है। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग कर रहे हैं। विपक्षी नेताओं ने प्रदर्शनकारियों की आवाजाही पर प्रतिबंधों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए हैं। ऐसे माहौल में ब्रिटास के आरोपों ने विवाद को और गंभीर बना दिया है।

लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध और असहमति की आवाज को सुनना सत्ता और प्रशासन की जिम्मेदारी है। सुरक्षा बलों का काम कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, न कि किसी व्यक्ति को अपमानित करना या उसके साथ बल प्रयोग की शिकायतों को अनदेखा करना। यदि किसी हिरासत में लिए गए व्यक्ति के साथ मारपीट या गला दबाने की कोशिश हुई है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार पाए जाने वालों पर कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

वीडियो की जांच हो, जवाबदेही तय हो

जॉन ब्रिटास के आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच, घटनास्थल के वीडियो की पड़ताल तथा संबंधित सुरक्षाकर्मियों की पहचान अब अहम है। CRPF और संबंधित अधिकारियों का पक्ष भी सामने आना चाहिए, ताकि पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सके। उपलब्ध वीडियो में ब्रिटास को ले जाते हुए देखा जाना अपने आप में उनके द्वारा लगाए गए हर आरोप को साबित नहीं करता, लेकिन उनके बयान और दृश्य सामग्री की गंभीरता से जांच जरूरी बनाती है।

लोकतंत्र में वर्दी कानून से ऊपर नहीं हो सकती। यदि किसी सांसद या आम नागरिक के साथ हिरासत में दुर्व्यवहार हुआ है, तो जवाबदेही तय होनी चाहिए। चुनावी पारदर्शिता पर उठ रहे सवालों के बीच प्रशासन के लिए यह जरूरी है कि वह आलोचना को दबाने के बजाय आरोपों की निष्पक्ष जांच कराए और जनता का भरोसा कायम रखे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *