राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 8 अक्टूबर 2026
10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित CJP के बड़े प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को बेहद व्यापक स्तर पर बढ़ाने की तैयारी की है। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाओं और छात्रों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए पुलिस 450 से 500 अतिरिक्त महिला अर्धसैनिक बलों को तैनात करेगी। कम से कम पांच ऑल-विमेन कंपनियां दिल्ली पुलिस के साथ सुरक्षा व्यवस्था संभालेंगी।
प्रदर्शन के लिए करीब 11,000 अतिरिक्त केंद्रीय बल के जवान दिल्ली में तैनात किए जाने की तैयारी है। इसके बाद राजधानी में तैनात केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल यानी CAPF कर्मियों की कुल संख्या लगभग 26,000 तक पहुंच सकती है। यह 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के बाद दिल्ली में होने वाली सबसे बड़ी केंद्रीय सुरक्षा तैनातियों में से एक होगी।
फिलहाल नई दिल्ली जिले में करीब 5,000 दिल्ली पुलिसकर्मी तैनात हैं, जहां जंतर-मंतर स्थित है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार जरूरत पड़ने पर यह संख्या बढ़ाकर 15,000 तक की जा सकती है। अतिरिक्त महिला अर्धसैनिक बलों की तैनाती दिल्ली पुलिस की महिला कर्मियों के अतिरिक्त होगी।
पुलिस की रणनीति सिर्फ भारी सुरक्षा बल तैनात करने तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक प्रदर्शन में छात्रों की संभावित भागीदारी को देखते हुए दिल्ली पुलिस रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों यानी RWA और PG मालिकों से भी संपर्क कर रही है, ताकि छात्रों को प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने से रोका या हतोत्साहित किया जा सके।
यह तैयारी ऐसे समय में हो रही है जब CJP ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर बड़े प्रदर्शन का आह्वान किया है। संगठन SIR और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर विरोध कर रहा है। इससे पहले भी दिल्ली में इस मुद्दे को लेकर विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव देखने को मिला है।
महिला प्रदर्शनकारियों की बड़ी संख्या की आशंका को देखते हुए अतिरिक्त महिला सुरक्षाकर्मियों की तैनाती का उद्देश्य भीड़ प्रबंधन और महिला प्रदर्शनकारियों से जुड़ी परिस्थितियों को संभालना बताया जा रहा है। हालांकि, इतनी बड़ी सुरक्षा तैनाती के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन किस तरह कायम किया जाएगा।
10 अक्टूबर का प्रदर्शन अब दिल्ली पुलिस के लिए भी बड़ी परीक्षा बन गया है। एक तरफ प्रशासन अभूतपूर्व स्तर पर सुरक्षा तैयारियां कर रहा है, वहीं प्रदर्शनकारी SIR और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अपने सवालों को लेकर जंतर-मंतर पहुंचने की तैयारी में हैं।
अब निगाहें 10 अक्टूबर पर हैं—क्या इतनी भारी सुरक्षा के बीच प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से हो पाएगा और क्या पुलिस लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार तथा सार्वजनिक व्यवस्था, दोनों के बीच संतुलन कायम रख पाएगी?



