नई दिल्ली
29 जुलाई 2025
लोकसभा में वरिष्ठ नेता शशि थरूर के बयान के बाद अब कांग्रेस पार्टी के भीतर से एक और आवाज उभर कर सामने आई है। एक और सांसद ने “भारत की बात” शीर्षक से पार्टी नेतृत्व को आत्ममंथन की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को जनता की भावनाओं को समझते हुए जमीन से जुड़ना होगा, वरना पार्टी का गिरता ग्राफ और गिरता जाएगा।
क्या है “भारत की बात” का संदेश?
इस संदेश में सांसद ने लिखा है कि अब समय आ गया है कि कांग्रेस आत्मनिरीक्षण करे और देश की आवाज़ को प्राथमिकता दे। “भारत बदल चुका है, और कांग्रेस को भी बदलना होगा। सिर्फ अतीत के गौरव से भविष्य नहीं बनता।”
शशि थरूर की टिप्पणी की पृष्ठभूमि:
बीते हफ्ते शशि थरूर ने भी कांग्रेस के वर्तमान नेतृत्व और नीति-निर्धारण शैली पर सवाल उठाते हुए कहा था कि “पार्टी को अब ज़मीन पर लोगों की आवाज़ सुननी चाहिए, न कि सिर्फ दिल्ली के कमरों से राजनीति चलानी चाहिए।”
बढ़ती आंतरिक बेचैनी:
विश्लेषकों का मानना है कि 2024 के आम चुनावों में करारी हार और उसके बाद कई राज्यों में कमजोर प्रदर्शन ने कांग्रेस के भीतर असंतोष बढ़ा दिया है। अब पार्टी के अंदर से ही नेतृत्व, संगठनात्मक कार्यप्रणाली और चुनावी रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं।
पार्टी की प्रतिक्रिया:
कांग्रेस हाईकमान ने अभी तक इस नई टिप्पणी पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक पार्टी नेतृत्व अंदरूनी बैठकों के जरिए इस बढ़ती आलोचना को नियंत्रित करने की कोशिश में जुटा है।
“भारत की बात” अब सिर्फ एक वाक्य नहीं, बल्कि कांग्रेस के अंदर उठती असहमति की प्रतीक बनती जा रही है। शशि थरूर के बाद अब और नेताओं की ओर से खुलकर विचार व्यक्त करना यह दर्शाता है कि पार्टी को अब सिर्फ नेतृत्व संकट नहीं, बल्कि विचारधारा और दिशा पर भी पुनर्विचार करना होगा।




