दिल्ली/ ट्रैफिक/ ट्रैवल | ABC NATIONAL NEWS | 7 अक्टूबर 2026
दिल्ली को ट्रैफिक जाम से राहत देने के लिए शुरू किया गया बरापुल्ला फेज-III कॉरिडोर खुलते ही खुद जाम की बड़ी वजह बन गया है। मयूर विहार से सराय काले खां को जोड़ने वाले इस नए फ्लाईओवर पर लगातार लग रहे भारी जाम के बाद अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर गलती किसकी है—डिजाइन में खामी, ट्रैफिक प्लानिंग की कमी या Google Maps का गलत अपडेट?
जाम बढ़ने के साथ ही दिल्ली सरकार, ट्रैफिक पुलिस, PWD और Google Maps को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने जहां पुराने बरापुल्ला फ्लाईओवर के पास बने स्ट्रक्चरल बॉटलनेक को बड़ी वजह बताया है, वहीं PWD अधिकारियों ने Google Maps पर रियल-टाइम ट्रैफिक जानकारी सही ढंग से अपडेट न होने को भी समस्या बढ़ाने वाला कारण बताया है। इसी बीच दिल्ली के PWD मंत्री प्रवेश वर्मा ने परियोजना की डिजाइन और तकनीकी योजना के लिए पिछली AAP सरकार को जिम्मेदार ठहराया है।
नई सड़क, लेकिन पुरानी समस्या से बड़ा जाम
बरापुल्ला फेज-III को 29 सितंबर को जनता के लिए खोला गया था। करीब ₹1,635 करोड़ की लागत वाली यह परियोजना मयूर विहार फेज-I को नोएडा लिंक रोड से सराय काले खां स्थित रिंग रोड तक जोड़ती है।
इसका मकसद पूर्वी दिल्ली और दक्षिणी दिल्ली के बीच सफर आसान करना, दिल्ली-नोएडा डायरेक्ट फ्लाईवे और अक्षरधाम क्षेत्र पर ट्रैफिक का दबाव कम करना और करीब 10 किलोमीटर का सिग्नल-फ्री कॉरिडोर तैयार करना था।
लेकिन शुरुआत के कुछ ही दिनों में यात्रियों को राहत के बजाय लंबा जाम मिलने लगा। मयूर विहार से एम्स की ओर जाने वाले रास्ते पर करीब दो किलोमीटर तक जाम की स्थिति सामने आई। यहां तक कि एक एंबुलेंस के जाम में फंसने की भी खबर सामने आई।
ट्रैफिक पुलिस ने बताई डिजाइन की खामी
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक जाम की मुख्य वजह नए और पुराने बरापुल्ला कॉरिडोर के बीच ट्रैफिक का अचानक मिलना है।
1 अक्टूबर को किए गए एरियल सर्वे में सामने आया कि सुंदरियाल के पास नए फ्लाईओवर से आने वाला भारी ट्रैफिक पुराने बरापुल्ला फ्लाईओवर की ओर जाने वाली अपेक्षाकृत कम क्षमता वाली सड़क में मिल रहा है।
यानी कई दिशाओं से आने वाली गाड़ियों का ट्रैफिक एक संकरे हिस्से में पहुंच रहा है। लेन क्षमता में इस अंतर के कारण वाहनों का दबाव बढ़ता है और देखते ही देखते जाम लंबा होता जाता है।
ट्रैफिक पुलिस ने पहले सोशल मीडिया पर इसे “स्ट्रक्चरल बॉटलनेक” बताया था। हालांकि बाद में यह पोस्ट हटा दी गई। संयुक्त पुलिस आयुक्त, ट्रैफिक संजय त्यागी ने कहा कि पोस्ट को तथ्यों की पुष्टि के लिए हटाया गया था।
अब Google Maps भी सवालों के घेरे में
बरापुल्ला जाम की कहानी में अब Google Maps भी एक अहम किरदार बन गया है।
ट्रैफिक पुलिस और PWD अधिकारियों का कहना है कि Google Maps पर इस इलाके के वास्तविक समय के ट्रैफिक की सही जानकारी अपडेट नहीं हो रही है। इसका असर यह हो रहा है कि वाहन चालक जाम वाले मार्ग की ओर लगातार पहुंच रहे हैं और पहले से दबाव झेल रहे बरापुल्ला कॉरिडोर पर वाहनों की संख्या और बढ़ रही है।
PWD के एक अधिकारी ने भी कहा कि Google Maps पर रियल-टाइम ट्रैफिक जानकारी अपडेट नहीं होने से यात्रियों को सही दिशा नहीं मिल पा रही और इससे जाम और बढ़ रहा है।
PWD मंत्री प्रवेश वर्मा ने कहा कि विभाग Google Maps के संपर्क में है। उनके अनुसार प्लेटफॉर्म के एल्गोरिदम को सड़क की बदली हुई ट्रैफिक स्थिति को अपडेट करने में कुछ समय लग सकता है।
BJP ने AAP सरकार पर डाला ठीकरा
जाम को लेकर राजनीतिक ब्लेम गेम भी तेज हो गया है।
दिल्ली के PWD मंत्री प्रवेश वर्मा ने बरापुल्ला फेज-III की डिजाइन और योजना के लिए पिछली AAP सरकार को जिम्मेदार बताया है। उनका कहना है कि परियोजना से जुड़े टेंडर स्पेसिफिकेशन और तकनीकी व्यवहार्यता पिछली सरकार के कार्यकाल में तय की गई थी।
वर्मा का तर्क है कि मौजूदा सरकार अब सामने आई समस्याओं को ठीक करने के लिए काम कर रही है और ट्रैफिक पुलिस द्वारा सुझाए गए शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म उपायों पर चर्चा की जा रही है।
PWD, ट्रैफिक पुलिस और NHAI की बैठक भी बेनतीजा
समस्या के समाधान के लिए PWD, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और NHAI के अधिकारियों की बैठक हो चुकी है, लेकिन अभी तक कोई अंतिम समाधान तय नहीं हुआ है।
फिलहाल बरापुल्ला जंक्शन पर दबाव कम करने के लिए फेज-III से आने वाले ट्रैफिक के एक हिस्से को NH-24 और DND की तरफ डायवर्ट किया जा रहा है। ट्रैफिक पुलिस के जवान भी मौके पर तैनात हैं।
सवाल सिर्फ जाम का नहीं, जिम्मेदारी का भी
बरापुल्ला फेज-III से उम्मीद थी कि यह दिल्ली के ट्रैफिक नेटवर्क को राहत देगा। लेकिन फिलहाल हालात इसके उलट दिखाई दे रहे हैं।
एक तरफ ट्रैफिक पुलिस स्ट्रक्चरल बॉटलनेक की बात कर रही है, दूसरी तरफ PWD Google Maps के अपडेट को समस्या बढ़ाने वाला बता रहा है और BJP सरकार पिछली AAP सरकार के दौर की डिजाइन और प्लानिंग पर सवाल उठा रही है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—₹1,635 करोड़ की परियोजना शुरू होने से पहले यह ट्रैफिक बॉटलनेक क्यों नहीं पहचाना गया?
बरापुल्ला पर जाम का समाधान कब निकलेगा, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। लेकिन फिलहाल दिल्ली की सड़कों पर फंसा यातायात एक ऐसे ब्लेम गेम का गवाह बन रहा है, जिसमें जिम्मेदारी तय करने से पहले हर पक्ष अपनी भूमिका से हाथ खींचता नजर आ रहा है।



