राष्ट्रीय/ राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 7 अक्टूबर 2026
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच टकराव बुधवार को और तेज हो गया। मंगलवार को चुनाव आयोग तक मार्च रोकने, लंबे धरने और राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई विपक्षी नेताओं की हिरासत के बाद राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA ब्लॉक के विपक्षी सांसद बुधवार को जंतर-मंतर पहुंचे और फिर से प्रदर्शन शुरू किया। विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, SIR को लेकर जवाबदेही और मतदाता सूची से जुड़े सवालों पर स्पष्ट जवाब की मांग दोहराई।
बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने विपक्षी सांसदों के लिए जनपथ स्थित सागर रत्ना में लंच का आयोजन किया। बैठक के बाद विपक्षी सांसद बसों में सवार होकर जंतर-मंतर की ओर रवाना हुए। रिपोर्टों के मुताबिक करीब 300 विपक्षी सांसद इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए जुटे। राहुल गांधी ने कहा कि मंगलवार को करीब 300 सांसद चुनाव आयुक्तों से मिलना चाहते थे, लेकिन उन्हें मिलने नहीं दिया गया। इसके बाद उन्होंने कहा कि विपक्ष अब निर्धारित प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर पर अपनी बात रखेगा।
राहुल गांधी ने जंतर-मंतर जाने से पहले कहा कि विपक्ष का विरोध SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े सवालों को लेकर है। उन्होंने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई और कहा कि विपक्ष अपनी लड़ाई जारी रखेगा। राहुल ने मंगलवार को दर्ज FIR का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उनके खिलाफ FIR की संख्या बढ़ती है तो वह उसे भी स्वीकार करेंगे। उनके अनुसार, उनके खिलाफ पहले से कई FIR दर्ज हैं और उनका लक्ष्य 100 FIR का है, जिसे उन्होंने व्यंग्यात्मक रूप से “मेडल” बताया।
इससे पहले मंगलवार को विपक्षी सांसद संसद से चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च कर रहे थे। विपक्ष का कहना था कि वे चुनाव आयुक्तों से मिलकर SIR और मतदाता सूची से जुड़े सवाल रखना चाहते हैं। पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोका। इसके बाद राहुल गांधी और अन्य नेताओं ने धरना दिया। प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई नेता अकाशवाणी भवन परिसर में चले गए, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया। देर रात उन्हें रिहा कर दिया गया।
विवाद का एक अहम पक्ष चुनाव आयोग की सफाई भी है। आयोग का कहना है कि विपक्षी सांसदों ने मंगलवार को शाम 4 बजे तक औपचारिक मुलाकात का अनुरोध नहीं किया था। बाद में आयोग को पुलिस के माध्यम से संसद भवन एनेक्सी में बैठक की मांग की जानकारी मिली। चुनाव आयोग ने इसे निर्धारित प्रोटोकॉल से अलग बताते हुए कहा कि राजनीतिक प्रतिनिधिमंडलों की बैठक आम तौर पर आयोग के परिसर में होती है। आयोग के अनुसार, उसने वरिष्ठ अधिकारी को प्रस्तावित स्थान पर भेजकर ज्ञापन लेने का विकल्प दिया था, लेकिन विपक्षी नेताओं ने इसे स्वीकार नहीं किया।
यही मुद्दा अब राजनीतिक संघर्ष का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है। विपक्ष पूछ रहा है कि जब सैकड़ों निर्वाचित सांसद चुनाव प्रक्रिया से जुड़े गंभीर सवाल लेकर चुनाव आयोग से संवाद करना चाहते हैं, तो उन्हें सीधे चुनाव आयुक्तों से मिलने का अवसर क्यों नहीं मिला। दूसरी ओर आयोग अपने स्थापित प्रोटोकॉल का हवाला दे रहा है। इस पूरे घटनाक्रम ने चुनाव आयोग की पारदर्शिता, संवाद और संस्थागत विश्वसनीयता को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
विपक्ष का मुख्य आरोप SIR को लेकर है। विपक्षी दलों का दावा है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं और आयोग को इसकी पूरी प्रक्रिया पर जवाब देना चाहिए। हालांकि ‘वोट चोरी’ और चुनावी अनियमितताओं से जुड़े ये आरोप विपक्ष के राजनीतिक दावे हैं; इनके तथ्यात्मक निष्कर्ष अलग-अलग मामलों और संबंधित कानूनी/चुनावी प्रक्रियाओं के आधार पर तय होंगे।
इस बीच जंतर-मंतर पर विपक्ष के पहुंचने के साथ दिल्ली में सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है। वहीं Cockroach Janta Party (CJP) और छात्र संगठनों ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर बड़े प्रदर्शन का ऐलान किया है। CJP ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के अलावा SIR वापस लेने, मतदाता सूची बहाल करने और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून में बदलाव की मांग उठाई है।
मंगलवार की हिरासत और बुधवार के जंतर-मंतर प्रदर्शन ने यह साफ कर दिया है कि यह विवाद अब केवल चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच बयानबाजी तक सीमित नहीं है। सवाल चुनावी प्रक्रिया में भरोसे, मतदाता सूची की पारदर्शिता और संवैधानिक संस्था तथा निर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच संवाद का है। आने वाले दिनों में यह टकराव किस दिशा में जाता है, इस पर पूरे देश की नजर है।



