राष्ट्रीय/ व्यापार | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 6 अक्टूबर 2026
भारत ने अपनी बढ़ती परमाणु ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए घरेलू यूरेनियम उत्पादन बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। Uranium Corporation of India Limited (UCIL) ने 2036 तक देश में यूरेनियम उत्पादन को मौजूदा स्तर से दोगुना करने की योजना तैयार की है। इसके लिए चार नए ग्रीनफील्ड खनन एवं प्रसंस्करण प्रोजेक्ट विकसित किए जाएंगे। साथ ही पहली बार तांबे की खदानों से निकलने वाले अवशेषों से भी यूरेनियम निकालने की योजना पर काम हो रहा है।
UCIL की यह रणनीति ऐसे समय में सामने आई है जब भारत परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़ाने और बिजली उत्पादन में परमाणु ऊर्जा की हिस्सेदारी मजबूत करने पर जोर दे रहा है। घरेलू यूरेनियम उपलब्धता बढ़ने से देश को परमाणु ईंधन की आपूर्ति को मजबूत करने में मदद मिल सकती है। झारखंड के जादूगोड़ा सहित देश में यूरेनियम खनन और प्रसंस्करण से जुड़े मौजूदा ढांचे के विस्तार के साथ नए क्षेत्रों में उत्पादन क्षमता विकसित करने की तैयारी की जा रही है।
इस योजना का एक अहम हिस्सा तांबे की खदानों से निकलने वाले अवशेषों से यूरेनियम की रिकवरी है। UCIL को उम्मीद है कि 2029-30 से इस दिशा में व्यावसायिक स्तर पर काम शुरू किया जा सकता है। इस परियोजना के लिए Hindustan Copper Limited (HCL) के साथ समझ बनी है। तांबे की खदानों से निकलने वाले अवशेषों में मौजूद यूरेनियम को दोबारा उपयोग में लाने से न केवल अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध होंगे, बल्कि नए खनन पर होने वाली लागत को भी कम करने में मदद मिल सकती है।
UCIL की यह पहल सर्कुलर इकोनॉमी की अवधारणा से भी जुड़ी है। यानी खनन प्रक्रिया में निकलने वाले ऐसे अवशेष, जिन्हें पहले बेकार समझा जाता था, उनमें मौजूद उपयोगी खनिजों को दोबारा हासिल कर आर्थिक संसाधन में बदला जाएगा। इससे यूरेनियम की रिकवरी को अधिक किफायती बनाने और घरेलू उत्पादन बढ़ाने की संभावना है।
चार ग्रीनफील्ड परियोजनाओं के जरिए खनन के साथ-साथ प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा। नई परियोजनाओं के पूरा होने के बाद 2036 तक UCIL के घरेलू यूरेनियम उत्पादन को दोगुना करने का लक्ष्य है। यह विस्तार भारत की दीर्घकालिक परमाणु ऊर्जा रणनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के विस्तार के साथ परमाणु ईंधन की स्थिर और भरोसेमंद आपूर्ति भी जरूरी होगी।
भारत लंबे समय से ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए घरेलू संसाधनों और स्वदेशी तकनीकी क्षमता पर जोर देता रहा है। ऐसे में यूरेनियम उत्पादन बढ़ाने की UCIL की योजना केवल खनन क्षेत्र का विस्तार नहीं है, बल्कि देश की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति से जुड़ा कदम भी है। घरेलू स्तर पर यूरेनियम की उपलब्धता बढ़ने से आने वाले वर्षों में भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को अधिक मजबूत आधार मिलने की उम्मीद है



