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GST में अगले दौर के सुधार की तैयारी, 8 अक्टूबर की बैठक में केंद्र रखेगा 5 सूत्रीय प्लान

अर्थव्यवस्था/ व्यापार | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 6 अक्टूबर

वस्तु एवं सेवा कर यानी GST व्यवस्था को और आसान, तेज और कारोबारी अनुकूल बनाने के लिए केंद्र सरकार अगले दौर के सुधारों का पांच सूत्रीय प्रस्ताव GST परिषद की आगामी बैठक में रखने की तैयारी में है। 8 अक्टूबर को होने वाली GST परिषद की बैठक में वित्त मंत्रालय की ओर से प्रक्रिया सुधार, संरचनात्मक सुधार, जीवन और कारोबार को आसान बनाने, सेवा निर्यात को बढ़ावा देने तथा ई-कॉमर्स से जुड़े मुद्दों पर प्रस्ताव रखे जाने की जानकारी सामने आई है। सरकार का जोर GST व्यवस्था में मौजूद प्रशासनिक अड़चनों को कम करने और अधिक से अधिक प्रक्रियाओं को स्वचालित बनाने पर रहेगा, ताकि खासकर छोटे कारोबारियों पर अनुपालन का बोझ कम किया जा सके।

सूत्रों के मुताबिक प्रस्तावित सुधारों का एक बड़ा उद्देश्य GST से जुड़ी मौजूदा प्रक्रियाओं को सरल बनाना और उनमें तकनीक का अधिक प्रभावी इस्तेमाल करना है। छोटे और मध्यम कारोबारियों के लिए GST अनुपालन लंबे समय से एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है। रिटर्न दाखिल करने, दस्तावेजों और अन्य प्रक्रियाओं से जुड़ी जटिलताओं को कम करने के साथ-साथ सरकार व्यवस्था को इस तरह विकसित करना चाहती है जिससे कारोबारियों को अनावश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाओं में कम समय और संसाधन खर्च करने पड़ें। प्रस्ताव में संरचनात्मक सुधारों के साथ ‘Ease of Living’ और ‘Ease of Doing Business’ पर भी जोर दिया जाएगा।

GST परिषद की इस बैठक में हालांकि कर दरों में बदलाव को लेकर कोई बड़ा प्रस्ताव एजेंडे में शामिल नहीं बताया गया है। खास तौर पर UPI लेनदेन पर Merchant Discount Rate यानी MDR से जुड़े GST को लेकर भी इस बैठक में दरों पर चर्चा प्रस्तावित नहीं है। ऐसे में इस बैठक का मुख्य फोकस नई दरें तय करने के बजाय GST व्यवस्था को अधिक कुशल बनाने और उसके प्रशासनिक ढांचे में सुधार करने पर रहने की संभावना है।

सरकार के पांच सूत्रीय प्रस्ताव में सेवा निर्यात को बढ़ावा देना भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारत तेजी से वैश्विक सेवा अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण केंद्र बन रहा है और IT, प्रोफेशनल सेवाओं तथा अन्य डिजिटल सेवाओं के निर्यात में देश की भूमिका लगातार बढ़ी है। ऐसे में GST व्यवस्था के तहत सेवा निर्यात से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान बनाना भारतीय कंपनियों और सेवा प्रदाताओं के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। सरकार की कोशिश ऐसे नियमों और प्रक्रियाओं को सरल करने की है जो भारतीय सेवा कंपनियों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करते हैं।

ई-कॉमर्स क्षेत्र भी प्रस्तावित सुधारों के केंद्र में रहेगा। डिजिटल कारोबार के तेजी से विस्तार के साथ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, विक्रेताओं और सेवा प्रदाताओं के लिए GST से जुड़ी प्रक्रियाएं लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही हैं। सरकार इस क्षेत्र में अनुपालन को अधिक व्यवस्थित और सरल बनाने की दिशा में कदम उठाने पर विचार कर रही है। इसका उद्देश्य एक तरफ राजस्व व्यवस्था को मजबूत बनाए रखना और दूसरी तरफ ई-कॉमर्स कारोबार के लिए अनावश्यक जटिलताओं को कम करना है।

GST व्यवस्था लागू होने के बाद पिछले वर्षों में इसमें कई चरणों में बदलाव किए गए हैं। अब केंद्र सरकार का अगला फोकस व्यवस्था को केवल कर संग्रह के ढांचे के रूप में देखने के बजाय उसे अधिक तकनीक आधारित, सरल और कारोबार के अनुकूल बनाने पर दिखाई दे रहा है। खासकर छोटे कारोबारियों के लिए अनुपालन लागत कम करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। 8 अक्टूबर की GST परिषद बैठक में राज्यों और केंद्र के बीच इन प्रस्तावों पर चर्चा के बाद आगे की दिशा तय होगी।

इस बैठक पर इसलिए भी नजर रहेगी क्योंकि GST से जुड़े किसी भी बड़े प्रशासनिक या संरचनात्मक बदलाव का सीधा असर करोड़ों कारोबारियों और उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस बार फोकस GST की दरों में बदलाव से ज्यादा सिस्टम को आसान बनाने पर है। पांच सूत्रीय सुधार योजना अगर व्यापक सहमति के साथ आगे बढ़ती है तो आने वाले समय में GST अनुपालन की प्रक्रिया, डिजिटल कारोबार और सेवा निर्यात के लिए महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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