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‘ज्ञानेश ने लोकतंत्र का गला घोंट दिया’, चुनाव आयोग की साख पर सचिन पायलट का करारा वार

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 4 अक्टूबर 2026

वोटर लिस्ट को लेकर उठे सवालों के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने बेहद तीखा हमला बोला है। पायलट ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में चुनाव आयोग की स्वतंत्रता कमजोर हुई है और SIR के नाम पर मतदाताओं को चुनिंदा तरीके से सूची से बाहर किए जाने की आशंका पैदा हुई है। उन्होंने आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

‘एक व्यक्ति ने आयोग को बना दिया कमजोर?’

जयपुर में पत्रकारों से बातचीत में पायलट ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े फैसलों में मुख्य चुनाव आयुक्त ने आयोग के अन्य दो चुनाव आयुक्तों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया।

पायलट का कहना है कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था किसी एक व्यक्ति की मर्जी से नहीं, बल्कि संस्थागत प्रक्रिया और सामूहिक निर्णय से चलनी चाहिए। अगर महत्वपूर्ण चुनावी फैसलों में दूसरे आयुक्तों की भूमिका को दरकिनार किया जाता है तो इससे आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठते हैं।

SIR बना सबसे बड़ा राजनीतिक विस्फोट

SIR को लेकर विपक्ष लगातार हमलावर है। आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं और चुनिंदा मतदाताओं को सूची से बाहर किए जाने का खतरा पैदा हुआ है।

पायलट ने इसी मुद्दे को लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़ते हुए सवाल उठाया कि जिस व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से ही गायब हो जाए, वह चुनाव में अपने लोकतांत्रिक अधिकार का इस्तेमाल कैसे करेगा?

यही वजह है कि SIR अब महज प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं रह गया है। यह चुनावी निष्पक्षता और मताधिकार के सवाल पर राजनीतिक संघर्ष का बड़ा मुद्दा बन चुका है।

‘आयोग की साख को पहुंचा नुकसान’

पायलट ने ज्ञानेश कुमार पर कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि चुनाव आयोग की प्रतिष्ठा उसकी निष्पक्षता और स्वतंत्रता से बनती है। उनके मुताबिक यदि आयोग के फैसलों को लेकर ही पक्षपात और संस्थागत स्वतंत्रता पर सवाल उठने लगें, तो नुकसान सिर्फ किसी एक अधिकारी का नहीं, बल्कि पूरी संवैधानिक संस्था की साख का होता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा विवाद ने आयोग की विश्वसनीयता को गंभीर नुकसान पहुंचाया है।

सड़क पर विरोध, बढ़ता राजनीतिक दबाव

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध अब दिल्ली से निकलकर देश के अलग-अलग हिस्सों में पहुंच रहा है। दिल्ली में छात्र संगठनों के प्रदर्शन हुए हैं। AISA अध्यक्ष नेहा बोरा को प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया। मुंबई में राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने CEC के खिलाफ मार्च किया।

विपक्षी दलों ने आने वाले दिनों में भी प्रदर्शन जारी रखने का ऐलान किया है।

इस बीच BJP ने SIR को लेकर विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है और चुनाव आयोग की प्रक्रिया का बचाव किया है।

अब असली लड़ाई भरोसे की

मामला सिर्फ ज्ञानेश कुमार पर राजनीतिक हमले तक सीमित नहीं है। असली संकट मतदाता और चुनाव आयोग के बीच भरोसे का है।

चुनाव आयोग के सामने चुनौती यह है कि वह मतदाता सूची को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब किस तरह देता है और यह भरोसा कैसे बहाल करता है कि किसी भी नागरिक का वोट राजनीतिक या प्रशासनिक प्रक्रिया की भेंट नहीं चढ़ेगा।

क्योंकि लोकतंत्र में चुनाव सिर्फ वोट डालने का नाम नहीं है। पहले यह सुनिश्चित करना पड़ता है कि हर पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में सुरक्षित हो।

और इसी बिंदु पर सचिन पायलट का हमला बेहद राजनीतिक और गंभीर हो जाता है—आरोप अगर मतदाता के अधिकार पर चोट का है, तो जवाब केवल बयान से नहीं, पारदर्शिता और जवाबदेही से देना होगा।

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