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SIR पर बड़ा सवाल: BLO ने खारिज किए Bulk Form 7, बोले—“ऐसे फॉर्म लेना संभव नहीं”

राष्ट्रीय/तेलंगाना | ABC NATIONAL NEWS | हैदराबाद | 4 अक्टूबर 2026

हैदराबाद में मतदाता सूची के Special Intensive Revision यानी SIR के दौरान बड़ी संख्या में पहले से प्रिंट किए गए Form 7 जमा कराने की कोशिश का मामला सामने आया है। एक बूथ लेवल ऑफिसर यानी BLO ने बड़ी संख्या में लाए गए Form 7 स्वीकार करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने शनिवार को इस मामले को उठाया और आरोप लगाया कि ये फॉर्म कथित तौर पर एक BJP बूथ-लेवल एजेंट द्वारा बड़ी संख्या में जमा कराने की कोशिश की गई थी। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है। मामले पर तेलंगाना के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने कहा है कि अगर किसी को निशाना बनाने के लिए बड़ी संख्या में Form 7 दाखिल किए जा रहे हैं तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।

BLO ने क्यों रोके Form 7?

मामला हैदराबाद के गौशामहल विधानसभा क्षेत्र के बूथ संख्या 173 का बताया गया है। यहां तैनात BLO के सामने सितंबर के आखिरी दिनों में बड़ी संख्या में Form 7 पेश किए गए। Form 7 का इस्तेमाल मतदाता सूची से किसी नाम को हटाने के लिए आपत्ति या दावा दर्ज करने के लिए किया जाता है। BLO ने इन फॉर्मों को स्वीकार करने से इनकार करते हुए कहा कि इन्हें इस तरीके से स्वीकार करना संभव नहीं है।

The Indian Express से बातचीत में BLO ने बताया कि इन फॉर्मों पर EPIC नंबर पहले से प्रिंट थे, लेकिन नाम दर्ज नहीं थे। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अपने वरिष्ठ अधिकारियों से ऐसे फॉर्म प्राप्त करने का कोई निर्देश नहीं मिला था। इसी आधार पर उन्होंने फॉर्म लेने से मना कर दिया। BLO का कहना था कि उन्होंने जो किया, वह सिर्फ अपनी ड्यूटी के तहत किया।

वायरल वीडियो ने बढ़ाई राजनीतिक गर्मी

BLO द्वारा Form 7 स्वीकार करने से इनकार करने का वीडियो सामने आने के बाद मामला राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया। तेलंगाना कांग्रेस ने वीडियो को साझा करते हुए इसे SIR प्रक्रिया से जोड़कर सवाल उठाए। विपक्ष की ओर से यह चिंता जताई जा रही है कि अगर बड़ी संख्या में ऐसे फॉर्म जमा किए जाते हैं जिनमें मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की गई हो, तो इसका असर मतदाता सूची की शुद्धता और वास्तविक मतदाताओं के अधिकार पर पड़ सकता है।

हालांकि, यहां यह फर्क समझना जरूरी है कि Form 7 दाखिल होना अपने आप में किसी मतदाता का नाम हट जाना नहीं है। किसी नाम को मतदाता सूची से हटाने की प्रक्रिया में निर्वाचन अधिकारियों द्वारा निर्धारित जांच और प्रक्रिया का पालन किया जाना होता है। इसलिए bulk submission का मामला गंभीर जरूर है, लेकिन केवल फॉर्म जमा किए जाने के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम वास्तव में हटा दिए गए।

1 अक्टूबर को पहली शिकायत सामने आई

रिपोर्ट के मुताबिक हैदराबाद में बड़ी संख्या में Form 7 जमा कराने का पहला मामला 1 अक्टूबर 2026 को मुशीराबाद विधानसभा क्षेत्र में सामने आया था। इसके बाद गौशामहल के बूथ 173 का मामला सामने आया। इससे SIR के दौरान Form 7 के इस्तेमाल और उसकी निगरानी को लेकर सवाल और गंभीर हो गए हैं।

मतदाता सूची में नाम जोड़ना, हटाना या संशोधित करना बेहद संवेदनशील प्रक्रिया है। एक तरफ फर्जी या अपात्र नामों को हटाना जरूरी है, तो दूसरी तरफ किसी वास्तविक मतदाता का नाम गलत तरीके से हटने से रोकना भी चुनाव प्रक्रिया की बुनियादी जिम्मेदारी है। इसलिए किसी भी बड़े पैमाने पर Form 7 दाखिल होने की स्थिति में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आवेदन किसने किए, किन मतदाताओं के नामों पर आपत्ति की गई और उनके पीछे दिए गए कारण क्या हैं।

चुनाव आयोग ने भी दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी

विवाद बढ़ने के बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने कहा कि यदि किसी को निशाना बनाने के उद्देश्य से bulk Form 7 दाखिल किए जा रहे हैं, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि SIR की पूरी प्रक्रिया मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाने के उद्देश्य से की जा रही है, न कि किसी राजनीतिक दल या समूह के समर्थकों को प्रभावित करने के लिए।

चुनावी प्रक्रिया में Form 7 एक वैधानिक माध्यम है। लेकिन सवाल तब पैदा होता है जब बड़ी संख्या में फॉर्म एक साथ सामने आते हैं और उनकी प्रकृति संदिग्ध दिखाई देती है। ऐसे मामलों में प्रत्येक आवेदन की जांच और संबंधित मतदाता को उचित प्रक्रिया के तहत सुनवाई का अवसर देना महत्वपूर्ण होगा।

BLO का जवाब—“मैंने सिर्फ अपना काम किया”

पूरे विवाद के बीच जिस BLO का वीडियो वायरल हुआ, उसने मामले को राजनीतिक रंग देने से दूरी बनाए रखी। उनका कहना है कि उन्होंने सिर्फ वही किया जो उन्हें नियम और उपलब्ध निर्देशों के आधार पर सही लगा। उनके मुताबिक, पहले से प्रिंट किए गए EPIC नंबर वाले और बिना नाम के फॉर्म उन्हें दिए गए थे तथा ऐसे फॉर्म लेने का कोई निर्देश उन्हें नहीं मिला था।

यही इस मामले का सबसे अहम पहलू भी है। चुनाव प्रक्रिया में सबसे निचले स्तर पर काम करने वाला BLO ही मतदाता सूची और वास्तविक मतदाता के बीच महत्वपूर्ण कड़ी होता है। अगर बूथ स्तर पर किसी आवेदन को लेकर सवाल उठता है, तो उसका रिकॉर्ड, सत्यापन और प्रक्रिया के अनुसार निपटारा होना जरूरी है।

असली सवाल—किसके नाम, क्यों और कितने?

अब इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि bulk Form 7 में किन मतदाताओं के नाम थे, कितने फॉर्म जमा कराने की कोशिश हुई, किस आधार पर नाम हटाने की मांग की गई और प्रत्येक आवेदन की जांच किस तरह होगी?

SIR के दौरान मतदाता सूची को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में राजनीतिक और कानूनी बहस पहले से जारी है। ऐसे में हैदराबाद का यह मामला चुनाव आयोग के लिए भी एक परीक्षा है। मतदाता सूची साफ-सुथरी होनी चाहिए, लेकिन उससे भी जरूरी है कि एक भी वास्तविक मतदाता का अधिकार प्रक्रिया की खामी या किसी संगठित प्रयास की वजह से प्रभावित न हो।

इस मामले में BLO का “मैं तो अपना काम कर रहा था” वाला जवाब फिलहाल सबसे ज्यादा चर्चा में है। लेकिन असली जवाब जांच से मिलेगा—Form 7 कितने थे, किसके थे और उन्हें किस उद्देश्य से जमा कराया जा रहा था।

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