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चीन के करीब स्पेन, EU में बढ़ी बेचैनी : सांचेज़ की बीजिंग नीति से यूरोप में रणनीतिक बहस

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | मैड्रिड/बीजिंग | 3 अक्टूबर 2026

स्पेन और चीन के बढ़ते रिश्ते सिर्फ व्यापार की कहानी नहीं, बल्कि बदलती यूरोपीय रणनीति, अमेरिका के साथ रिश्तों और EU की साझा सुरक्षा नीति से जुड़ा बड़ा सवाल बनते जा रहे हैं।

मैड्रिड से बीजिंग तक बदलती तस्वीर

मैड्रिड। यूरोप की राजनीति में चीन को लेकर लंबे समय से चल रही बहस अब एक नए मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। इस बदलाव के केंद्र में स्पेन है, जहां प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ की सरकार बीजिंग के साथ आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों को लगातार विस्तार दे रही है। पिछले चार वर्षों में सांचेज़ की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ चार मुलाकातें हो चुकी हैं और अप्रैल 2026 की उनकी चीन यात्रा ने इस रिश्ते को फिर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया। Reuters के अनुसार, सांचेज़ की यह चार वर्षों में चौथी चीन यात्रा थी और दोनों पक्षों ने व्यापार तथा रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।

यह नजदीकी ऐसे समय में बढ़ रही है जब यूरोप खुद एक जटिल रणनीतिक दौर से गुजर रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोपीय सुरक्षा चिंताएं बढ़ी हैं, अमेरिका की विदेश और रक्षा नीति को लेकर यूरोप में बहस जारी है और चीन के साथ व्यापारिक रिश्तों में एक तरफ विशाल आर्थिक अवसर हैं तो दूसरी तरफ औद्योगिक प्रतिस्पर्धा और रणनीतिक निर्भरता की चिंता भी है। ऐसे माहौल में स्पेन का बीजिंग के साथ संवाद बढ़ाना केवल दो देशों के बीच सामान्य कूटनीतिक गतिविधि नहीं माना जा रहा। यूरोप के भीतर यह सवाल भी उठ रहा है कि आने वाले वर्षों में EU चीन के साथ संबंधों को किस तरह संतुलित करेगा और क्या अलग-अलग सदस्य देश अपनी राष्ट्रीय जरूरतों के हिसाब से अलग-अलग रणनीतिक रास्ते अपनाएंगे।

सांचेज़ की ‘बीजिंग नीति’ आखिर है क्या?

स्पेन की चीन नीति को समझने के लिए इसे केवल अमेरिका से दूरी के चश्मे से देखना तस्वीर को अधूरा कर देगा। सांचेज़ ने सार्वजनिक रूप से बहुपक्षीय व्यवस्था और यूरोप की रणनीतिक भूमिका पर जोर दिया है। अप्रैल 2026 में चीन यात्रा के दौरान उन्होंने चीन से वैश्विक बहुपक्षीय व्यवस्था में बड़ी भूमिका निभाने की अपील की और कहा कि यूरोप को भी बदलती अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में अपनी भूमिका मजबूत करनी चाहिए। साथ ही मैड्रिड की कोशिश चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे को कम करने और स्पेनिश कृषि तथा औद्योगिक उत्पादों के लिए चीनी बाजार में अधिक पहुंच हासिल करने की भी रही है। Reuters के मुताबिक 2025 में स्पेन का चीन के साथ व्यापार घाटा लगभग 50 अरब डॉलर तक पहुंच गया था।

यानी मैड्रिड के सामने एक साथ दो लक्ष्य हैं—चीन से आर्थिक संबंध बढ़ाना और उसी चीन के साथ मौजूद व्यापार असंतुलन को कम करना। यही वजह है कि स्पेन की नीति में एक तरफ चीनी निवेश का स्वागत दिखाई देता है तो दूसरी तरफ यूरोपीय स्तर पर चीन से होने वाली अनुचित प्रतिस्पर्धा के खिलाफ व्यापारिक सुरक्षा उपायों की जरूरत पर भी चर्चा जारी है। दिलचस्प बात यह है कि सितंबर 2026 के अंत में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की स्पेन यात्रा के दौरान मैक्रों और सांचेज़ ने खुद चीन के संदर्भ में यूरोपीय व्यापार सुरक्षा को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। यानी स्पेन का बीजिंग से नजदीकी संवाद और EU के व्यापारिक हितों की रक्षा—दोनों बातें एक साथ चल रही हैं।

चीन के निवेश से स्पेन को क्या मिल रहा है?

स्पेन-चीन रिश्ते की सबसे दिलचस्प परत आर्थिक है। चीन की कंपनियां यूरोप के इस दक्षिणी देश में केवल सामान बेचने के लिए नहीं आ रही हैं, बल्कि उत्पादन, बैटरी, ऊर्जा और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों में स्थानीय औद्योगिक ढांचा खड़ा करने की दिशा में भी आगे बढ़ रही हैं। चीनी वाहन कंपनी Chery की स्पेन में औद्योगिक मौजूदगी और बैटरी तथा ऊर्जा क्षेत्र में चीनी कंपनियों की परियोजनाएं इस बदलाव का उदाहरण हैं। अप्रैल 2026 की Reuters रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में स्पेन में चीनी निवेश बढ़कर करीब 643 मिलियन यूरो हो गया था, जिसमें ऊर्जा और एक्सट्रैक्टिव सेक्टर प्रमुख रहे।

स्पेन के लिए यह निवेश रोजगार, उत्पादन और औद्योगिक पुनर्जीवन के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है। लेकिन यूरोप के कुछ हिस्सों में इसकी दूसरी तस्वीर भी देखी जा रही है। सवाल यह है कि अगर चीनी कंपनियां यूरोपीय संघ के भीतर ही कार, बैटरी और दूसरे उत्पाद बनाती हैं, तो क्या इससे चीन से आयात पर लगाए गए EU शुल्क और व्यापारिक सुरक्षा उपायों का प्रभाव कम हो सकता है? यही वजह है कि चीनी निवेश का स्वागत करने और यूरोपीय औद्योगिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के बीच संतुलन का सवाल लगातार बड़ा होता जा रहा है।

Huawei विवाद ने आर्थिक रिश्ते को सुरक्षा से जोड़ दिया

स्पेन और चीन की कहानी केवल फैक्ट्री, कार और निवेश तक सीमित नहीं है। इसका एक संवेदनशील हिस्सा तकनीक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है। 2025 में स्पेन के गृह मंत्रालय द्वारा Huawei की स्पेनिश इकाई को 12.3 मिलियन यूरो का अनुबंध दिए जाने का मामला स्पेनिश संसद में उठा। यह अनुबंध SITEL सिस्टम के उन सर्वरों के प्रबंधन से संबंधित था जिनका इस्तेमाल पुलिस और Guardia Civil की कानूनी इंटरसेप्शन व्यवस्था में होता है। स्पेनिश संसद के आधिकारिक रिकॉर्ड में इस अनुबंध को लेकर सरकार से सवाल दर्ज हैं और सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर संसदीय प्रक्रिया भी हुई।

इस मामले ने एक अहम सवाल खड़ा किया—क्या संवेदनशील सरकारी डेटा और महत्वपूर्ण डिजिटल ढांचे में ऐसी कंपनियों की भूमिका केवल तकनीकी और व्यावसायिक मुद्दा है या इसे राष्ट्रीय और यूरोपीय सुरक्षा के नजरिए से भी देखा जाना चाहिए? आलोचकों ने इस पर चिंता जताई, जबकि स्पेन की सरकार ने सुरक्षा जोखिम से इनकार किया। इसलिए यहां तथ्य और राजनीतिक आरोपों के बीच फर्क रखना जरूरी है: अनुबंध हुआ और उस पर संसद में सवाल उठे, लेकिन इससे अपने आप यह साबित नहीं होता कि किसी सुरक्षा उल्लंघन की घटना हुई है।

टाइमलाइन: स्पेन और चीन की कहानी कैसे आगे बढ़ी?

2022 — यूरोप का सुरक्षा समीकरण बदला

रूस के यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने के हमले के बाद यूरोप की सुरक्षा सोच में बड़ा बदलाव आया। NATO का विस्तार हुआ, यूरोपीय देशों ने रक्षा खर्च और सैन्य तैयारी पर अधिक ध्यान देना शुरू किया और अमेरिका पर यूरोप की सुरक्षा निर्भरता को लेकर भी बहस तेज हुई। इसी व्यापक बदलाव के बीच यूरोपीय देशों ने अपनी-अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं पर दोबारा विचार करना शुरू किया।

2023 — सांचेज़ की पहली चीन यात्रा

पेड्रो सांचेज़ ने मार्च 2023 में चीन की यात्रा की। इसके बाद बीजिंग और मैड्रिड के बीच उच्चस्तरीय संपर्क का सिलसिला जारी रहा। यह वह दौर था जब यूरोप चीन को लेकर जोखिम और आर्थिक अवसर दोनों को एक साथ देखने की कोशिश कर रहा था।

सितंबर 2024 — दूसरी यात्रा

सांचेज़ फिर चीन पहुंचे। व्यापार, निवेश और द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों के साथ यूरोप-चीन संबंध भी बातचीत का हिस्सा रहे। इसी अवधि में स्पेन ने चीन के साथ अपने आर्थिक रिश्तों को बनाए रखने और विस्तार देने की नीति जारी रखी।

अप्रैल 2025 — तीसरी चीन यात्रा

सांचेज़ की चीन यात्रा का सिलसिला तीसरे वर्ष भी जारी रहा। इस बीच चीन और स्पेन के आर्थिक रिश्तों में निवेश और औद्योगिक सहयोग का महत्व बढ़ता गया।

जुलाई 2025 — Huawei अनुबंध पर सवाल

स्पेनिश संसद में Huawei को दिए गए 12.3 मिलियन यूरो के SITEL सर्वर अनुबंध पर सवाल उठाए गए। मामला तकनीकी खरीद से आगे बढ़कर साइबर सुरक्षा और संवेदनशील सरकारी डेटा की सुरक्षा की बहस में पहुंच गया।

2025 — चीनी निवेश में उछाल

Reuters के अनुसार 2025 में स्पेन में चीनी निवेश लगभग 643 मिलियन यूरो तक पहुंचा। ऊर्जा और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में चीनी कंपनियों की मौजूदगी बढ़ी।

अप्रैल 2026 — चौथी चीन यात्रा

11 से 15 अप्रैल 2026 के बीच सांचेज़ ने चार वर्षों में चौथी बार चीन की यात्रा की। उन्होंने शी जिनपिंग और अन्य शीर्ष चीनी नेताओं से मुलाकात की। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया।

सितंबर 2026 — बार्सिलोना में Shanghai की सांस्कृतिक मौजूदगी

सितंबर में Barcelona के La Mercè उत्सव में Shanghai को अतिथि शहर के रूप में प्रमुखता मिली। Shanghai Conservatory of Music के कलाकारों सहित चीनी सांस्कृतिक कार्यक्रम उत्सव का हिस्सा बने। यानी स्पेन-चीन संपर्क अब केवल सरकार और कारोबार तक सीमित नहीं, बल्कि संस्कृति और शहरों के स्तर तक भी दिखाई दे रहा है।

30 सितंबर 2026 — मैक्रों-सांचेज़ मुलाकात

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की स्पेन यात्रा के दौरान दोनों नेताओं ने चीन से जुड़ी व्यापारिक चुनौतियों पर भी चर्चा की और EU की व्यापार सुरक्षा मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। यह घटनाक्रम खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे स्पष्ट होता है कि स्पेन और फ्रांस चीन के मुद्दे पर पूरी तरह अलग-अलग खेमों में नहीं हैं; मतभेद रणनीति और प्राथमिकताओं के स्तर पर अधिक जटिल हैं।

सिर्फ स्पेन नहीं, पूरा यूरोप बदल रहा है

स्पेन की कहानी को यूरोप के व्यापक बदलाव से अलग करके देखना मुश्किल है। रूस के साथ तनाव ने पूर्वी यूरोप के देशों को अपनी सुरक्षा जरूरतों पर नए सिरे से विचार करने के लिए मजबूर किया है। फिनलैंड ने NATO में प्रवेश किया और अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत किया। ग्रीस ने भी अपनी सुरक्षा जरूरतों के मद्देनजर इजरायल के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाया है। यानी यूरोप में एक साथ दो प्रक्रियाएं चल रही हैं—एक तरफ EU और NATO के भीतर सामूहिक रणनीति बनाने की कोशिश और दूसरी तरफ अलग-अलग देशों द्वारा अपनी राष्ट्रीय जरूरतों के हिसाब से अलग-अलग साझेदारों के साथ संबंध मजबूत करना।

यही वह बिंदु है जहां स्पेन-चीन संबंध यूरोप की बड़ी कहानी बन जाते हैं। अगर कोई देश आर्थिक विकास के लिए चीन के साथ रिश्ते मजबूत करता है, दूसरा सुरक्षा जरूरतों के लिए इजरायल पर निर्भर होता है और तीसरा अपनी ऊर्जा या रक्षा नीति में अलग दिशा चुनता है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि इन राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को यूरोप की साझा विदेश और सुरक्षा नीति के साथ कैसे जोड़ा जाएगा।

अमेरिका से दूरी या रणनीतिक विविधता?

स्पेन के मामले में सबसे ज्यादा चर्चा इसी सवाल की है। क्या सांचेज़ चीन के करीब जाकर अमेरिका से दूरी बना रहे हैं या फिर स्पेन अपने लिए अधिक स्वतंत्र रणनीतिक विकल्प तैयार कर रहा है? उपलब्ध घटनाक्रम दोनों पहलुओं की ओर इशारा कर सकते हैं, लेकिन इसे किसी एक निष्कर्ष में समेटना आसान नहीं है। सांचेज़ ने चीन के साथ संबंध बढ़ाने के साथ-साथ यूरोपीय व्यापार सुरक्षा को मजबूत करने की जरूरत पर भी बात की है। दूसरी ओर अमेरिका के साथ रक्षा और सैन्य नीति को लेकर मैड्रिड के मतभेद भी सामने आए हैं। Reuters ने अप्रैल 2026 की रिपोर्ट में सांचेज़ की चीन नीति को अमेरिका से रणनीतिक स्वतंत्रता के संदर्भ में भी रखा था।

इसलिए तस्वीर शायद ‘चीन बनाम अमेरिका’ की सीधी लड़ाई से ज्यादा जटिल है। स्पेन सहित कई यूरोपीय देश ऐसी दुनिया में अपने विकल्प बढ़ाना चाहते हैं जहां आर्थिक शक्ति, सुरक्षा, तकनीक और व्यापार पहले की तुलना में कहीं ज्यादा आपस में जुड़े हुए हैं।

सवाल EU की एकजुटता का

स्पेन-चीन संबंधों की असली परीक्षा शायद यही होगी कि मैड्रिड अपनी आर्थिक और कूटनीतिक प्राथमिकताओं को EU की सामूहिक रणनीति के साथ किस तरह संतुलित करता है। एक ओर चीन स्पेन के लिए निवेश, उद्योग और बाजार का बड़ा अवसर है। दूसरी ओर यूरोपीय संघ चीन को लेकर व्यापार, तकनीक, आपूर्ति श्रृंखला और सुरक्षा के सवालों पर अधिक सतर्क रुख अपनाता रहा है।

लेकिन कहानी का दूसरा पहलू भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यूरोप के सामने अमेरिका, चीन और रूस—तीनों से जुड़े अलग-अलग प्रकार के रणनीतिक सवाल हैं। ऐसे में सदस्य देशों का अपनी-अपनी जरूरत के मुताबिक विकल्प तलाशना पूरी तरह नया घटनाक्रम नहीं है। चुनौती यह है कि राष्ट्रीय हितों की इस विविधता के बीच यूरोप अपनी सामूहिक आवाज कितनी मजबूत रख पाता है।

यही वजह है कि स्पेन और चीन की बढ़ती नजदीकी को सिर्फ मैड्रिड और बीजिंग की दोस्ती की कहानी समझना पर्याप्त नहीं होगा। इसके पीछे यूरोप की बदलती अर्थव्यवस्था, अमेरिका के साथ बदलते समीकरण, चीन की बढ़ती वैश्विक भूमिका और EU की भविष्य की रणनीतिक दिशा—चारों कहानियां एक साथ चल रही हैं। आने वाले वर्षों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि स्पेन चीन के साथ अपने रिश्तों को कितना आगे ले जाता है और यूरोपीय संघ इस बढ़ती विविधता के बीच अपनी साझा रणनीति को किस तरह आकार देता है।

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