व्यापार/ अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन | 2 अक्टूबर 2026
अमेरिका में डीजल की रिकॉर्ड ऊंची कीमतों के बीच G7 देशों ने वैश्विक बाजार में 10 करोड़ बैरल तेल जारी करने पर सहमति जताई है। इस आपात कदम की शुरुआत बड़ी मात्रा में डीजल जारी करने के साथ होगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को इसकी घोषणा करते हुए कहा कि यूरोप अपने बड़े डीजल भंडार से ईंधन जारी करने की प्रक्रिया तत्काल शुरू करेगा।
रिकॉर्ड कीमतों के बीच बड़ा फैसला
अमेरिका में डीजल की कीमतों में हाल के दिनों में तेज बढ़ोतरी हुई है। AAA के अनुसार, शुक्रवार को अमेरिका में डीजल की राष्ट्रीय औसत कीमत 6.37 डॉलर प्रति गैलन रही। इससे पहले 22 सितंबर को कीमत 6.52 डॉलर प्रति गैलन के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थी।
ईंधन की बढ़ती कीमतों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था और आम उपभोक्ताओं पर दबाव बढ़ाया है। ऐसे समय में G7 का तेल भंडार बाजार में उतारने का फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
तुरंत शुरू होगी डीजल की सप्लाई
राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर घोषणा करते हुए कहा कि यूरोप अपने बड़े डीजल भंडार से भारी मात्रा में ईंधन जारी करने पर सहमत हो गया है और प्रक्रिया तत्काल शुरू होगी।
G7 की योजना में कुल 100 मिलियन बैरल तेल बाजार में जारी करने की बात कही गई है। इसमें शुरुआती चरण में डीजल की पर्याप्त मात्रा जारी करने पर जोर रहेगा।
इस कदम का उद्देश्य बाजार में ईंधन की उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों पर दबाव कम करना है।
अमेरिका में चुनाव से पहले महंगा ईंधन चुनौती
तेल और डीजल की बढ़ती कीमतें ऐसे समय में सामने आई हैं जब अमेरिका में नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनाव नजदीक हैं। महंगाई और ईंधन की कीमतें अमेरिकी मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक मुद्दे बने हुए हैं।
ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी के सामने बढ़ती कीमतों को लेकर राजनीतिक दबाव भी है। ऐसे में डीजल भंडार जारी करने का फैसला आर्थिक कदम के साथ-साथ अमेरिकी घरेलू राजनीति के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है।
G7 देशों की सामूहिक कार्रवाई
G7 दुनिया की प्रमुख औद्योगिक अर्थव्यवस्थाओं का समूह है। ऊर्जा बाजार में अचानक पैदा हुए दबाव के समय सदस्य देश रणनीतिक भंडार और आपूर्ति व्यवस्था के माध्यम से बाजार को स्थिर करने के उपाय कर सकते हैं।
इस बार फैसला खास तौर पर डीजल की उपलब्धता और कीमतों को लेकर बढ़ती चिंता के बीच आया है। बड़ी मात्रा में तेल बाजार में आने से आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद है, हालांकि वास्तविक कीमतों पर असर बाजार की मांग, वैश्विक आपूर्ति और भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर भी निर्भर करेगा।
दुनिया के लिए भी अहम संकेत
अमेरिका दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा बाजारों में से एक है। वहां डीजल की कीमतों में तेज वृद्धि का असर परिवहन, कृषि, उद्योग और माल ढुलाई की लागत पर पड़ सकता है।
डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का प्रभाव केवल निजी वाहनों तक सीमित नहीं रहता। ट्रक, कृषि मशीनरी, निर्माण क्षेत्र और विभिन्न औद्योगिक गतिविधियों में डीजल की बड़ी भूमिका होने के कारण ईंधन की कीमतें व्यापक आर्थिक लागत को प्रभावित कर सकती हैं।
अब नजर बाजार पर
G7 के फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यह होगा कि 10 करोड़ बैरल तेल की अतिरिक्त आपूर्ति बाजार में किस गति से पहुंचती है और इससे डीजल की कीमतों पर कितना असर पड़ता है।
फिलहाल इतना साफ है कि रिकॉर्ड ऊंची कीमतों के बीच अमेरिका और उसके G7 सहयोगियों ने ऊर्जा बाजार में आपूर्ति बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया है। आने वाले दिनों में बाजार की प्रतिक्रिया इस कदम के वास्तविक प्रभाव को तय करेगी।



