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राहुल की युवाओं से अपील—सड़कों पर उतरिए, दबाव में ही जागती है सरकार

राजनीति/ महिला/ युवा | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 29 सितंबर 2026

कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने महिलाओं की सुरक्षा के सवाल पर सरकार के खिलाफ तीखा हमला बोला है। उन्होंने देश में महिलाओं के साथ होने वाली छेड़छाड़ और दुष्कर्म की घटनाओं का जिक्र करते हुए युवाओं से विरोध प्रदर्शन करने की अपील की। मंगलवार को जारी अपने वीडियो संदेश और सोशल मीडिया पोस्ट में राहुल गांधी ने कहा कि महिलाओं को उन अपराधों की सजा नहीं दी जानी चाहिए, जो उनके खिलाफ किए जाते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर महिलाएं सड़कों पर निकलने से डर रही हैं, उनके साथ छेड़छाड़ और दुष्कर्म का भय बना हुआ है, तो समाधान महिलाओं को घरों में बंद करना नहीं हो सकता। राहुल गांधी ने कहा कि जरूरत ऐसी व्यवस्था बनाने की है, जिसमें महिलाएं बिना डर के सड़कों पर चल सकें और अपराध करने वालों के खिलाफ तेजी से कार्रवाई हो।

राहुल गांधी ने अपने संदेश में सरकार पर सीधे निशाना साधते हुए कहा कि महिलाओं को सुरक्षा देने के बजाय उन्हें घर में रहने की सलाह देना समस्या का समाधान नहीं है। उन्होंने कहा कि सड़कों को सुरक्षित बनाना होगा, महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार करने वाली मानसिकता का सामना करना होगा और हमला करने वालों को तेजी से तथा बिना किसी अपवाद के सजा दिलानी होगी। राहुल गांधी ने इस पूरी व्यवस्था को पितृसत्तात्मक सोच से जोड़ते हुए कहा कि ऐसी व्यवस्था को बदलने का समय आ गया है, जो पीड़ित को ही दोषी ठहराती है और अपराधी को बचाती है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में इस व्यवस्था को खत्म करने की अपील की और कहा कि महिलाओं को उनके साथ हुए अपराध के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

राहुल गांधी का बयान केवल महिलाओं की सुरक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने युवाओं से सीधे राजनीतिक और सामाजिक हस्तक्षेप की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार दबाव पड़ने पर ही प्रतिक्रिया देती है और इसलिए युवाओं को इस मुद्दे पर आवाज उठानी चाहिए। उनका संदेश साफ था कि महिलाओं की सुरक्षा के सवाल पर चुप्पी समाधान नहीं है। उन्होंने युवाओं से विरोध करने की अपील करते हुए कहा कि सार्वजनिक स्थानों को सुरक्षित बनाना और महिलाओं को भयमुक्त वातावरण देना सरकार तथा समाज दोनों की जिम्मेदारी है। राहुल गांधी के अनुसार, किसी महिला की सुरक्षा सुनिश्चित करने के नाम पर उसकी आवाजाही सीमित करना या उसे घर में रहने की सलाह देना अपराध के मूल कारण को संबोधित नहीं करता।

उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि अपराध का बोझ पीड़ित महिला पर डालने की बजाय अपराधी पर कार्रवाई होनी चाहिए। राहुल गांधी ने कहा कि महिलाओं को यह महसूस नहीं होना चाहिए कि रात में बाहर निकलना, अकेले यात्रा करना या सार्वजनिक स्थानों पर जाना उनके लिए जोखिम भरा है। उन्होंने कहा कि सुरक्षित सड़कें, प्रभावी पुलिस कार्रवाई और अपराधियों के खिलाफ त्वरित न्याय ही महिलाओं को वास्तविक सुरक्षा दे सकता है। उनके बयान का जोर इस बात पर रहा कि महिलाओं की स्वतंत्रता को सीमित करके अपराध कम नहीं किए जा सकते। इसके बजाय उन लोगों पर कार्रवाई की जरूरत है जो महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार और हिंसा करते हैं।

यह बयान ऐसे समय आया है जब महिलाओं के खिलाफ अपराध और सार्वजनिक स्थानों पर उनकी सुरक्षा को लेकर देश में लगातार बहस होती रही है। दुष्कर्म और छेड़छाड़ के मामलों में जांच, पुलिस कार्रवाई और न्याय में देरी को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सरकारों से बेहतर कानून-व्यवस्था, तेज जांच और प्रभावी न्यायिक प्रक्रिया की मांग की जाती रही है। इसी व्यापक बहस के बीच राहुल गांधी ने सरकार से जवाबदेही की मांग करते हुए युवाओं को इस मुद्दे पर सक्रिय होने का आह्वान किया है। उनके बयान ने महिला सुरक्षा के मुद्दे को एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।

राहुल गांधी ने अपने संदेश में “पीड़ित को दोषी और अपराधी को बचाने वाली व्यवस्था” को बदलने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपराधों के लिए जिम्मेदार ठहराने वाली मानसिकता से लड़ना होगा। उनके अनुसार, महिलाओं के कपड़े, उनके बाहर निकलने का समय, उनका किसी स्थान पर जाना या उनकी स्वतंत्र आवाजाही किसी अपराध का औचित्य नहीं हो सकता। अपराध की जिम्मेदारी अपराध करने वाले व्यक्ति की ही होनी चाहिए। इसी के साथ उन्होंने युवाओं से कहा कि वे महिलाओं की सुरक्षा के सवाल पर आवाज उठाएं और सरकार पर कार्रवाई के लिए दबाव बनाएं।

राहुल गांधी के बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया है। सत्तापक्ष से जुड़े नेताओं ने उनके बयान की आलोचना की है, जबकि कांग्रेस की ओर से महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सरकार पर दबाव बनाए रखने की बात कही जा रही है। ऐसे में महिला सुरक्षा का मुद्दा आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का एक प्रमुख विषय बन सकता है। हालांकि, अलग-अलग अपराधों के तथ्य और कानूनी परिस्थितियां अलग होती हैं और किसी राजनीतिक बयान को किसी विशेष मामले में अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।

राहुल गांधी के संदेश का केंद्रीय सवाल यही है कि महिलाओं को सुरक्षित रखने का रास्ता उनकी आजादी सीमित करना है या सार्वजनिक जीवन को सुरक्षित बनाना। उन्होंने स्पष्ट रूप से दूसरा रास्ता अपनाने की बात कही और युवाओं से इसके लिए आवाज उठाने का आह्वान किया। उनका आरोप है कि सरकार दबाव में ही प्रतिक्रिया देती है। अब देखना होगा कि इस अपील के बाद सरकार महिलाओं की सुरक्षा को लेकर क्या जवाब देती है और विपक्ष इस मुद्दे को आगे किस तरह उठाता है।

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