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LPU हिंसा में दुकानदारों का लाखों का नुकसान, टूटी दुकानों और खाली अलमारियों के बीच सवाल—भरपाई कौन करेगा?

पंजाब | ABC NATIONAL NEWS | फगवाड़ा | 28 सितंबर 2026

पंजाब के फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी यानी LPU में छात्र विरोध के दौरान हुई हिंसा का असर अब विश्वविद्यालय परिसर के कारोबारियों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। कैंपस के यूनी मॉल में दुकान चलाने वाले कारोबारी रविवार की हिंसा के बाद टूटा हुआ कांच, क्षतिग्रस्त सामान और खाली अलमारियां देखकर अपने नुकसान का आकलन कर रहे हैं। दुकानदारों का कहना है कि उनका छात्रों के विरोध या विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ उठाई जा रही मांगों से कोई संबंध नहीं था, फिर भी हिंसा की चपेट में उनकी दुकानों को आना पड़ा। अब उनके सामने सबसे बड़ा सवाल है—इन नुकसानों की भरपाई कौन करेगा?

घटना के बाद कई दुकानों में तोड़फोड़ और सामान के गायब होने की शिकायतें सामने आई हैं। दुकानदारों के मुताबिक इलेक्ट्रॉनिक्स, जूते-चप्पल और दूसरे सामान की कीमत लाखों रुपये में है। कुछ दुकानों के शीशे टूटे हैं, सामान बिखरा पड़ा है और कई जगह अलमारियां खाली दिखाई दे रही हैं। कारोबारियों का कहना है कि दुकान का नुकसान केवल टूटे हुए सामान तक सीमित नहीं है, बल्कि कई दिनों तक कारोबार प्रभावित रहने से भी उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऐसे में वे प्रशासन से सुरक्षा के साथ-साथ नुकसान का उचित आकलन और जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहे हैं।

LPU परिसर में यह तनाव छात्राओं से जुड़े एक कथित यौन उत्पीड़न मामले को लेकर शुरू हुए विरोध के बाद बढ़ा। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, परिसर में किसी बाहरी व्यक्ति द्वारा छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न किए जाने की अपुष्ट खबरों के बाद छात्रों में आक्रोश फैल गया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें निराधार और मनगढ़ंत बताया है। इसलिए मामले में वास्तविक घटनाक्रम और आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। इसी बीच विरोध प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया और परिसर में तोड़फोड़ तथा आगजनी की घटनाएं सामने आईं।

रविवार तड़के करीब 2 बजे से 4 बजे के बीच हालात सबसे ज्यादा बिगड़े बताए जा रहे हैं। इसी दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों के जालंधर-फगवाड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग की ओर बढ़ने से पहले कैंपस के भीतर कई दुकानों में घुसने और सामान ले जाने की शिकायतें सामने आईं। दुकानदारों का कहना है कि उनकी दुकानें छात्रों और प्रशासन के बीच चल रहे विवाद का हिस्सा नहीं थीं। इसके बावजूद हिंसा के दौरान उनके प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया। कारोबारियों के लिए यह स्थिति इसलिए भी गंभीर है क्योंकि उनका रोजमर्रा का रोजगार सीधे इन दुकानों पर निर्भर करता है।

हिंसा के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने तोड़फोड़ और आगजनी के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। प्रशासन के सामने अब दो स्तरों पर चुनौती है—एक तरफ छात्र विरोध से जुड़े मूल आरोपों की निष्पक्ष जांच करना और दूसरी तरफ हिंसा, आगजनी, तोड़फोड़ तथा कथित चोरी की घटनाओं में जिम्मेदारी तय करना। दुकानदारों का कहना है कि कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने का खामियाजा उन लोगों को नहीं भुगतना चाहिए जिनका छात्रों के आंदोलन से कोई लेना-देना नहीं था।

इस पूरे घटनाक्रम में एक अहम सवाल संपत्ति के नुकसान की भरपाई को लेकर भी है। अगर जांच में यह साबित होता है कि दुकानों में तोड़फोड़ या सामान की चोरी हुई, तो नुकसान की जिम्मेदारी तय करने के लिए पुलिस जांच और उपलब्ध CCTV फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों तथा अन्य सबूत महत्वपूर्ण होंगे। दुकानदारों के लिए फिलहाल प्राथमिकता अपने नुकसान का सही आकलन कराना और कारोबार को फिर से शुरू करना है।

LPU परिसर में हुई हिंसा ने छात्रों की सुरक्षा, विश्वविद्यालय प्रशासन की जवाबदेही और कानून-व्यवस्था के साथ-साथ उन छोटे कारोबारियों की मुश्किल भी सामने ला दी है जो विश्वविद्यालय परिसर में अपना रोजगार चलाते हैं। छात्रों के आरोपों और प्रशासन के जवाब के बीच जांच का निष्पक्ष निष्कर्ष सामने आना जरूरी है, लेकिन उसके साथ यह भी तय होना चाहिए कि हिंसा के दौरान निजी संपत्ति को हुए नुकसान के लिए कौन जिम्मेदार है और प्रभावित दुकानदारों को किस प्रक्रिया के तहत राहत मिलेगी। फिलहाल टूटे शीशों और खाली दुकानों के बीच कारोबारियों का सवाल सीधा है—“हमारे नुकसान की भरपाई कौन करेगा?”

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