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UN में ईरान का जोरदार संदेश: “हम आतंकवाद के शिकार हुए”, खामेनेई और मारे गए बच्चों की तस्वीरें दिखाईं

अंतरराष्ट्रीय/ कूटनीति | ABC NATIONAL NEWS | संयुक्त राष्ट्र | 24 सितंबर 2026

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में युद्ध के बीच दिए अपने बेहद अहम भाषण में अमेरिका पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि ईरानी जनता अमेरिका की ओर से आतंकवाद की शिकार हुई है। भाषण के दौरान पेज़ेश्कियान ने दिवंगत सर्वोच्च नेता अली खामेनेई और युद्ध के शुरुआती दिनों में मारे गए 150 से ज्यादा स्कूली बच्चों की तस्वीरें हाथ में उठाईं। उनके भाषण की शुरुआत के समय अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल सभागार से बाहर चला गया। यह भाषण ऐसे समय हुआ जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक दिन पहले ईरान को “पूरी तरह खत्म” करने की चेतावनी दी थी।

पेज़ेश्कियान का यह भाषण सामान्य राजनयिक भाषणों से अलग था, क्योंकि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के बीच वह पहली बार युद्धकालीन परिस्थितियों में संयुक्त राष्ट्र के मंच से दुनिया को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने अपने देश के खिलाफ सैन्य कार्रवाई और उसके मानवीय असर को सामने रखने की कोशिश की। उनके हाथ में मौजूद तस्वीरों में अली खामेनेई की तस्वीर के साथ उन बच्चों की तस्वीरें भी थीं, जिनके बारे में ईरान का कहना है कि वे युद्ध के शुरुआती दिनों में मारे गए।

ईरानी राष्ट्रपति ने अपने भाषण में अमेरिका को ईरान के खिलाफ हुई कार्रवाई के लिए जिम्मेदार ठहराया और कहा कि ईरानी लोग आतंकवाद का शिकार हुए हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ा हुआ है और अमेरिका की ओर से ईरान के खिलाफ कड़े बयान सामने आ रहे हैं। ट्रंप ने मंगलवार को ईरान को लेकर बेहद कड़ी चेतावनी दी थी और कहा था कि अगर परिस्थितियां नहीं बदलीं तो अमेरिका ईरान को भारी नुकसान पहुंचा सकता है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा के सभागार में पेज़ेश्कियान के भाषण के दौरान अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के बाहर जाने को भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा गया। जैसे ही ईरानी राष्ट्रपति ने अपना भाषण शुरू किया, अमेरिकी प्रतिनिधि बाहर चले गए। इससे दोनों देशों के बीच जारी तनाव संयुक्त राष्ट्र के सबसे बड़े राजनयिक मंच पर भी साफ दिखाई दिया।

पेज़ेश्कियान ने अपने भाषण में ईरान की स्थिति को एक ऐसे देश के रूप में पेश किया जो बाहरी सैन्य दबाव का सामना कर रहा है। तस्वीरों का इस्तेमाल उनके संदेश का सबसे भावनात्मक हिस्सा रहा। एक तरफ उन्होंने अली खामेनेई की तस्वीर दिखाई, जबकि दूसरी तरफ युद्ध में मारे गए स्कूली बच्चों की तस्वीरें सामने रखीं। इसके जरिए उन्होंने ईरान पर हुए हमलों के राजनीतिक और मानवीय असर को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने रखने की कोशिश की।

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी पड़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के मौजूदा सत्र में भी पश्चिम एशिया और युद्ध से जुड़े मुद्दे प्रमुख चर्चा में हैं। ऐसे माहौल में ईरानी राष्ट्रपति का भाषण दुनिया का ध्यान खींचने वाला घटनाक्रम बन गया।

ईरान की ओर से अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई को लेकर लगातार कड़े बयान दिए जा रहे हैं। दूसरी तरफ अमेरिका ईरान पर अपने सुरक्षा हितों और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े गंभीर आरोप लगाता रहा है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव में परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रभाव, सैन्य गतिविधियां और प्रतिबंध जैसे मुद्दे शामिल रहे हैं। मौजूदा युद्ध ने इन पुराने विवादों को और ज्यादा गंभीर बना दिया है।

इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान को लेकर दिए गए बयान ने भी तनाव बढ़ाया है। ट्रंप ने ईरान को भारी नुकसान पहुंचाने की चेतावनी दी थी। इसके बाद पेज़ेश्कियान का संयुक्त राष्ट्र में दिया गया भाषण सीधे उसी माहौल में आया। हालांकि दोनों पक्षों के दावों और आरोपों की अपनी-अपनी व्याख्या है और युद्ध की परिस्थितियों में सामने आने वाली सूचनाओं की स्वतंत्र पुष्टि कई मामलों में चुनौतीपूर्ण होती है।

पेज़ेश्कियान का संदेश साफ था कि ईरान अपने खिलाफ हुई सैन्य कार्रवाई को केवल एक रणनीतिक संघर्ष के रूप में नहीं, बल्कि अपने नागरिकों की जान से जुड़े मुद्दे के रूप में अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाना चाहता है। बच्चों की तस्वीरें दिखाकर उन्होंने संघर्ष के मानवीय पक्ष को केंद्र में रखा। दूसरी ओर अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का भाषण के दौरान बाहर जाना दोनों देशों के बीच गहरे राजनयिक मतभेद को दिखाने वाला दृश्य रहा।

अब सवाल यह है कि संयुक्त राष्ट्र के मंच से आए इस संदेश का आगे की कूटनीति पर क्या असर पड़ेगा। ईरान जहां अपने खिलाफ सैन्य कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की कोशिश कर रहा है, वहीं अमेरिका ईरान को लेकर अपनी कड़ी नीति पर कायम दिखाई दे रहा है। ऐसे में पेज़ेश्कियान का यह भाषण पश्चिम एशिया के मौजूदा संघर्ष में ईरान की राजनीतिक और मानवीय स्थिति को दुनिया के सामने रखने की एक महत्वपूर्ण कोशिश के रूप में सामने आया है।

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