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पैकेज्ड फूड पर अब एक ही चरण में लगेगा पोषण चेतावनी लेबल, FSSAI ने SC में दिया प्रस्ताव

स्वास्थ्य/ राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 24 सितंबर 2026

पैकेज्ड खाने-पीने की चीजों पर चीनी, नमक और संतृप्त वसा की मात्रा को लेकर अब उपभोक्ताओं को पैकेट के सामने ही स्पष्ट जानकारी मिल सकती है। Food Safety and Standards Authority of India यानी FSSAI ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि वह Front-of-Pack Nutrition Labelling (FoPL) को एक ही चरण में लागू करने का प्रस्ताव रखता है। इसके तहत पैकेज्ड खाद्य उत्पादों के सामने वाले हिस्से पर चीनी, नमक और संतृप्त वसा की मात्रा से जुड़ी चेतावनी या पोषण संबंधी जानकारी दिखाई जाएगी।

FSSAI ने अदालत से नियम बनाने और उन्हें अंतिम रूप देने के लिए 4 महीने का समय मांगा है। नियामक का प्रस्ताव Food Safety and Standards Act, 2006 के तहत नए नियम तैयार करने से जुड़ा है। इसका मतलब यह है कि प्रस्ताव सामने आने के बाद नियमों का मसौदा तैयार होगा, उस पर संबंधित प्रक्रिया पूरी की जाएगी और फिर अंतिम नियम जारी किए जाएंगे।

Front-of-Pack Nutrition Labelling का उद्देश्य उपभोक्ताओं को पैकेट के पीछे लिखी लंबी पोषण तालिका पढ़े बिना यह समझने में मदद करना है कि किसी खाद्य उत्पाद में चीनी, नमक और संतृप्त वसा की मात्रा कितनी है। पैकेट के सामने दी गई स्पष्ट जानकारी से खरीदारी करते समय उपभोक्ता अलग-अलग उत्पादों की तुलना आसानी से कर सकते हैं।

यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बाजार में मिलने वाले कई पैकेज्ड खाद्य उत्पादों में चीनी, नमक और वसा की मात्रा को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है। सामान्य उपभोक्ता के लिए पैकेट के पीछे मौजूद पोषण संबंधी आंकड़ों को समझना हमेशा आसान नहीं होता। ऐसे में सामने की तरफ स्पष्ट पोषण जानकारी देने का उद्देश्य खाद्य उत्पाद की वास्तविक संरचना को खरीदारी के समय ही समझने में मदद करना है।

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले FSSAI से पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर सामने की तरफ चेतावनी वाले पोषण लेबल लागू नहीं किए जाने को लेकर सवाल उठाए थे। अदालत के सामने चीनी, नमक और संतृप्त वसा की मात्रा को स्पष्ट रूप से बताने वाली व्यवस्था की जरूरत का मुद्दा आया था। इसके बाद FSSAI ने अब एक चरण में FoPL लागू करने का प्रस्ताव अदालत के सामने रखा है।

FSSAI का ताजा प्रस्ताव अभी अंतिम नियम नहीं है। नियामक ने 4 महीने का समय इसलिए मांगा है ताकि Food Safety and Standards Act के तहत नियमों का मसौदा तैयार करने और उसे अंतिम रूप देने की प्रक्रिया पूरी की जा सके। इसलिए पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर नया लेबल कब से दिखाई देगा, इसका अंतिम फैसला नियमों के औपचारिक रूप से जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

इस व्यवस्था का असर खाद्य कंपनियों पर भी पड़ेगा। अगर प्रस्तावित नियम अंतिम रूप लेते हैं, तो संबंधित पैकेज्ड खाद्य उत्पादों के पैकेट के सामने उपभोक्ता के लिए पोषण संबंधी जानकारी या चेतावनी देना जरूरी होगा। कंपनियों को अपने पैकेजिंग डिजाइन और लेबलिंग व्यवस्था में बदलाव करना पड़ सकता है। हालांकि इन बदलावों की अंतिम प्रकृति नए नियम जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

उपभोक्ताओं के लिहाज से इसका सबसे बड़ा बदलाव यह हो सकता है कि किसी खाद्य उत्पाद को खरीदने से पहले उसकी पोषण संरचना समझना आसान हो। अभी कई उत्पादों पर पोषण संबंधी जानकारी छोटे अक्षरों में या पैकेट के पीछे दी जाती है। सामने स्पष्ट लेबल होने की स्थिति में उपभोक्ता खरीदारी के समय ही यह देख सकेगा कि उत्पाद में चीनी, नमक और संतृप्त वसा का स्तर कितना है।

FSSAI का यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब देश में पैकेज्ड खाद्य पदार्थों की बढ़ती खपत और उनके पोषण संबंधी प्रभावों पर लगातार चर्चा हो रही है। हालांकि केवल लेबल लगना अपने आप में किसी खाद्य उत्पाद को अच्छा या खराब साबित नहीं करता। इसका उद्देश्य उपभोक्ता को उत्पाद की पोषण संबंधी जानकारी अधिक स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराना है, ताकि वह उपलब्ध जानकारी के आधार पर अपनी पसंद तय कर सके।

अब अगला कदम नियमों के मसौदे की प्रक्रिया है। FSSAI ने सुप्रीम कोर्ट से 4 महीने का समय मांगा है। इसके बाद यह स्पष्ट होगा कि चीनी, नमक और संतृप्त वसा के लिए किस तरह का लेबल होगा, किन उत्पादों पर लागू होगा और कंपनियों को इसे पैकेट पर किस तरीके से प्रदर्शित करना होगा। फिलहाल इतना तय है कि पैकेज्ड फूड की पैकिंग पर सामने से पोषण संबंधी जानकारी देने की दिशा में FSSAI ने सुप्रीम कोर्ट के सामने एक चरण में लागू करने का प्रस्ताव रखा है।

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