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SIR के खिलाफ प्रकाश राज का 10 दिन का दौरा शुरू, मतदाता सूची से नाम हटने पर उठाए सवाल

राजनीति/ कर्नाटक | ABC NATIONAL NEWS | कलबुर्गी | 23 सितंबर 2026

कर्नाटक में चल रही Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश राज ने 10 दिन के ‘SIR Resistance Tour’ की शुरुआत की है। उन्होंने बुधवार को कलबुर्गी के रामनगर से इस अभियान की शुरुआत की और मतदाता सूची में पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने या हटाए जाने की प्रक्रिया में होने को लेकर चिंता जताई।

प्रकाश राज ने अभियान की शुरुआत डॉ. बी.आर. आंबेडकर को श्रद्धांजलि देकर की। इसके बाद उन्होंने रामनगर की एक बस्ती में रहने वाले लोगों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने उन मतदाताओं से भी बातचीत की, जिनके नाम चुनावी रिकॉर्ड में ASDDO श्रेणी में रखे गए हैं।

ASDDO का मतलब Absentee, Shifted, Dead, Duplicate and Others है। यानी इस श्रेणी में ऐसे मतदाताओं को रखा जाता है जिनके बारे में रिकॉर्ड के आधार पर माना गया है कि वे अनुपस्थित हैं, स्थान बदल चुके हैं, उनकी मृत्यु हो चुकी है, उनका नाम दो जगह दर्ज है या वे किसी अन्य कारण से इस सूची में आए हैं। इस श्रेणी में नाम आना अपने आप में मतदाता का नाम अंतिम रूप से मतदाता सूची से हट जाना नहीं है, लेकिन इससे संबंधित मतदाता की पात्रता की जांच और आपत्ति की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो जाती है।

प्रकाश राज ने SIR की प्रक्रिया को लेकर मतदाताओं की चिंताओं को सामने रखने की बात कही है। उनके अभियान का मुख्य मुद्दा यही है कि अगर कोई पात्र मतदाता चुनावी सूची से बाहर हो रहा है या उसका नाम जांच के दायरे में आ रहा है, तो उसे अपनी स्थिति स्पष्ट करने और अपना नाम बचाने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।

SIR यानी Special Intensive Revision चुनावी मतदाता सूची की व्यापक समीक्षा की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और उसमें मौजूद गलत या अपूर्ण प्रविष्टियों की पहचान करना होता है। इस प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के नाम, पते और दूसरी जानकारी की जांच की जाती है। इसी प्रक्रिया को लेकर देश के कई हिस्सों में राजनीतिक और कानूनी बहस भी चल रही है।

प्रकाश राज के 10 दिन के दौरे के दौरान अलग-अलग इलाकों में जाकर मतदाताओं से बातचीत करने और उनकी समस्याएं सामने लाने की योजना है। खास तौर पर उन लोगों के मामले उठाए जा रहे हैं जिनके नाम ASDDO सूची में दर्ज किए गए हैं और जिन्हें अपनी मतदाता पहचान या रिकॉर्ड से जुड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

कर्नाटक में SIR को लेकर यह गतिविधि ऐसे समय शुरू हुई है जब देश के दूसरे हिस्सों में भी मतदाता सूची की समीक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। दिल्ली में भी SIR से जुड़ी प्रक्रिया के दौरान दस्तावेजों और मतदाता रिकॉर्ड को लेकर विवाद सामने आया है। ऐसे में मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और सुधार की प्रक्रिया अब राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बन चुकी है।

हालांकि, किसी मतदाता का ASDDO सूची में होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि उसका नाम स्थायी रूप से मतदाता सूची से हटा दिया गया है। अंतिम स्थिति संबंधित चुनावी प्रक्रिया, दस्तावेजों और आपत्ति या दावे की जांच के बाद तय होती है। इसलिए ऐसे मामलों में मतदाताओं के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना दावा दर्ज कराना महत्वपूर्ण होता है।

प्रकाश राज का यह अभियान अब अगले 10 दिनों में कर्नाटक के अलग-अलग इलाकों तक जाएगा। इस दौरान SIR से प्रभावित होने का दावा करने वाले मतदाताओं की समस्याएं सामने लाने और चुनावी सूची में पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखने की मांग को लेकर अभियान चलाया जाएगा।

SIR को लेकर बहस अब सिर्फ राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं है। प्रकाश राज के इस 10 दिन के दौरे ने इसे सीधे मतदाताओं और उनके चुनावी अधिकारों से जोड़ दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अभियान के दौरान सामने आने वाली शिकायतों पर चुनावी अधिकारियों की ओर से क्या जवाब और कार्रवाई होती है।

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