राजनीति/ महाराष्ट्र | ABC NATIONAL NEWS | मुंबई | 22 सितंबर 2026
महाराष्ट्र की राजनीति में सोमवार रात एक ऐसा राजनीतिक मोड़ आया, जिसने आखिरी वक्त में होने वाली दलबदल की राजनीति को फिर चर्चा में ला दिया। बुलढाणा जिले की चिखली विधानसभा सीट से 2 बार कांग्रेस विधायक रह चुके राहुल बोंद्रे मंगलवार को BJP में शामिल होने वाले थे। कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी भी तय थी। तैयारियां पूरी थीं, लेकिन पार्टी में शामिल होने से ठीक पहले राहुल बोंद्रे को कांग्रेस के लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का फोन आया और इसके बाद उन्होंने BJP में जाने का फैसला बदल दिया।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे दिलचस्प बात यह रही कि राहुल गांधी का फोन सीधे बोंद्रे तक नहीं पहुंचा था। महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने दोनों नेताओं के बीच फोन पर बातचीत कराई। रिपोर्ट के मुताबिक, सपकाल ने राहुल गांधी से बोंद्रे से बात करने का अनुरोध किया था। बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने बोंद्रे से कांग्रेस छोड़कर BJP में जाने के अपने फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा। इसके बाद बोंद्रे ने BJP में शामिल होने का कार्यक्रम रोक दिया।
राहुल बोंद्रे चिखली की राजनीति में लंबे समय से कांग्रेस का प्रमुख चेहरा रहे हैं। उन्होंने 2009 और 2014 में इस सीट से कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की थी। 2019 में BJP की श्वेता महाले ने उन्हें हराया और 2024 में भी दोनों के बीच सीधा मुकाबला हुआ, जिसमें महाले ने 3,201 वोट के अंतर से जीत दर्ज की। 2024 में महाले को 1,09,212 वोट मिले, जबकि राहुल बोंद्रे को 1,06,011 वोट मिले। यानी बोंद्रे की राजनीतिक मौजूदगी इस सीट पर अब भी महत्वपूर्ण रही है।
यही वजह है कि बोंद्रे के BJP में जाने की खबर सिर्फ एक नेता के दल बदलने की खबर नहीं थी। इसका असर चिखली की स्थानीय राजनीति और बुलढाणा जिले में कांग्रेस के संगठन पर भी पड़ सकता था। दूसरी ओर BJP के लिए भी यह कदम राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होता, क्योंकि बोंद्रे लंबे समय तक कांग्रेस के टिकट पर इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और 2009 तथा 2014 में लगातार 2 चुनाव जीत चुके हैं।
दिलचस्प बात यह है कि सोमवार को ही चिखली की मौजूदा BJP विधायक श्वेता महाले ने बोंद्रे के BJP में आने के फैसले का स्वागत किया था। उन्होंने कहा था कि बोंद्रे ने अब BJP की हिंदुत्व विचारधारा को स्वीकार कर लिया है। लेकिन अगले ही चरण में तस्वीर बदल गई और बोंद्रे ने BJP में जाने का फैसला रोक दिया।
बोंद्रे का फैसला बदलना इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों में दल बदल और नेताओं के पाला बदलने की कई घटनाएं हुई हैं। ऐसे माहौल में किसी नेता का दूसरी पार्टी में जाने से ठीक पहले रुक जाना अपने आप में असामान्य राजनीतिक घटनाक्रम है। इस मामले में अंतिम क्षण में हुई बातचीत ने पूरे घटनाक्रम को और ज्यादा दिलचस्प बना दिया।
फ्री प्रेस जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, राहुल गांधी से बातचीत के बाद बोंद्रे ने कांग्रेस में बने रहने का फैसला किया और राहुल गांधी के साथ खड़े रहने की बात कही। हालांकि उनके फैसले के पीछे बातचीत में क्या-क्या मुद्दे रखे गए, इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है। इसलिए यह कहना उचित नहीं होगा कि केवल एक खास आश्वासन के कारण उन्होंने फैसला बदला। इतना जरूर स्पष्ट है कि राहुल गांधी से बातचीत के बाद उनका BJP में जाने का कार्यक्रम आगे नहीं बढ़ा।
इस पूरे घटनाक्रम में महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। अगर सपकाल बोंद्रे और राहुल गांधी के बीच बातचीत नहीं कराते, तो शायद यह आखिरी क्षण की राजनीतिक बातचीत संभव नहीं होती। ऐसे समय में जब कांग्रेस अपने संगठन को मजबूत करने और नेताओं को पार्टी के साथ बनाए रखने की कोशिश कर रही है, बोंद्रे का फैसला बदलना पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि इसके व्यापक राजनीतिक असर का आकलन आने वाले समय में ही किया जा सकेगा।
चिखली की चुनावी तस्वीर भी इस घटनाक्रम को समझने में मदद करती है। 2019 में श्वेता महाले ने राहुल बोंद्रे को 6,810 वोट से हराया था। 2024 में जीत का अंतर घटकर 3,201 वोट रह गया। इसका मतलब यह है कि दोनों नेताओं के बीच मुकाबला लगातार सीधा और करीबी रहा है। हालांकि चुनावी आंकड़ों से भविष्य के परिणाम का अनुमान लगाना उचित नहीं होगा, लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि चिखली में बोंद्रे और महाले के बीच राजनीतिक मुकाबला लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है।
अब इस पूरे घटनाक्रम के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि राहुल बोंद्रे कांग्रेस में अपनी राजनीतिक भूमिका को किस तरह आगे बढ़ाते हैं और BJP में जाने का उनका फैसला भविष्य में पूरी तरह खत्म हो गया है या नहीं। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने BJP में शामिल होने का फैसला रोक दिया है और कांग्रेस में बने रहने का निर्णय लिया है। सोमवार रात का घटनाक्रम महाराष्ट्र की राजनीति में इस बात का एक और उदाहरण बन गया है कि भारतीय राजनीति में कई बार अंतिम फैसला मंच पर नहीं, बल्कि मंच पर पहुंचने से कुछ मिनट पहले होने वाली बातचीत में बदल जाता है।



