अंतरराष्ट्रीय/ जांच | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 21 सितंबर 2026
भारत और चीन के बीच 2017 में डोकलाम में हुआ 73 दिनों का सैन्य गतिरोध सिर्फ सीमा पर तैनात सैनिकों तक सीमित नहीं रहा था। इसका असर हजारों किलोमीटर दूर मुंबई में चीन के सबसे बड़े सरकारी बैंकों में शामिल Industrial and Commercial Bank of China यानी ICBC की भारत स्थित एकमात्र शाखा तक पहुंचा था। The Indian Express की एक अंतरराष्ट्रीय जांच के अनुसार, ICBC के आंतरिक दस्तावेजों से पता चलता है कि डोकलाम तनाव के दौरान मुंबई शाखा ने 11 मंजूर लेकिन अभी तक वितरित नहीं किए गए ऋण और बॉन्ड निवेश रोक दिए थे, जिनकी कुल राशि करीब 18.5 करोड़ डॉलर थी।
यह जानकारी ICBC के जनवरी 2018 के एक 178 पन्नों वाले गोपनीय कार्य सारांश से सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, इस दस्तावेज में मुंबई शाखा को भारत-चीन सीमा विवाद के कारण पैदा हुई “आंतरिक और बाहरी चुनौतियों” का सामना करने वाली शाखा के रूप में दर्ज किया गया था। इसके बावजूद शाखा ने अपने नियमित कामकाज को जारी रखने की बात कही। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि उस अवधि में मुंबई शाखा अपने बीजिंग मुख्यालय द्वारा तय वार्षिक लक्ष्य का केवल 57.7 प्रतिशत हासिल कर सकी।
ICBC के दस्तावेज के अनुसार, डोकलाम तनाव के दौरान बैंक ने ऋण और निवेश से जुड़े जोखिमों को कम करने के लिए कदम उठाए। 11 स्वीकृत लेकिन अभी तक वितरित नहीं किए गए ऋण और बॉन्ड निवेश रोकने से शाखा के परिचालन राजस्व पर करीब 63.6 लाख डॉलर का असर पड़ा। यानी सीमा पर पैदा हुआ सैन्य तनाव बैंक के वित्तीय फैसलों और उसके भारत में कारोबार के प्रदर्शन तक पहुंच गया था।
डोकलाम विवाद जून 2017 में उस समय शुरू हुआ था जब चीन ने भारत, भूटान और चीन के त्रिकोणीय क्षेत्र के पास सड़क निर्माण की कोशिश की। भारत और चीन के सैनिक आमने-सामने आ गए और करीब 73 दिनों तक गतिरोध बना रहा। अगस्त 2017 में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत के बाद सैनिक पीछे हटे। लेकिन अब सामने आए ICBC के दस्तावेज बताते हैं कि उस टकराव का असर दोनों देशों के आर्थिक और कारोबारी संबंधों पर भी पड़ा था।
इससे भी महत्वपूर्ण जानकारी ICBC की मुंबई शाखा में Communist Party of China से जुड़े संगठनात्मक ढांचे को लेकर सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, बैंक के आंतरिक दस्तावेज में कहा गया कि डोकलाम तनाव के दौरान शाखा ने विभिन्न विभागों में Party members को संगठित किया ताकि वे अपने पदों पर बने रहें और चीनी दूतावास तथा वाणिज्य दूतावास के साथ लगातार संपर्क बनाए रखें। यह जानकारी ICBC के अपने आंतरिक दस्तावेज से सामने आई है, न कि किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी के आकलन के रूप में।
दस्तावेज में यह भी बताया गया कि मुंबई शाखा ने तनावपूर्ण दौर में बीजिंग स्थित मुख्यालय के संबंधित विभागों को स्थिति की जानकारी दी और आकस्मिक योजनाएं तैयार कीं। बैंक ने ऋण और निवेश जोखिम को कम करने के साथ-साथ शाखा के सामान्य संचालन पर तनाव के प्रभाव को सीमित करने की कोशिश की। स्थानीय कर्मचारियों के बीच चिंता कम करने के लिए CEO के साथ चाय बैठकें, व्यक्तिगत बातचीत और सामाजिक गतिविधियां आयोजित करने का भी उल्लेख रिपोर्ट में है।
यह खुलासा जिस बड़े डेटा सेट से हुआ है, उसमें ICBC की लंदन शाखा से जुड़े करीब 48 लाख दस्तावेज शामिल हैं। ये रिकॉर्ड 2005 से 2024 के बीच के हैं और इनमें “trade secrets”, गोपनीय रिपोर्ट तथा 4,000 से अधिक कॉरपोरेट ग्राहकों से संबंधित सूचनाएं शामिल होने की बात कही गई है। ये दस्तावेज पहले Hunters International नाम के हैकिंग समूह के हाथ लगे और बाद में International Consortium of Investigative Journalists यानी ICIJ तक पहुंचे।
ICIJ ने इस डेटा पर दुनिया के 24 देशों के 75 पत्रकारों के साथ मिलकर ‘China Capital’ नाम से जांच की। The Indian Express इस जांच में शामिल मीडिया संस्थानों में से एक है। जांच में ICBC के वैश्विक संचालन और चीन की राजनीतिक-आर्थिक व्यवस्था के बीच संबंधों से जुड़े कई दस्तावेजों की पड़ताल की गई है।
ICBC चीन का सबसे बड़ा वाणिज्यिक बैंक है और उसके पास 8 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की संपत्ति होने की रिपोर्ट में जानकारी दी गई है। यह चीन के चार बड़े सरकारी बैंकों में शामिल है। जांच में सामने आए दस्तावेजों के आधार पर यह भी बताया गया है कि बैंक की आंतरिक व्यवस्था में Communist Party Committee की भूमिका मौजूद है और वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारियों में पार्टी से जुड़े कार्य भी शामिल रहे हैं।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि ICBC के कुछ आंतरिक रिकॉर्ड में ग्राहकों और कारोबारी सौदों का मूल्यांकन करते समय उनके संभावित आर्थिक और राजनीतिक महत्व पर विचार किए जाने के संकेत मिलते हैं। हालांकि इन दस्तावेजों से किसी एक कारोबारी फैसले को चीन सरकार के प्रत्यक्ष निर्देश का परिणाम मानने से पहले उसके संदर्भ और अन्य साक्ष्यों की जांच जरूरी होगी। ICBC ने The Indian Express और ICIJ की ओर से भेजे गए सवालों का जवाब नहीं दिया।
डोकलाम के दौरान मुंबई में ICBC द्वारा 18.5 करोड़ डॉलर के 11 ऋण और निवेश रोकना यह दिखाता है कि भारत-चीन सीमा पर सैन्य तनाव का असर दोनों देशों के आर्थिक संबंधों और कारोबारी फैसलों तक पहुंच सकता है। सामने आए दस्तावेज चीन के सरकारी बैंकिंग ढांचे, उसकी पार्टी व्यवस्था और विदेशों में संचालित शाखाओं के बीच संबंधों पर भी महत्वपूर्ण सवाल उठाते हैं। अब इन दस्तावेजों से सामने आई जानकारियों की पूरी तस्वीर को भारत-चीन संबंधों और ICBC की वैश्विक भूमिका के व्यापक संदर्भ में देखा जाना बाकी है।



