अंतरराष्ट्रीय/ टेक्नोलॉजी | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन | 20 सितंबर 2026
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर अपनी सरकार की दिशा और साफ कर दी है। एक तरफ AI क्षेत्र के कुछ बड़े कारोबारी और तकनीकी विशेषज्ञ तेजी से बढ़ रहे AI मॉडल के विकास की रफ्तार को लेकर सावधानी बरतने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की बात कर रहे हैं, वहीं ट्रंप ने AI के विकास को धीमा करने की मांगों को खारिज करते हुए एक नई ‘AI फोर्स’ बनाने की घोषणा की है। ट्रंप ने कहा है कि यह फोर्स अमेरिकी स्पेस फोर्स की तर्ज पर बनाई जाएगी और इसके लिए जल्द ही एक ‘AI सीजर’ यानी AI मामलों का प्रमुख नियुक्त किया जाएगा।
ट्रंप ने शनिवार को अपने सोशल मीडिया मंच पर AI को लेकर अपनी योजना की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि AI अगली औद्योगिक क्रांति या इंटरनेट की तरह है, लेकिन उसका प्रभाव उससे भी बड़ा हो सकता है। ट्रंप के मुताबिक AI भविष्य में अमेरिका की अर्थव्यवस्था में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है और उन्होंने अनुमान लगाया कि इसका असर देश के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के करीब 25 प्रतिशत तक हो सकता है। हालांकि उन्होंने AI फोर्स बनाने के लिए कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई है और यह भी स्पष्ट नहीं किया कि यह नई व्यवस्था संघीय सरकार के किस विभाग के तहत काम करेगी।
ट्रंप ने यह भी कहा कि AI के गलत इस्तेमाल पर कार्रवाई के लिए अमेरिका की मौजूदा आपराधिक और नागरिक न्याय व्यवस्था का इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने AI के क्षेत्र में गलत काम करने वालों की पहचान और उनके खिलाफ कार्रवाई की बात कही। ट्रंप का संदेश साफ था कि वह AI के विकास को रोकने या उसकी गति कम करने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका इस उद्योग की वृद्धि को रोकने के बजाय उसे आगे बढ़ाएगा, उसकी मदद करेगा और उसके विकास पर नजर रखेगा।
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब AI उद्योग के भीतर ही इसके विकास की गति और सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो गई है। एंथ्रोपिक के प्रमुख डारियो अमोडेई ने हाल ही में कहा था कि AI प्रणालियां इतनी तेजी से आगे बढ़ रही हैं कि सुरक्षा व्यवस्था उनके साथ कदम मिलाकर नहीं चल पा रही है। उन्होंने AI के अत्याधुनिक मॉडलों के विकास की गति को कुछ हद तक नियंत्रित करने, बाहरी मूल्यांकन और साझा सुरक्षा मानकों की जरूरत पर जोर दिया था। उनका तर्क है कि AI जितनी तेजी से शक्तिशाली हो रहा है, उतनी ही तेजी से उसके संभावित जोखिमों की पहचान और रोकथाम की व्यवस्था भी विकसित होनी चाहिए।
अमोडेई की इस चिंता को AI उद्योग के कुछ दूसरे बड़े नामों का समर्थन भी मिला है। ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन, गूगल डीपमाइंड के डेमिस हासाबिस, एलन मस्क और बिल गेट्स उन लोगों में शामिल हैं जिन्होंने AI के विकास के साथ सुरक्षा पर अधिक ध्यान देने की जरूरत की बात कही है। दूसरी ओर, मेटा के मार्क जुकरबर्ग और एनवीडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जेनसन हुआंग जैसे उद्योग से जुड़े लोगों ने AI के विकास पर व्यापक सरकारी रोक या उसकी गति नियंत्रित करने की मांगों से अलग रुख अपनाया है।
यानी इस समय AI की दुनिया में मूल बहस यही है कि तकनीक को कितनी तेजी से आगे बढ़ाया जाए और उसके जोखिमों से निपटने के लिए कितनी मजबूत सुरक्षा व्यवस्था साथ-साथ बनाई जाए। एक पक्ष का कहना है कि अत्यधिक तेज विकास के साथ ऐसे खतरे पैदा हो सकते हैं जिनका अनुमान पहले से लगाना मुश्किल है। दूसरा पक्ष मानता है कि AI में रुकावट डालने से तकनीकी विकास, वैज्ञानिक खोज, उद्योग और आर्थिक प्रतिस्पर्धा पर असर पड़ सकता है। ट्रंप ने फिलहाल दूसरे दृष्टिकोण के करीब अपना रुख रखा है और AI के विकास को अमेरिकी आर्थिक तथा रणनीतिक क्षमता से जोड़कर देखा है।
ट्रंप ने अपने बयान में अपनी प्रस्तावित AI फोर्स की तुलना उस स्पेस फोर्स से की जिसे उन्होंने अपने पहले कार्यकाल के दौरान बनाया था। उन्होंने कहा कि AI फोर्स का नेतृत्व एक AI सीजर करेगा और इस पद के लिए वह जल्द घोषणा करेंगे। उन्होंने इस पद के लिए उच्च क्षमता वाले लोगों की जरूरत पर भी जोर दिया। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि AI सीजर के पास कितनी शक्तियां होंगी, उसका प्रशासनिक ढांचा क्या होगा और AI फोर्स का काम केवल AI से जुड़े अपराधों और नियमों की निगरानी तक सीमित रहेगा या इसमें अनुसंधान, सुरक्षा और राष्ट्रीय रणनीति जैसे दूसरे क्षेत्र भी शामिल होंगे।
AI को लेकर ट्रंप की सोच का एक बड़ा हिस्सा अमेरिकी अर्थव्यवस्था से भी जुड़ा है। दुनिया की बड़ी तकनीकी कंपनियां AI में अरबों डॉलर का निवेश कर रही हैं और नए मॉडल विकसित करने की होड़ चल रही है। AI का इस्तेमाल शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, रक्षा, वित्त, संचार और वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे कई क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में अमेरिका के लिए AI क्षेत्र में अपनी तकनीकी बढ़त बनाए रखना आर्थिक और रणनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ट्रंप इसी व्यापक बदलाव को अगली औद्योगिक क्रांति के रूप में देख रहे हैं।
लेकिन AI की रफ्तार के साथ सवाल भी बढ़ रहे हैं। AI मॉडल गलत जानकारी दे सकते हैं, पक्षपातपूर्ण परिणाम पैदा कर सकते हैं, निजी जानकारी के दुरुपयोग का खतरा पैदा कर सकते हैं और साइबर अपराध जैसे क्षेत्रों में गलत इस्तेमाल किए जा सकते हैं। इसके अलावा यह भी चिंता है कि अत्यधिक स्वचालन से रोजगार के कुछ पारंपरिक क्षेत्रों पर दबाव बढ़ सकता है। AI के अधिक शक्तिशाली होने के साथ इन जोखिमों को नियंत्रित करने के लिए सरकारों और कंपनियों के बीच किस तरह की व्यवस्था होनी चाहिए, यह अभी भी दुनिया के सामने खुला सवाल है।
ट्रंप ने AI के विकास को रोकने की मांगों को स्वीकार नहीं किया है। उनका कहना है कि अमेरिका इस तकनीक की वृद्धि को बाधित नहीं करेगा। साथ ही उन्होंने यह संकेत दिया है कि गलत इस्तेमाल पर मौजूदा कानूनी व्यवस्था के जरिए कार्रवाई की जाएगी। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रस्तावित AI फोर्स और AI सीजर वास्तव में किस रूप में काम करेंगे। क्योंकि केवल घोषणा से AI की सुरक्षा और विकास के बीच संतुलन तय नहीं होगा। इसके लिए स्पष्ट नियम, जिम्मेदारियां, निगरानी और तकनीकी विशेषज्ञता की जरूरत होगी।
AI को लेकर दुनिया इस समय एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां तकनीकी विकास की रफ्तार और सुरक्षा के बीच संतुलन सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि उनकी प्राथमिकता AI की रफ्तार कम करना नहीं, बल्कि अमेरिका को इस तकनीकी दौड़ में आगे रखना है। अब ‘AI फोर्स’ और ‘AI सीजर’ की घोषणा के बाद असली परीक्षा इस बात की होगी कि अमेरिका AI के तेज विकास के साथ उसके संभावित खतरों पर नियंत्रण की व्यवस्था किस तरह खड़ी करता है।



