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PDA समाज को डराने की कोशिश कर रही है BJP : अखिलेश यादव

राजनीति/ उत्तर प्रदेश | ABC NATIONAL NEWS | लखनऊ | 20 सितंबर 2026

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने BJP और उत्तर प्रदेश सरकार पर पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समुदायों को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। अखिलेश यादव ने शनिवार को कहा कि BJP और उसकी सरकार दबाव और जबरदस्ती के तरीकों के जरिए हाशिये पर रहने वाले समूहों को डराने की कोशिश कर रही है। उनका यह बयान संत कबीर नगर में एक दिन पहले हुई उस घटना के बाद आया है, जिसमें समाजवादी पार्टी के सांसद लक्ष्मीकांत उर्फ पप्पू निषाद की गाड़ी को गणेश प्रतिमा विसर्जन जुलूस के दौरान पथराव में नुकसान पहुंचाया गया था। अखिलेश ने इस घटना को PDA यानी पिछड़े वर्ग, दलित और अल्पसंख्यक समाज से जोड़ते हुए BJP और सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर कहा कि BJP के लोग और BJP सरकार कभी लोधी समुदाय तो कभी निषाद समुदाय के नेताओं और जनप्रतिनिधियों को निशाना बनाकर PDA समाज को बलपूर्वक डराने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी सामाजिक न्याय और भाईचारे पर आधारित समाज बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। अखिलेश के बयान में PDA समाज का जिक्र इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि समाजवादी पार्टी पिछले कुछ समय से पिछड़े वर्ग, दलित और अल्पसंख्यक समुदायों को एक साथ जोड़कर सामाजिक न्याय और राजनीतिक भागीदारी का मुद्दा उठाती रही है।

पूरा मामला संत कबीर नगर जिले के एक गांव में गणेश प्रतिमा विसर्जन जुलूस के दौरान हुई घटना से जुड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार समाजवादी पार्टी के सांसद लक्ष्मीकांत उर्फ पप्पू निषाद के वाहन को पथराव में नुकसान पहुंचा। घटना के बाद इलाके में पुलिस की कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे। पुलिस इस मामले में घटना की परिस्थितियों और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। इसी घटना को आधार बनाकर अखिलेश यादव ने इसे PDA समाज के नेताओं और जनप्रतिनिधियों के साथ होने वाली घटनाओं की व्यापक कड़ी से जोड़ते हुए BJP पर सवाल उठाए हैं।

अखिलेश यादव ने कहा कि लोधी और निषाद जैसे समुदायों के नेताओं तथा जनप्रतिनिधियों को निशाना बनाए जाने से PDA समाज के बीच डर का माहौल पैदा करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने इसे केवल एक स्थानीय घटना के रूप में नहीं देखा, बल्कि सामाजिक न्याय और समुदायों की राजनीतिक भागीदारी से जोड़कर अपनी बात रखी। समाजवादी पार्टी का कहना है कि पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समुदायों को राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बराबर सम्मान और भागीदारी मिलनी चाहिए।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में PDA इस समय समाजवादी पार्टी के प्रमुख राजनीतिक मुद्दों में शामिल है। अखिलेश यादव लगातार पिछड़े वर्ग, दलित और अल्पसंख्यक समुदायों की हिस्सेदारी, प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय के मुद्दे उठाते रहे हैं। ऐसे में संत कबीर नगर की घटना पर उनका बयान केवल कानून-व्यवस्था से जुड़ा बयान नहीं है। उन्होंने इसे उन समुदायों के सम्मान और सुरक्षा से जोड़कर भी देखा है, जिन्हें समाजवादी पार्टी अपनी PDA राजनीति का आधार मानती है।

अखिलेश यादव के बयान के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस भी तेज होने की संभावना है। BJP और राज्य सरकार का पक्ष सामने आने के बाद इस विवाद की तस्वीर का दूसरा हिस्सा भी सामने आएगा। फिलहाल घटना को लेकर पुलिस की जांच महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे यह स्पष्ट होगा कि पथराव किन परिस्थितियों में हुआ, इसमें कौन लोग शामिल थे और घटना के पीछे वास्तविक वजह क्या थी।

धार्मिक जुलूस और सार्वजनिक आयोजनों के दौरान होने वाली छोटी घटनाएं कई बार तेजी से बड़े विवाद में बदल जाती हैं। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी होती है कि कानून-व्यवस्था बनी रहे और सभी लोगों तथा जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो। राजनीतिक दल ऐसी घटनाओं को अपने-अपने सामाजिक और राजनीतिक नजरिए से देखते हैं। संत कबीर नगर की घटना में भी यही दिखाई दे रहा है, जहां एक तरफ स्थानीय घटना है और दूसरी तरफ अखिलेश यादव ने इसे PDA समाज के व्यापक सवाल से जोड़ दिया है।

समाजवादी पार्टी के लिए यह मुद्दा इसलिए भी अहम है क्योंकि पार्टी अपनी राजनीति में सामाजिक न्याय, पिछड़े वर्गों की भागीदारी, दलित अधिकार और अल्पसंख्यकों की हिस्सेदारी को लगातार प्रमुखता देती रही है। अखिलेश यादव का कहना है कि उनकी पार्टी ऐसे समाज की स्थापना चाहती है जिसमें अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच भाईचारा हो और सभी को बराबर सम्मान मिले। संत कबीर नगर की घटना को लेकर उनका बयान इसी राजनीतिक सोच के साथ सामने आया है।

अब इस पूरे मामले में पुलिस की जांच और आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी। अगर जांच में पथराव करने वालों की पहचान और घटना की पूरी वजह सामने आती है तो विवाद के कई सवालों का जवाब मिल सकता है। फिलहाल अखिलेश यादव ने इस घटना को PDA समाज को डराने की कोशिश बताते हुए BJP और सरकार पर सवाल खड़े कर दिए हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सामाजिक न्याय और समुदायों की सुरक्षा का मुद्दा चर्चा में आ गया है।

संत कबीर नगर की घटना ने एक स्थानीय विवाद को उत्तर प्रदेश की बड़ी राजनीतिक बहस से जोड़ दिया है। अखिलेश यादव ने इसे PDA समाज के सम्मान, सुरक्षा और राजनीतिक भागीदारी का सवाल बनाया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस जांच में घटना की वास्तविक तस्वीर क्या सामने आती है और BJP तथा राज्य सरकार इस मुद्दे पर क्या जवाब देती है।

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