[the_ad id="179"]
Home » National » छात्रों की गूंज में राहुल गांधी का संदेश: सवाल पूछो, अपने हक की आवाज उठाओ; मोदी-शाह की व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल

छात्रों की गूंज में राहुल गांधी का संदेश: सवाल पूछो, अपने हक की आवाज उठाओ; मोदी-शाह की व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल

शिक्षा/ राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | इंदौर | 20 सितंबर 2026

इंदौर में शनिवार को आयोजित राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में शिक्षा और रोजगार के मुद्दों के साथ देश की मौजूदा व्यवस्था पर भी लंबी बात हुई। कार्यक्रम का मुख्य विषय “सिस्टम बनाम छात्र” रहा। राहुल गांधी ने कहा कि छात्र की सबसे बड़ी ताकत उसका सवाल पूछना है और जो युवा सवाल करता है, वह किसी भी व्यवस्था को बेहतर बनाने की कोशिश करता है। इसी दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और उद्योगपतियों गौतम अडानी तथा मुकेश अंबानी का नाम लेते हुए मौजूदा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। राहुल गांधी के ये आरोप उनके भाषण और राजनीतिक विचारों का हिस्सा थे।

इंदौर का यह कार्यक्रम ‘छात्रों की गूंज’ की पांचवीं कड़ी था। इससे पहले यह कार्यक्रम कोटा, देहरादून, प्रयागराज और पुणे में आयोजित हो चुका है। इस अभियान के जरिए राहुल गांधी छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के साथ सीधे संवाद कर रहे हैं। इंदौर में भी उन्होंने मंच से भाषण देने के साथ छात्रों की समस्याएं सुनीं और उनसे सीधे सवाल-जवाब किए।

राहुल बोले—छात्र सवाल पूछता है, इसलिए व्यवस्था को उससे परेशानी है

राहुल गांधी ने अपने संबोधन की शुरुआत छात्रों के सवालों से की। उन्होंने कहा कि छात्र स्वभाव से जिज्ञासु होता है। वह किसी बात को सिर्फ इसलिए स्वीकार नहीं करता कि उसे ऐसा करने के लिए कहा गया है। वह पूछता है कि ऐसा क्यों है, यह कैसे हो रहा है और इसके पीछे क्या कारण है।

राहुल गांधी ने कहा कि उनके अनुसार मौजूदा व्यवस्था छात्रों के सवालों से असहज होती है। उन्होंने कहा कि व्यवस्था को ऐसे लोगों की जरूरत है जो सवाल न करें, जबकि छात्र की पहचान ही सवाल पूछना है। इसी संदर्भ में उन्होंने “अंधभक्त” शब्द का इस्तेमाल किया और कहा कि छात्र और अंधभक्त में मूल अंतर यही है कि छात्र सवाल करता है।

मोदी-शाह को लेकर राहुल ने क्या कहा?

राहुल गांधी ने कार्यक्रम में देश की व्यवस्था की अपनी व्याख्या रखते हुए कहा कि इसके शीर्ष पर कुछ प्रभावशाली लोग बैठे हैं। उन्होंने नरेंद्र मोदी को व्यवस्था के शीर्ष पर बताया और अमित शाह को उसकी कार्रवाई से जोड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों और विरोध की आवाजों से निपटने के लिए दबाव और बल का इस्तेमाल किया जाता है।

राहुल गांधी ने अपने भाषण में अमित शाह के बेटे जय शाह का नाम लेकर क्रिकेट प्रशासन को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि एक छात्र यह पूछ सकता है कि अमित शाह के बेटे को क्रिकेट प्रशासन में इतनी महत्वपूर्ण भूमिका कैसे मिली। यह सवाल राहुल गांधी ने व्यवस्था में अवसर और प्रभाव के वितरण पर अपनी बात रखने के लिए उठाया।

डोभाल को लेकर राहुल गांधी का दावा

राहुल गांधी ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का नाम लेते हुए संचार और निगरानी को लेकर भी आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि देश में फोन, व्हाट्सऐप, फेसबुक और दूसरे संचार माध्यमों से जुड़ी जानकारी पर निगरानी रखी जाती है और इस तरह की जानकारी ऊपर तक पहुंचती है।

उन्होंने छात्रों से कहा कि वे इस तरह के मुद्दों पर भी सवाल पूछें। राहुल गांधी की यह बात उनके भाषण में लगाए गए आरोपों पर आधारित थी; उन्होंने इसके जरिए छात्रों के सवाल पूछने के अधिकार को देश की संस्थाओं के कामकाज से जोड़ने की कोशिश की।

मोहन भागवत और शिक्षा व्यवस्था का भी जिक्र

राहुल गांधी ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का नाम लेते हुए शिक्षा संस्थानों और विचारधारा के सवाल को भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस से जुड़े संगठनों को स्कूल, कॉलेज और दूसरे संस्थान चलाने में बड़ी भूमिका मिली हुई है।

उन्होंने शिक्षा के लिए इस्तेमाल होने वाले सार्वजनिक धन और बड़े कारोबारी समूहों के बीच संबंधों को लेकर भी सवाल उठाए। गौतम अडानी और मुकेश अंबानी का नाम लेते हुए राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश की आर्थिक व्यवस्था और बड़े कारोबारी हितों का राजनीतिक व्यवस्था पर प्रभाव बढ़ा है। ये राहुल गांधी के लगाए हुए आरोप हैं, जिन्हें उन्होंने कार्यक्रम के दौरान छात्रों के सामने अपनी बात के रूप में रखा।

“छात्रों को चुप नहीं, जिज्ञासु होना चाहिए”

राहुल गांधी ने छात्रों की भूमिका को केवल पढ़ाई और नौकरी तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने कहा कि छात्र देश का भविष्य हैं और उनकी सबसे बड़ी ताकत जिज्ञासा है।

उन्होंने छात्रों के चार गुणों का जिक्र किया—जिज्ञासा, प्रेम, विनम्रता और ईमानदारी। उनके अनुसार छात्र अलग-अलग विचारों को समझने की कोशिश करता है और दूसरे व्यक्ति को सुनता है। उन्होंने यह भी कहा कि छात्र समाज में हिंसा और नफरत कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

शिक्षकों के खाली पदों का मुद्दा

कार्यक्रम में शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों की कमी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। राहुल गांधी ने देश में बड़ी संख्या में शिक्षकों के पद खाली होने की बात कही। उन्होंने दावा किया कि देश में करीब एक लाख स्कूल बंद हुए हैं और शिक्षा व्यवस्था इससे प्रभावित हुई है। यह आंकड़ा राहुल गांधी ने अपने भाषण में रखा।

उनका कहना था कि अगर भारत को मजबूत बनाना है तो छात्रों और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना होगा। उनके अनुसार केवल बड़े संस्थान और बड़ी इमारतें पर्याप्त नहीं हैं। बच्चों को अच्छे शिक्षक, बेहतर सुविधाएं और आगे बढ़ने के अवसर भी मिलने चाहिए।

मध्य प्रदेश के छात्रों ने भर्ती और आरक्षण का मुद्दा उठाया

कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के छात्रों ने भी अपनी समस्याएं राहुल गांधी के सामने रखीं। प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी भर्ती से जुड़े मुद्दों पर छात्रों ने सवाल किए। एक छात्रा ने मध्य प्रदेश में भर्ती परीक्षाओं में 13 प्रतिशत कोटे से जुड़ी समस्या का मुद्दा उठाया।

राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश में शिक्षक भर्ती की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों के साथ खड़े होने की बात कही और उनके आंदोलन में शामिल होने की पेशकश भी की। इससे कार्यक्रम में शिक्षा के साथ रोजगार और सरकारी भर्ती का मुद्दा भी प्रमुख बन गया।

आदिवासी छात्रा ने छात्रावास की कमी बताई

कार्यक्रम में एक आदिवासी छात्रा ने इंदौर में आदिवासी छात्रों के लिए छात्रावासों की कमी का मुद्दा उठाया। उसका सवाल था कि दूसरे इलाकों से पढ़ने के लिए आने वाले छात्रों के लिए रहने की पर्याप्त व्यवस्था क्यों नहीं है।

राहुल गांधी ने छात्रों की बात सुनते हुए शिक्षा के अवसरों को सामाजिक बराबरी से जोड़ा। उन्होंने कहा कि गरीब, आदिवासी और दूसरे कमजोर वर्गों के बच्चों को भी पढ़ाई और आगे बढ़ने के समान अवसर मिलने चाहिए।

छात्रों की आवाज को लेकर कार्यक्रम से पहले भी चर्चा

‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम इंदौर में शुरू होने से पहले भी काफी चर्चा में रहा। कार्यक्रम के लिए जगह बदली गई और बाद में इंदौर विकास प्राधिकरण ने जमीन के तय समय से पहले इस्तेमाल को लेकर कांग्रेस से अतिरिक्त भुगतान की मांग की। कांग्रेस ने इस पर सवाल उठाए।

कार्यक्रम की सुरक्षा को लेकर भी पुलिस ने कई शर्तें रखीं। सुरक्षा संबंधी दस्तावेज में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद बनी न्यायमूर्ति जे.एस. वर्मा आयोग की रिपोर्ट का भी संदर्भ दिया गया था। कांग्रेस ने इन शर्तों पर आपत्ति जताई थी।

कार्यक्रम से पहले कांग्रेस ने यह आरोप भी लगाया था कि कुछ कोचिंग संस्थानों के संचालकों पर छात्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी से जुड़े दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने का दबाव बनाया गया। यह कांग्रेस का आरोप था।

कोटा से इंदौर तक छात्रों से सीधा संवाद

राहुल गांधी का छात्र संवाद अभियान अब पांच शहरों तक पहुंच चुका है। कोटा, देहरादून, प्रयागराज और पुणे के बाद इंदौर में आयोजित कार्यक्रम में भी प्रतियोगी परीक्षाओं, रोजगार, शिक्षा, छात्रावास, शिक्षक भर्ती और छात्रों की आवाज जैसे मुद्दे सामने आए।

इस अभियान में राहुल गांधी छात्रों को केवल भाषण सुनाने के बजाय उनसे बातचीत करने और उनकी समस्याएं सुनने पर जोर देते दिखाई दिए। इंदौर में भी छात्रों ने अपने सवाल सीधे उनके सामने रखे और राहुल गांधी ने उन मुद्दों को देश की शिक्षा और व्यवस्था से जोड़कर अपनी बात रखी।

राहुल गांधी का मुख्य संदेश—सवाल पूछना बंद मत करो

इंदौर की ‘छात्रों की गूंज’ में राहुल गांधी ने शिक्षा और रोजगार से लेकर देश की संस्थाओं और राजनीतिक व्यवस्था तक अपनी बात रखी। नरेंद्र मोदी और अमित शाह को लेकर उनके आरोप कार्यक्रम के राजनीतिक हिस्से का प्रमुख विषय रहे, जबकि छात्रों की शिक्षा, भर्ती, छात्रावास और रोजगार की समस्याएं कार्यक्रम के सामाजिक और शैक्षणिक हिस्से का केंद्र रहीं।

राहुल गांधी ने छात्रों से कहा कि वे अपनी जिज्ञासा को खत्म न होने दें। सवाल पूछना उनकी कमजोरी नहीं, बल्कि ताकत है। उनके मुताबिक जो छात्र सवाल करता है, वही अपने आसपास की व्यवस्था को समझता है और बदलाव की जरूरत को पहचानता है।

इंदौर से ‘छात्रों की गूंज’ का संदेश साफ था—छात्र केवल परीक्षा देने वाला युवा नहीं है। वह सवाल करने वाला नागरिक भी है। उसके सवाल शिक्षा, रोजगार और अपने भविष्य से लेकर देश की संस्थाओं और व्यवस्था तक जा सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *