अपराध/ राजनीति/ केरल | ABC NATIONAL NEWS | कोच्चि | 19 सितंबर 2026
केरल के चर्चित CMRL-Exalogic पे-ऑफ मामले में अब जांच आगे बढ़ने का रास्ता साफ होता दिखाई दे रहा है। केरल के एडवोकेट जनरल के. जाजू बाबू और अभियोजन पक्ष के अधिकारियों की कानूनी राय के बाद राज्य पुलिस के सामने प्रवर्तन निदेशालय यानी ED की रिपोर्ट पर FIR दर्ज करने का विकल्प खुल गया है। कानूनी राय में कहा गया है कि यदि रिपोर्ट में संज्ञेय अपराध बनता है तो पुलिस FIR दर्ज कर सकती है और जरूरत पड़ने पर पहले प्रारंभिक जांच भी कर सकती है।
यह मामला पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान विपक्ष के नेता पिनराई विजयन, उनकी बेटी टी. वीणा और उनके पति तथा विधायक पी.ए. मोहम्मद रियास से जुड़ा है। ED ने राज्य पुलिस प्रमुख को भेजी अपनी रिपोर्ट में आरोप लगाया है कि कोच्चि मिनरल्स एंड रुटाइल लिमिटेड यानी CMRL और वीणा की कंपनी Exalogic Solutions के बीच हुए भुगतान सामान्य कारोबारी भुगतान नहीं थे, बल्कि इनके पीछे कथित तौर पर अनुचित आर्थिक लाभ और भ्रष्टाचार से जुड़ा लेन-देन था। ED ने मामले में भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत कार्रवाई की मांग की है।
ED की रिपोर्ट के अनुसार, Exalogic को CMRL की ओर से करीब ₹2.78 करोड़ का भुगतान किया गया था। एजेंसी का आरोप है कि इन भुगतानों के बदले अपेक्षित सेवाएं नहीं दी गईं और बाद की जांच में इसे कथित रिश्वत/किकबैक से जोड़ा गया। ED ने पिनराई विजयन के संबंध में करीब ₹3.28 करोड़ की कथित रिश्वत का भी आरोप लगाया है। हालांकि, ये फिलहाल जांच एजेंसी के आरोप हैं और अदालत में दोष सिद्ध होने तक इन्हें स्थापित अपराध नहीं माना जा सकता।
कानूनी राय में Prevention of Corruption Act की उन धाराओं का भी उल्लेख किया गया है जिनके तहत किसी तीसरे व्यक्ति के माध्यम से या किसी दूसरे व्यक्ति के लाभ के लिए रिश्वत स्वीकार करने का मामला बन सकता है। अधिकारियों ने यह भी कहा है कि कानून की संबंधित धारा के तहत किसी सरकारी पद पर रहे व्यक्ति द्वारा अनुचित लाभ स्वीकार करने के मामले में कुछ परिस्थितियों में कानूनी अनुमान लागू हो सकता है, लेकिन अभियोजन को पहले मांग और स्वीकार किए जाने से जुड़े बुनियादी तथ्य स्थापित करने होंगे।
इस मामले में अब तक राजनीतिक विवाद भी लगातार बना हुआ है। पिनराई विजयन ने ED के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा है कि Exalogic और CMRL के बीच हुए लेन-देन वैध कारोबारी लेन-देन थे और उन्हें सही तरीके से दर्ज किया गया था। विजयन ने ED के आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा कि एजेंसी द्वारा लगाए गए आरोपों का आधार ठोस नहीं है।
मामले को लेकर एक और महत्वपूर्ण पहलू भी सामने आया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, CMRL के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने ED के सामने पहले दिए गए अपने बयानों को बाद में वापस लेने का दावा किया और आरोप लगाया कि ये बयान दबाव और डराने-धमकाने की स्थिति में लिए गए थे। यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ED की कार्रवाई में इन बयानों का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है। इन दावों की जांच और उनके कानूनी प्रभाव का निर्धारण संबंधित जांच और अदालत की प्रक्रिया में होना है।
ED ने इसके अलावा रियास से जुड़े कथित हवाला लेन-देन की भी जांच का उल्लेख किया है। एजेंसी के अनुसार, उसके पास कुछ बयानों और दस्तावेजों से जुड़े ऐसे संकेत हैं जिनकी आगे जांच की जरूरत है। रियास और अन्य संबंधित पक्षों की ओर से इन आरोपों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है।
अब अगला महत्वपूर्ण कदम राज्य पुलिस और सरकार की कार्रवाई होगी। कानूनी राय के मुताबिक पुलिस ED की रिपोर्ट को स्वीकार कर सकती है और संज्ञेय अपराध बनता है तो FIR दर्ज कर सकती है। प्रारंभिक जांच, Vigilance, Crime Branch या विशेष जांच दल जैसे विकल्पों पर भी विचार किए जाने की संभावना रिपोर्टों में सामने आई है।
इस पूरे मामले में फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कानूनी जांच का रास्ता खुला है, लेकिन आरोप अभी आरोप ही हैं। FIR दर्ज होना भी किसी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं होता। अब पुलिस की जांच, उपलब्ध दस्तावेज, वित्तीय लेन-देन और संबंधित पक्षों के बयान यह तय करेंगे कि ED के आरोपों में आपराधिक कार्रवाई के लिए पर्याप्त आधार है या नहीं। मामले का अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया से ही सामने आएगा।



