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राहुल-ममता साथ, TMC का चिन्ह फ्रीज; अब सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं ममता

राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 19 सितंबर 2026

पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर शुरू हुआ विवाद अब चुनाव आयोग से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले में TMC के मूल नाम ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ और पारंपरिक ‘फूल और घास’ चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल पर रोक लगाए जाने के बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिका शुक्रवार, 18 सितंबर को दाखिल की गई, यानी आयोग की ओर से दोनों गुटों को नए नाम और चुनाव चिन्ह आवंटित किए जाने के कुछ ही घंटे बाद।

ममता खेमे की याचिका में चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती देते हुए कहा गया है कि आयोग ने पार्टी के भीतर चल रहे विवाद में ऐसे विधायकों के बयानों पर भरोसा किया जो खुद संविधान की दसवीं अनुसूची यानी दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता की कार्यवाही का सामना कर रहे हैं। ममता गुट का कहना है कि ऐसे बयानों को पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर फैसला लेने का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। अब इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत और आयोग के आदेश पर रोक की मांग की गई है। मामले को 21 सितंबर को तत्काल सुनवाई के लिए पेश किए जाने की संभावना बताई गई है।

दरअसल, चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को TMC के भीतर चल रहे संगठनात्मक विवाद के बीच एक अंतरिम आदेश जारी किया था। आयोग ने कहा कि जब तक दोनों गुटों के दावे पर अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक ममता बनर्जी और दूसरे गुट—दोनों को मूल TMC नाम और ‘फूल और घास’ चिन्ह इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी। आयोग के मुताबिक यह व्यवस्था दोनों पक्षों को बराबरी की स्थिति में रखने और उनके अधिकारों व हितों की रक्षा के लिए की गई है। यानी फिलहाल यह किसी एक गुट को मूल TMC का अंतिम मालिक घोषित करने वाला फैसला नहीं है।

इसके बाद शुक्रवार को चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह दे दिए। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिन्ह दिया गया। वहीं प्रतिद्वंद्वी गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चिन्ह आवंटित किया गया। ये नाम और चिन्ह आगामी उपचुनावों के संदर्भ में इस्तेमाल किए जाएंगे, जबकि मूल TMC नाम और चिन्ह पर विवाद अभी कानूनी और चुनावी प्रक्रिया के बीच बना हुआ है।

इस बीच इस पूरे विवाद ने कांग्रेस और ममता बनर्जी के बीच भी नया राजनीतिक समीकरण सामने ला दिया है। चुनाव आयोग के फैसले के बाद कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने ममता बनर्जी से फोन पर बात कर समर्थन जताया। इसके बाद ममता बनर्जी ने नंदीग्राम उपचुनाव में अपनी पार्टी का उम्मीदवार नहीं उतारने और कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया। इस फैसले को ममता ने विपक्षी एकजुटता से जोड़ा है।

लेकिन नंदीग्राम में कहानी यहीं नहीं रुकी। ममता के समर्थन की घोषणा के कुछ ही घंटे बाद कांग्रेस ने दावा किया कि उसके उम्मीदवार मिलन प्रधान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। कांग्रेस ने गिरफ्तारी के समय को लेकर सवाल उठाए और इसे राजनीतिक दबाव से जोड़ा। दूसरी ओर, उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक प्रधान के खिलाफ 2007 के नंदीग्राम आंदोलन से जुड़े पुराने मामले हैं और गिरफ्तारी एक पुराने हत्या मामले के सिलसिले में हुई। इसलिए गिरफ्तारी को सीधे राजनीतिक कार्रवाई कहना फिलहाल एक राजनीतिक आरोप है; इसका कानूनी आधार और अदालत में पुलिस की ओर से रखे गए तथ्य इस मामले में निर्णायक होंगे।

TMC के नाम और चिन्ह पर विवाद की पृष्ठभूमि में पार्टी के भीतर बड़ा विभाजन है। रिपोर्टों के अनुसार विधानसभा चुनाव में TMC की हार के बाद बड़ी संख्या में उसके नवनिर्वाचित विधायक ममता खेमे से अलग होकर दूसरे गुट के साथ चले गए। इसके बाद दोनों पक्षों ने पार्टी के संगठन, नाम और चुनाव चिन्ह पर अपना दावा पेश किया। चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों से दस्तावेज और दावे मांगे और फिर फिलहाल मूल नाम और चिन्ह को रोकने का अंतरिम फैसला किया।

अब इस पूरे मामले की अगली बड़ी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट में होगी। ममता बनर्जी का गुट चाहता है कि चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश पर रोक लगे और उसे TMC का मूल नाम तथा पारंपरिक चुनाव चिन्ह वापस मिले। दूसरी ओर आयोग के सामने दूसरे गुट का दावा भी लंबित है। इसलिए अदालत के सामने सिर्फ एक चुनाव चिन्ह का सवाल नहीं है, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण होगा कि पार्टी के संगठनात्मक नियंत्रण और दोनों गुटों के दावों को किस कानूनी आधार पर देखा जाए।

फिलहाल तस्वीर बेहद साफ है—एक तरफ चुनाव आयोग का अंतरिम फैसला, दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट में ममता की चुनौती; इसी बीच राहुल गांधी और ममता साथ दिखाई दे रहे हैं और नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार को TMC का समर्थन मिला है। अब 21 सितंबर की संभावित सुनवाई पर निगाहें रहेंगी। सुप्रीम कोर्ट का अगला कदम यह तय करने में महत्वपूर्ण होगा कि आगामी उपचुनावों में ममता गुट को पुराने नाम और चिन्ह के इस्तेमाल की कोई राहत मिलती है या नए नाम और चिन्ह के साथ ही चुनावी मैदान में उतरना पड़ेगा।

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