बिजनेस/राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 18 सितंबर 2026
भारतीय रेलवे में यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने के दावों के बीच स्टेशनों की सफाई और बुनियादी सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी CAG की रिपोर्ट के अनुसार, जिन 512 रेलवे स्टेशनों का निरीक्षण किया गया, उनमें से 491 स्टेशनों पर बायो-टॉयलेट में खामियां मिलीं या वे काम नहीं कर रहे थे। यानी जांच किए गए करीब 96 प्रतिशत स्टेशनों पर बायो-टॉयलेट की व्यवस्था ठीक नहीं मिली।
CAG की रिपोर्ट पर गुरुवार को Public Accounts Committee (PAC) की बैठक में चर्चा हुई। समिति ने रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं और साफ-सफाई की स्थिति को लेकर चिंता जताई। बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल ने की। समिति ने रेलवे से इस मामले में जवाब मांगा है और रेलवे मंत्रालय को एक महीने के भीतर अपनी प्रतिक्रिया देने का निर्देश दिया गया है।
बायो-टॉयलेट को रेलवे ने स्टेशनों और ट्रेनों में स्वच्छता व्यवस्था सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना था। इसका उद्देश्य सामान्य शौचालयों की तुलना में बेहतर स्वच्छता व्यवस्था उपलब्ध कराना और मानव अपशिष्ट को सीधे खुले में जाने से रोकना था। लेकिन CAG की जांच में बड़ी संख्या में इन शौचालयों के खराब या इस्तेमाल के लायक नहीं होने की बात सामने आई है।
आंकड़ों को आसान भाषा में समझें तो 512 स्टेशनों की जांच हुई और इनमें से 491 जगहों पर बायो-टॉयलेट से जुड़ी कोई न कोई बड़ी कमी मिली। यानी हर 100 जांचे गए स्टेशनों में लगभग 96 स्टेशनों पर व्यवस्था में समस्या पाई गई। यह आंकड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि रेलवे लंबे समय से स्टेशनों पर यात्रियों की सुविधाएं और स्वच्छता सुधारने के लिए कई योजनाएं चला रहा है।
PAC ने इस बात पर भी चिंता जताई कि रेलवे के सामने यात्रियों की सुविधाओं से जुड़ी ऐसी कमियां लंबे समय से उठाई जाती रही हैं। समिति के अनुसार, 2007 से ही कई टिप्पणियां और आपत्तियां सामने आती रही हैं, लेकिन इन समस्याओं का पूरी तरह समाधान नहीं हुआ। इससे यह सवाल उठता है कि जिन कमियों की जानकारी पहले से थी, उन्हें दूर करने के लिए रेलवे की ओर से कितनी प्रभावी कार्रवाई की गई।
रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों के लिए शौचालय, साफ पानी, साफ-सफाई और दूसरी बुनियादी सुविधाएं सीधे उनके रोजमर्रा के सफर से जुड़ी हैं। खासकर लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों, बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए इन सुविधाओं का महत्व और बढ़ जाता है। ऐसे में केवल नई सुविधाएं बनाने से ज्यादा जरूरी उनका नियमित रखरखाव और सही तरीके से संचालन है।
CAG की रिपोर्ट में सामने आई स्थिति यह सवाल भी खड़ा करती है कि किसी सुविधा के निर्माण के बाद उसकी नियमित निगरानी कितनी प्रभावी है। अगर कोई शौचालय बनाया गया लेकिन कुछ समय बाद वह बंद हो गया या उसमें जरूरी व्यवस्था काम नहीं कर रही है, तो यात्रियों को उसका वास्तविक लाभ नहीं मिल पाता। इसलिए रेलवे के लिए चुनौती केवल infrastructure बढ़ाने की नहीं, बल्कि पहले से मौजूद सुविधाओं को लगातार उपयोगी बनाए रखने की भी है।
PAC ने रेलवे मंत्रालय से रिपोर्ट पर जवाब देने को कहा है। अब रेलवे को यह बताना होगा कि बायो-टॉयलेट में मिली कमियों को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं और यात्रियों को बेहतर स्वच्छता सुविधा देने के लिए आगे की क्या योजना है।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारतीय रेलवे रोजाना करोड़ों यात्रियों को यात्रा की सुविधा देता है। इतने बड़े यात्री नेटवर्क में स्टेशन की साफ-सफाई और बुनियादी सुविधाओं का सीधा संबंध यात्रियों के अनुभव से है। नई ट्रेनें और आधुनिक स्टेशन जितने जरूरी हैं, उतना ही जरूरी यह भी है कि यात्रियों को हर स्टेशन पर साफ और काम करने वाली बुनियादी सुविधाएं मिलें।
CAG की रिपोर्ट में सामने आया 491 स्टेशनों का आंकड़ा रेलवे के सामने एक स्पष्ट चुनौती रखता है—सुविधाएं बनाने के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित करना होगा कि वे लंबे समय तक सही स्थिति में और यात्रियों के इस्तेमाल के लिए उपलब्ध रहें।



