अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | बीजिंग | 18 सितंबर 2026
अमेरिका और चीन के बीच अगले दौर की उच्चस्तरीय बातचीत की तैयारी तेज हो गई है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने गुरुवार को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर बातचीत की। इस दौरान दोनों देशों के बीच होने वाले आगामी उच्चस्तरीय संपर्क, आपसी रिश्तों और पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा हुई। यह बातचीत ऐसे समय हुई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की 24 सितंबर को प्रस्तावित मुलाकात से पहले दोनों देशों के बीच कूटनीतिक गतिविधियां बढ़ गई हैं।
चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, वांग यी ने रुबियो से कहा कि दोनों देशों को समानता, सम्मान और एक-दूसरे के हितों को ध्यान में रखते हुए अगले दौर की उच्चस्तरीय बातचीत के लिए अच्छी तरह तैयारी करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों के बीच बातचीत अमेरिका-चीन संबंधों का महत्वपूर्ण आधार है। चीन के अनुसार, दोनों देशों को आपसी संवाद मजबूत करना चाहिए, सहयोग बढ़ाना चाहिए, मतभेदों को संभालना चाहिए और एक-दूसरे के महत्वपूर्ण हितों का सम्मान करना चाहिए।
हालांकि, चीन के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बातचीत के आधिकारिक विवरण में ट्रंप और शी जिनपिंग की 24 सितंबर की मुलाकात की सीधे तौर पर पुष्टि नहीं की गई। बयान में केवल दोनों देशों के बीच होने वाले उच्चस्तरीय संपर्क पर विस्तार से चर्चा होने की बात कही गई है। ट्रंप पहले कह चुके हैं कि शी जिनपिंग 24 सितंबर को अमेरिका आएंगे और दोनों नेताओं की मुलाकात होगी।
अमेरिका और चीन के बीच पिछले कुछ समय से व्यापार, टैरिफ, तकनीक, सुरक्षा और दूसरे अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर मतभेद रहे हैं। ऐसे में दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की संभावित बैठक को इन मुद्दों पर बातचीत आगे बढ़ाने के एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है। दोनों पक्षों के बीच बातचीत का उद्देश्य किन मुद्दों पर सहमति बनाना है, यह आने वाले दिनों में और स्पष्ट हो सकता है।
वांग यी और रुबियो की बातचीत में पश्चिम एशिया की स्थिति भी शामिल रही। चीन इस समय ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव को कम करने के लिए बातचीत पर जोर दे रहा है। वांग यी ने एक दिन पहले ही बीजिंग में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से मुलाकात की थी।
ईरानी विदेश मंत्री के साथ बैठक में वांग यी ने ईरान और अमेरिका से संयम बरतने और बातचीत के रास्ते पर लौटने की अपील की थी। चीन ने दोनों देशों से जून में हुए अंतरिम शांति समझौते की ओर लौटने और गंभीर बातचीत शुरू करने की बात कही। इसके साथ ही चीन ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने की जरूरत पर भी जोर दिया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। यहां लंबे समय तक आवाजाही बाधित रहने से अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति और कीमतों पर असर पड़ सकता है। चीन दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक है, इसलिए इस क्षेत्र में जारी तनाव का उसकी ऊर्जा सुरक्षा पर भी सीधा असर पड़ता है।
इसी वजह से पश्चिम एशिया का संकट अमेरिका और चीन के बीच होने वाली बातचीत में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है। चीन जहां क्षेत्र में बातचीत और तनाव कम करने की अपील कर रहा है, वहीं अमेरिका की ईरान को लेकर नीति और सैन्य कार्रवाई के सवाल भी चर्चा में हैं।
वांग यी ने अमेरिका-चीन संबंधों को लेकर संवाद और सहयोग पर जोर दिया है। उनका कहना है कि दोनों देशों को अपने मतभेदों को संभालते हुए एक-दूसरे के महत्वपूर्ण हितों का सम्मान करना चाहिए। दूसरी ओर, अमेरिका और चीन के बीच कई मुद्दों पर मतभेद अभी भी बने हुए हैं। ऐसे में आने वाली उच्चस्तरीय बातचीत में केवल सहयोग के मुद्दे ही नहीं, बल्कि इन मतभेदों को कम करने के रास्तों पर भी चर्चा होने की संभावना है।
ट्रंप और शी जिनपिंग की प्रस्तावित मुलाकात से पहले वांग यी और मार्को रुबियो की बातचीत को दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संपर्क बढ़ने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि अगले सप्ताह होने वाली उच्चस्तरीय बातचीत में व्यापार, टैरिफ, पश्चिम एशिया और अमेरिका-चीन संबंधों से जुड़े मुद्दों पर क्या चर्चा होती है।



