राष्ट्रीय/व्यापार | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 16 सितंबर 2026
MDR को लेकर पेट्रोल पंप डीलरों में नाराज़गी
UPI भुगतान को लेकर देश में एक नई बहस शुरू हो गई है। ₹2,000 से अधिक के कुछ UPI मर्चेंट लेन-देन पर Merchant Discount Rate यानी MDR लागू किए जाने की प्रस्तावित व्यवस्था का पेट्रोल पंप डीलरों ने विरोध किया है। डीलरों ने चेतावनी दी है कि अगर पेट्रोल पंपों को MDR से राहत नहीं दी गई तो वे ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान स्वीकार करना बंद कर सकते हैं और ग्राहकों से कैश में भुगतान करने को कह सकते हैं।
इस विवाद का केंद्र पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर होने वाला डिजिटल भुगतान है। पेट्रोल पंप डीलरों का कहना है कि उनका कमीशन पहले से सीमित है और प्रत्येक डिजिटल लेन-देन पर अतिरिक्त शुल्क लगने से उनके कारोबार की लागत बढ़ेगी।
₹5 MDR का मुद्दा क्या है?
रिपोर्टों के मुताबिक, पेट्रोल और फ्यूल कैटेगरी में ₹2,000 से अधिक के UPI मर्चेंट भुगतान पर ₹5 का फ्लैट MDR लगाए जाने की व्यवस्था बताई गई है। हालांकि यह रकम सामान्य तौर पर ग्राहक से अलग से वसूल किया जाने वाला ‘UPI टैक्स’ नहीं है, बल्कि मर्चेंट पक्ष से जुड़ा शुल्क है।
यही वजह है कि पेट्रोल पंप डीलर इसका विरोध कर रहे हैं। उनका तर्क है कि पेट्रोल पंप पर होने वाले भुगतान की संख्या बहुत ज्यादा है और बड़ी संख्या में ग्राहक डिजिटल माध्यम से भुगतान करते हैं। ऐसे में हर पात्र लेन-देन पर MDR का बोझ जमा होकर कारोबार की लागत बढ़ा सकता है।
डीलरों ने दी UPI रोकने की चेतावनी
पेट्रोल पंप डीलरों के संगठनों ने कहा है कि अगर सरकार ने इस व्यवस्था में पेट्रोल पंपों को छूट नहीं दी तो वे ₹2,000 से ऊपर के UPI भुगतान स्वीकार नहीं करने का रास्ता अपना सकते हैं।
इसका सीधा असर उन ग्राहकों पर पड़ सकता है जो पेट्रोल-डीजल के भुगतान के लिए नकदी रखने के बजाय UPI पर निर्भर हैं। खासकर शहरों में छोटे-बड़े पेट्रोल पंपों पर डिजिटल भुगतान अब रोजमर्रा की व्यवस्था बन चुका है।
डीलरों की चिंता यह है कि यदि MDR का भुगतान उन्हें अपनी जेब से करना पड़ा तो सीमित मार्जिन वाले कारोबार में इसका असर मुनाफे पर पड़ेगा।
पेट्रोल पंपों पर डिजिटल भुगतान कितना महत्वपूर्ण?
UPI ने पेट्रोल पंपों पर भुगतान को काफी आसान बना दिया है। ग्राहक पेट्रोल भरवाने के बाद कुछ सेकंड में मोबाइल से भुगतान कर देता है। न कैश रखने की जरूरत और न ही खुले पैसे की समस्या।
लेकिन पेट्रोल पंप डीलरों का कहना है कि डिजिटल भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराने की लागत भी किसी न किसी पक्ष को उठानी पड़ती है। उनका कहना है कि पेट्रोल पंपों के कम मार्जिन को देखते हुए MDR का अतिरिक्त बोझ उचित नहीं है।
सरकार से राहत की मांग
ऑल इंडिया पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन सहित डीलर संगठनों ने सरकार से मांग की है कि पेट्रोल पंपों को MDR के दायरे से बाहर रखा जाए।
डीलरों का कहना है कि ईंधन बिक्री आवश्यक सेवा से जुड़ी है और यहां डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, न कि ऐसा शुल्क लगाया जाना चाहिए जिससे कारोबारी डिजिटल भुगतान स्वीकार करने से पीछे हटें।
ग्राहक के लिए क्या बदलेगा?
अगर पेट्रोल पंपों की चेतावनी वास्तव में लागू होती है तो ₹2,000 से अधिक का पेट्रोल या डीजल भुगतान करने वाले ग्राहकों को परेशानी हो सकती है। उन्हें कैश, कार्ड या भुगतान के दूसरे विकल्प का इस्तेमाल करना पड़ सकता है।
हालांकि फिलहाल इसे डीलरों की चेतावनी और विरोध के रूप में देखना जरूरी है। सभी पेट्रोल पंपों पर UPI बंद हो जाएगा, ऐसा निष्कर्ष अभी निकालना जल्दबाजी होगी। अंतिम स्थिति संबंधित नियमों और सरकार तथा डीलर संगठनों के बीच होने वाली बातचीत पर निर्भर करेगी।
UPI के सामने नया सवाल
UPI को भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की बड़ी सफलता माना जाता है। छोटे दुकानदार से लेकर पेट्रोल पंप तक करोड़ों कारोबारी डिजिटल भुगतान स्वीकार कर रहे हैं।
ऐसे में MDR को लेकर पेट्रोल पंप डीलरों का विरोध एक बड़ा सवाल खड़ा करता है—क्या डिजिटल भुगतान की लागत कारोबारियों पर डाली जाए या ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे UPI की सुविधा भी बनी रहे और छोटे मार्जिन वाले कारोबार पर अतिरिक्त बोझ भी न पड़े?
फिलहाल पेट्रोल पंप डीलरों की चेतावनी साफ है—₹2,000 से ऊपर UPI भुगतान पर MDR लागू हुआ तो वे कैश भुगतान की ओर लौटने पर विचार कर सकते हैं।



