अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | मक्का/ रियाद | 16 सितंबर 2026
मक्का की ओर बढ़ रहे ड्रोन को सऊदी डिफेंस ने रोका
पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के बीच सऊदी अरब से बेहद गंभीर खबर सामने आई है। सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन के अनुसार, 15 सितंबर की शाम मक्का के दक्षिण में एक हूती ड्रोन को सऊदी एयर डिफेंस ने इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया। सऊदी गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मल्की के मुताबिक, ड्रोन को शाम करीब 6:50 बजे रोका गया और वह मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में दाखिल होने से पहले ही नष्ट कर दिया गया।
सऊदी अरब ने कहा—मक्का की सुरक्षा ‘रेड लाइन’
तुर्की अल-मल्की ने मक्का और दोनों पवित्र मस्जिदों की सुरक्षा को “रेड लाइन” बताया है। उन्होंने कहा कि सऊदी गठबंधन हूती हमलों को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाएगा। मक्का इस्लाम का सबसे पवित्र शहर है और हर साल हज तथा उमरा के लिए दुनिया भर से लाखों मुसलमान यहां पहुंचते हैं। ऐसे में पवित्र शहर के आसपास किसी ड्रोन का पहुंचना केवल सैन्य घटना नहीं, बल्कि धार्मिक स्थलों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा से जुड़ा बेहद संवेदनशील मामला है।
2017 के बाद मक्का को लेकर दूसरी ऐसी कोशिश का दावा
सऊदी गठबंधन के अनुसार, यह मक्का को निशाना बनाने की दूसरी हूती कोशिश है। पहली घटना जुलाई 2017 की बताई गई है, जब सऊदी अधिकारियों ने एक बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च को मक्का की ओर लक्षित बताया था। इस बार ड्रोन को मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले ही रोकने का दावा किया गया है।
हालांकि, इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि हूतियों ने मक्का को निशाना बनाने के सऊदी आरोप से इनकार किया है। हूती प्रवक्ता हाज़ेम अल-असद ने इस दावे को झूठ बताया और कहा कि उनका संगठन पवित्र स्थलों को निशाना नहीं बनाता। इसलिए ड्रोन का मक्का की ओर जाना और उसका अंतिम उद्देश्य फिलहाल सऊदी पक्ष के दावे और हूती पक्ष के इनकार के बीच विवादित है।
पूरे सऊदी अरब में सुरक्षा अलर्ट का माहौल
यह घटना ऐसे समय हुई है जब सऊदी अरब के कई शहरों में पिछले दिनों हवाई हमलों को लेकर सुरक्षा अलर्ट जारी किए गए। 15 सितंबर को सऊदी सिविल डिफेंस ने जेद्दा, अब्हा, जाज़ान, अल-उला, ताइफ और यनबू समेत छह इलाकों में खतरे की चेतावनी के बाद बाद में ऑल-क्लियर जारी किया। यनबू खास तौर पर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह लाल सागर का प्रमुख तेल बंदरगाह है, जहां से रोजाना बड़ी मात्रा में तेल लोड किया जाता है।
दक्षिणी सऊदी शहरों पर पहले भी हुए हमले
मक्का के पास ड्रोन की यह घटना अचानक नहीं हुई। पिछले दिनों हूतियों ने सऊदी अरब के दक्षिणी इलाकों में मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। 8 सितंबर के हमलों में अब्हा, खमिस मुशैत और जाज़ान जैसे इलाकों में 73 लोगों के घायल होने और तेल से जुड़े ढांचे को नुकसान पहुंचने की रिपोर्ट आई थी। इसके बाद सऊदी अरब ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था और हवाई निगरानी बढ़ाई।
यमन में हूती बढ़त ने बढ़ाई चिंता
इस पूरे घटनाक्रम का एक और बड़ा पहलू यमन में हूती लड़ाकों की बढ़ती सैन्य गतिविधि है। हाल के दिनों में हूतियों ने यमन के लाल सागर तट के कुछ रणनीतिक हिस्सों पर अपना नियंत्रण बढ़ाया है। रिपोर्टों में मोखा बंदरगाह और बाब-अल-मंदब के आसपास के इलाकों को लेकर भी हूती बढ़त की जानकारी सामने आई है। बाब-अल-मंदब दुनिया की महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक गलियों में से एक है।
बाब-अल-मंदब पर दबाव का मतलब तेल और व्यापार पर असर
बाब-अल-मंदब की अहमियत इसलिए बहुत ज्यादा है क्योंकि यह लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और एशिया-यूरोप के समुद्री व्यापार के लिए महत्वपूर्ण रास्ता है। पहले से ही हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में संकट के कारण ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव है। ऐसे में लाल सागर और बाब-अल-मंदब में भी गंभीर अस्थिरता पैदा होती है तो तेल, जहाजों के बीमा, माल ढुलाई और वैश्विक सप्लाई चेन पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
सऊदी अरब के लिए अब चुनौती सिर्फ सीमा की नहीं
सऊदी अरब के सामने अब एक साथ कई सुरक्षा चुनौतियां दिखाई दे रही हैं—दक्षिणी शहरों पर ड्रोन और मिसाइल हमले, यमन में हूती गतिविधियां, लाल सागर में बढ़ता खतरा और मक्का जैसे अत्यंत संवेदनशील धार्मिक केंद्र के आसपास हवाई सुरक्षा।
यही वजह है कि सऊदी नेतृत्व मक्का और मदीना की सुरक्षा को सामान्य सैन्य लक्ष्य से अलग मान रहा है। गठबंधन ने साफ कहा है कि दोनों पवित्र मस्जिदों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
OIC ने भी घटना की निंदा की
मक्का से जुड़ी इस घटना के बाद ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन यानी OIC ने भी हमले की निंदा की और सऊदी अरब के साथ एकजुटता जताई। 57 मुस्लिम-बहुल देशों वाले इस संगठन ने पवित्र स्थलों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की। हालांकि, यहां भी यह ध्यान रखना जरूरी है कि OIC की निंदा सऊदी पक्ष के दावे के आधार पर हुई है, जबकि हूती पक्ष ने मक्का को निशाना बनाने से इनकार किया है।
हूती-सऊदी संघर्ष अब बड़े क्षेत्रीय संकट का हिस्सा
यमन का संघर्ष अब केवल सऊदी अरब और हूतियों के बीच पुराना विवाद नहीं रह गया है। पश्चिम एशिया में ईरान, अमेरिका और दूसरे क्षेत्रीय पक्षों के बीच बढ़ते तनाव ने इस संघर्ष को और संवेदनशील बना दिया है। हूतियों के ईरान के साथ करीबी संबंध हैं, जबकि सऊदी अरब अमेरिका का महत्वपूर्ण क्षेत्रीय साझेदार है। इसलिए यमन में बढ़ती लड़ाई का असर व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है।
हूतियों ने मक्का को निशाना बनाया या नहीं—सबसे बड़ा सवाल यही
इस घटना की सबसे अहम बात यही है कि सऊदी गठबंधन कह रहा है कि ड्रोन मक्का की ओर था, जबकि हूती इस आरोप को खारिज कर रहे हैं। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि हूतियों ने निश्चित रूप से मक्का को निशाना बनाया था। लेकिन इतना साफ है कि ड्रोन मक्का के दक्षिण तक पहुंचा और सऊदी एयर डिफेंस ने उसे प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में दाखिल होने से पहले नष्ट करने का दावा किया है।
अब सऊदी अरब के अगले कदम पर दुनिया की नजर
मक्का को लेकर सऊदी अरब का संदेश बेहद कड़ा है—“रेड लाइन”। अगर ऐसे हमले दोबारा होते हैं तो रियाद की प्रतिक्रिया क्या होगी, यह पूरे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण होगा। पहले से ही यमन के लाल सागर तट और बाब-अल-मंदब में तनाव बढ़ रहा है और सऊदी ऊर्जा ढांचे पर हमलों ने चिंता बढ़ाई है।
मक्का के आसमान तक खतरे की आहट पहुंचना पश्चिम एशिया के इस युद्ध का बेहद संवेदनशील मोड़ है। सवाल अब सिर्फ यह नहीं कि ड्रोन किसने भेजा—सवाल यह है कि क्या मक्का और मदीना जैसे पवित्र शहरों को इस बढ़ते क्षेत्रीय संघर्ष से सुरक्षित रखा जा सकेगा? और अगर पवित्र स्थलों की “रेड लाइन” दोबारा पार करने की कोशिश हुई, तो सऊदी अरब की अगली कार्रवाई कितनी बड़ी होगी?



