राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 15 सितंबर 2026
कांग्रेस संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी
कांग्रेस अब अपने संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की तैयारी में जुट गई है। पार्टी के अंदर एआईसीसी सचिवों के स्तर पर बड़ा फेरबदल होने जा रहा है और मौजूदा सचिवों में करीब आधे नेताओं को जिम्मेदारी से हटाया जा सकता है। इस पूरी प्रक्रिया में कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल सीधे तौर पर शामिल हैं। तीनों नेताओं ने पिछले करीब एक सप्ताह में लगभग 130 संभावित नेताओं के इंटरव्यू लिए हैं।
130 नेताओं से पूछे गए तीखे सवाल
इन इंटरव्यू का मकसद केवल पद बांटना नहीं था। संभावित नेताओं से यह समझने की कोशिश की गई कि वे पार्टी को जमीन पर कैसे मजबूत कर सकते हैं। खास तौर पर उन राज्यों को लेकर सवाल किए गए जहां कांग्रेस का प्रदर्शन कमजोर रहा है या जहां आने वाले समय में विधानसभा चुनाव होने हैं। नेताओं से पूछा गया कि अगर उन्हें किसी ऐसे राज्य की जिम्मेदारी दी जाए जहां कांग्रेस लगातार कमजोर होती गई है, तो वे पार्टी को दोबारा खड़ा कैसे करेंगे, कार्यकर्ताओं को कैसे जोड़ेंगे और चुनावी संगठन को कैसे मजबूत बनाएंगे।
राहुल-प्रियंका खुद कर रहे हैं संगठन की पड़ताल
इस पूरी कवायद की सबसे खास बात यह है कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी खुद संभावित नेताओं को परख रहे हैं। यह संकेत है कि कांग्रेस अब संगठन में केवल पुराने अनुभव के आधार पर जिम्मेदारी देने के बजाय काम करने की क्षमता, जमीन से जुड़ाव और चुनावी रणनीति को ज्यादा महत्व देना चाहती है। संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल भी इस प्रक्रिया में उनके साथ रहे।
मौजूदा सचिवों का भी होगा हिसाब
मंगलवार को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी मौजूदा एआईसीसी सचिवों के साथ बैठक करने वाले हैं। इस बैठक में उनके कामकाज की समीक्षा की जाएगी और उन्हें फीडबैक दिया जाएगा। इसके बाद संगठन में बदलाव का रास्ता और साफ हो सकता है। सूत्रों के अनुसार, मौजूदा एआईसीसी सचिवों में करीब 50 प्रतिशत नेताओं को उनकी जिम्मेदारियों से हटाया जा सकता है।
कांग्रेस क्यों कर रही है इतना बड़ा बदलाव?
कांग्रेस के लिए यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कई राज्यों में पार्टी को संगठनात्मक कमजोरी, कार्यकर्ताओं की निष्क्रियता और चुनावी स्तर पर कमजोर तैयारी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। केवल बड़े नेताओं के भाषण और चुनाव के समय प्रचार से चुनाव नहीं जीते जाते। बूथ से लेकर जिला स्तर तक मजबूत संगठन जरूरी है। ऐसे में पार्टी अब यह देखने की कोशिश कर रही है कि कौन नेता सिर्फ पद संभाल सकता है और कौन वास्तव में संगठन को जमीन पर खड़ा कर सकता है।
नई टीम में युवा और सक्रिय चेहरों को जगह?
करीब 130 नेताओं के इंटरव्यू से यह संकेत भी मिल रहा है कि कांग्रेस संगठन में नए चेहरों को बड़ी जिम्मेदारी देने की तैयारी कर रही है। अगर मौजूदा सचिवों में करीब आधे को हटाया जाता है, तो बड़ी संख्या में नए नेताओं के लिए रास्ता खुलेगा। हालांकि अंतिम सूची और किस नेता को कौन सी जिम्मेदारी मिलेगी, इसकी आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है।
कमजोर राज्यों पर खास नजर
इंटरव्यू में संभावित नेताओं से राज्यवार रणनीति पर सवाल किया जाना इस बदलाव का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। कांग्रेस यह समझना चाहती है कि कोई नेता किसी राज्य में जाकर सिर्फ पार्टी कार्यालय चलाएगा या कार्यकर्ताओं के बीच जाकर संगठन को दोबारा सक्रिय कर पाएगा। खासकर उन राज्यों में जहां चुनाव नजदीक हैं या जहां कांग्रेस का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है, वहां नई टीम की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो सकती है।
राहुल-प्रियंका की टीम में बदलाव का संदेश
कांग्रेस के भीतर यह फेरबदल सिर्फ कुछ सचिवों को हटाने या नए नेताओं को नियुक्त करने की प्रक्रिया नहीं है। इसके पीछे बड़ा संदेश यह है कि पार्टी अपने संगठन को चुनावी जरूरतों के हिसाब से बदलना चाहती है। राहुल गांधी लगातार संगठन को मजबूत करने, युवाओं को आगे लाने और जमीनी स्तर पर पार्टी को सक्रिय करने की जरूरत पर जोर देते रहे हैं। अब यह देखना होगा कि नई नियुक्तियों के बाद इस सोच को कितनी तेजी से जमीन पर उतारा जाता है।
अब असली सवाल—चेहरे बदलेंगे या कांग्रेस की किस्मत भी?
आधे सचिवों को हटाने से संगठन में नए चेहरे जरूर आएंगे, लेकिन असली चुनौती केवल चेहरा बदलना नहीं है। कांग्रेस को कार्यकर्ताओं में भरोसा पैदा करना होगा, राज्यों में मजबूत नेतृत्व तैयार करना होगा और चुनाव से बहुत पहले बूथ स्तर तक अपनी मशीनरी सक्रिय करनी होगी।
130 नेताओं के इंटरव्यू के बाद अब कांग्रेस की नई टीम तैयार होने वाली है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की यह संगठनात्मक कवायद कांग्रेस में सिर्फ बड़ा फेरबदल करेगी, या सचमुच कमजोर पड़े संगठन में नई जान फूंककर पार्टी को चुनावी मैदान में पहले से ज्यादा मजबूत बना पाएगी?



