राजनीति/ राजस्थान | ABC NATIONAL NEWS | जयपुर | 14 सितंबर 2026
BJP आगे, लेकिन तस्वीर एकतरफा नहीं
राजस्थान के शहरी निकाय चुनावों की मतगणना ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। 10,244 वार्डों में से 8,787 वार्डों के नतीजे घोषित होने तक बीजेपी ने 3,587 वार्डों में जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस को 3,050 वार्डों में जीत मिली। सबसे खास बात यह है कि निर्दलीयों ने भी 2,024 वार्ड जीतकर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। यानी बीजेपी आगे जरूर है, लेकिन कई बड़े शहरों और राजनीतिक गढ़ों में कांग्रेस ने भी बीजेपी को जोरदार चुनौती दी है।
जयपुर में BJP की बढ़त, कांग्रेस ने उठाए सवाल
राजधानी जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों में मतगणना जारी है। उपलब्ध नतीजों में बीजेपी 108 घोषित वार्डों में 57 सीटें जीत चुकी थी, जबकि कांग्रेस ने 40 सीटें हासिल की थीं और 11 सीटें अन्य उम्मीदवारों के खाते में गईं। इसी बीच कांग्रेस नेताओं ने जिला कलेक्टर से मुलाकात कर कुछ नतीजों को लेकर आपत्ति जताई। कांग्रेस विधायक दल के मुख्य सचेतक रफीक खान ने कहा कि सोशल मीडिया पर कुछ सीटों को लेकर गलत जानकारी दिखाई जा रही है और जहां भी अंतर की शिकायत है, वहां दोबारा जांच की जानी चाहिए।
कांग्रेस का आरोप—सरकारी मशीनरी का दबाव
राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने मतगणना के बीच बीजेपी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि कई इलाकों से ऐसी शिकायतें मिल रही हैं जहां करीबी मुकाबले वाली सीटों पर दबाव बनाया जा रहा है और कांग्रेस तथा निर्दलीय पार्षदों को बीजेपी के पक्ष में जाने के लिए प्रभावित किया जा रहा है। डोटासरा ने पुलिस और प्रशासन के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया और कहा कि अगर जनादेश को प्रभावित करने की कोशिश हुई तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। इन आरोपों पर बीजेपी या राज्य सरकार की तत्काल प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
गहलोत ने भी लगाया पुलिस के दुरुपयोग का आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी बीजेपी पर पुलिस के इस्तेमाल का आरोप लगाया। गहलोत के मुताबिक, निकाय चुनाव में बीजेपी को चार नगर निगमों—पाली, बीकानेर, अजमेर और भरतपुर—में हार का सामना करना पड़ा है और अब वह जोधपुर तथा अलवर में मेयर चुनाव के लिए निर्दलीय और कांग्रेस पार्षदों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। गहलोत ने पुलिस और जिला प्रशासन से निष्पक्ष भूमिका निभाने की अपील की। यह आरोप भी कांग्रेस नेताओं की ओर से लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
Jhalawar में Vasundhara Raje के गढ़ में Congress का बड़ा प्रदर्शन
सबसे बड़ा राजनीतिक झटका पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी की वरिष्ठ नेता वसुंधरा राजे के प्रभाव वाले झालावाड़ में दिखाई दिया। झालावाड़ नगर परिषद के 25 में से 18 वार्ड कांग्रेस ने जीत लिए, जबकि बीजेपी को केवल सात वार्ड मिले। इसी जिले की झालरापाटन नगरपालिका में तस्वीर अलग रही, जहां बीजेपी ने 20 में से 11 वार्ड जीतकर बहुमत हासिल किया। कांग्रेस को छह और निर्दलीयों को तीन सीटें मिलीं।
Sikar में Dotasra के गढ़ में Congress की मजबूत वापसी
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के मजबूत क्षेत्र सीकर में भी कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन किया। 65 वार्डों में कांग्रेस ने 38 सीटें जीतीं, जबकि बीजेपी को 22 सीटें मिलीं। चार सीटें निर्दलीयों और एक सीट आरएलपी के खाते में गई। यह परिणाम कांग्रेस के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उसके प्रदेश अध्यक्ष के राजनीतिक प्रभाव वाले क्षेत्र में मजबूत संगठन और जनसमर्थन का संकेत देता है।
Ajmer और Pali में भी Congress का पलड़ा भारी
अजमेर नगर निगम के 80 वार्डों में कांग्रेस ने 37 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी का स्थान हासिल किया। बीजेपी को 32 और निर्दलीयों को 11 सीटें मिलीं। वहीं पाली नगर निगम के 65 वार्डों में कांग्रेस ने 29 सीटें जीतीं, बीजेपी को 21 और निर्दलीयों को 15 सीटें मिलीं। पाली बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ का गृह क्षेत्र है, इसलिए यहां कांग्रेस का प्रदर्शन बीजेपी के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भरतपुर ने सबको चौंकाया
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह क्षेत्र भरतपुर में चुनावी तस्वीर और भी अलग रही। यहां निर्दलीयों ने 65 में से 36 वार्डों में जीत या बढ़त हासिल की, जबकि बीजेपी 20 और कांग्रेस सिर्फ सात वार्डों में रही। इससे साफ है कि स्थानीय निकाय चुनाव में मतदाता हमेशा सीधे बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही नहीं बंटे और कई जगह स्थानीय उम्मीदवारों ने दोनों बड़े दलों को चुनौती दी।
Udaipur में BJP की शानदार जीत
जहां कांग्रेस ने कई बड़े क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शन किया, वहीं उदयपुर में बीजेपी ने साफ बढ़त बनाई। 80 सदस्यीय नगर निगम में बीजेपी ने 53 वार्ड जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। कांग्रेस को 23, निर्दलीयों को तीन और माकपा को एक सीट मिली। यानी राजस्थान की चुनावी तस्वीर पूरी तरह किसी एक पार्टी के पक्ष में नहीं है। कहीं बीजेपी मजबूत है, तो कहीं कांग्रेस और कई जगह निर्दलीय निर्णायक भूमिका में हैं।
Baran में AAP का बड़ा धमाका
राजस्थान के बारां में आम आदमी पार्टी ने बड़ा उलटफेर करते हुए 60 में से 31 वार्ड जीत लिए और स्पष्ट बहुमत हासिल किया। कांग्रेस को 18 और बीजेपी को केवल नौ सीटें मिलीं। यह परिणाम यह भी दिखाता है कि राजस्थान के शहरी क्षेत्रों में सिर्फ बीजेपी और कांग्रेस ही चुनावी ताकत नहीं हैं। स्थानीय मुद्दों और उम्मीदवारों के आधार पर तीसरी राजनीतिक ताकत भी जगह बना सकती है।
BJP उम्मीदवार को सिर्फ एक वोट
इसी चुनाव में एक नतीजे ने सबका ध्यान खींच लिया। परबतसर नगरपालिका के वार्ड 13 से बीजेपी उम्मीदवार कैलाशचंद को सिर्फ एक वोट मिला। कांग्रेस की हिना खानम ने 376 और निर्दलीय राशिद खान ने 195 वोट हासिल किए। कैलाशचंद ने बताया कि वह वार्ड 12 के मतदाता हैं, लेकिन पार्टी ने उन्हें वार्ड 13 से चुनाव लड़ाया था। परबतसर के 25 वार्डों में कांग्रेस ने 13 और बीजेपी ने 12 सीटें जीतीं।
मेयर चुनाव अब अगली बड़ी परीक्षा
राजस्थान के 309 शहरी निकायों में पार्षद चुनाव के बाद अब अगली बड़ी लड़ाई मेयर और अध्यक्ष पदों की होगी। इन पदों के चुनाव 21 सितंबर को होंगे, जबकि उपमहापौर और उपाध्यक्ष समेत अन्य पदों के चुनाव 22 सितंबर को होने हैं। ऐसे में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है। कई नगर निकायों में बोर्ड बनाने के लिए बीजेपी और कांग्रेस दोनों को निर्दलीयों का समर्थन लेना पड़ सकता है।
2028 से पहले BJP सरकार की बड़ी परीक्षा
इन निकाय चुनावों को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार के लिए 2028 विधानसभा चुनाव से पहले एक महत्वपूर्ण राजनीतिक परीक्षा माना जा रहा है। बीजेपी ने राज्य स्तर पर बढ़त जरूर बनाई है, लेकिन कांग्रेस ने झालावाड़, सीकर, अजमेर और पाली जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी ताकत दिखाई है। वहीं निर्दलीयों और आम आदमी पार्टी के प्रदर्शन ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।
अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि बीजेपी कितने वार्ड जीती और कांग्रेस कितने। असली सवाल यह है कि 2028 से पहले राजस्थान की जमीन पर जनता का मूड किस तरफ जा रहा है? क्या बीजेपी की राज्यव्यापी बढ़त सत्ता के लिए मजबूत संकेत है, या झालावाड़, सीकर, अजमेर और पाली जैसे नतीजे कांग्रेस की वापसी की कहानी लिख रहे हैं? और मेयर चुनाव में निर्दलीय पार्षद आखिर किसका खेल बनाएंगे—बीजेपी का या कांग्रेस का?



