राष्ट्रीय/ व्यापार | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 13 सितंबर 2026
कूचा महाजनी में एमसीडी की बड़ी कार्रवाई
दिल्ली के सबसे बड़े और पुराने कारोबारी इलाकों में शामिल चांदनी चौक के कूचा महाजनी इलाके में एमसीडी ने कम से कम 56 आभूषण और सर्राफा दुकानों को सील कर दिया। यह कार्रवाई 10 सितंबर को की गई। कार्रवाई के बाद कारोबारियों में भारी नाराजगी है। व्यापारियों का कहना है कि दुकानों के अंदर करोड़ों रुपये कीमत के सोने और चांदी के आभूषण रखे हुए थे और अचानक सीलिंग होने से उनका कारोबार और कीमती सामान दोनों प्रभावित हुए हैं। हालांकि, एमसीडी की ओर से तत्काल इस कार्रवाई पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
सत्य निकेतन हादसे के बाद बढ़ी कार्रवाई
चांदनी चौक में हुई यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब दिल्ली नगर निगम ने सत्य निकेतन इमारत हादसे के बाद शहरभर में खतरनाक और नियमों के खिलाफ चल रही इमारतों पर कार्रवाई तेज की है। सत्य निकेतन में इमारत गिरने से सात लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद दिल्ली में अलग-अलग इलाकों में इमारतों की सुरक्षा, बेसमेंट के इस्तेमाल और निर्माण नियमों के पालन को लेकर जांच और कार्रवाई बढ़ाई गई है। चांदनी चौक में हुई सीलिंग को भी इसी व्यापक कार्रवाई से जोड़कर देखा जा रहा है।
कारोबारियों का दावा—नोटिस पहले का, कार्रवाई अचानक
ऑल इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश सिंघल के अनुसार, दुकानों पर नोटिस चस्पा किए गए थे और गुरुवार सुबह करीब 11:30 बजे सीलिंग की कार्रवाई शुरू हुई। कारोबारियों का दावा है कि उन्हें कार्रवाई के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला। उनका यह भी कहना है कि कुछ दुकानों पर लगाए गए नोटिस पुरानी तारीख के थे। एसोसिएशन ने जिस नोटिस को साझा किया, उस पर 12 मई 2026 की तारीख दर्ज थी। इस नोटिस में संबंधित संपत्ति के बेसमेंट के कथित दुरुपयोग को रोकने और परिसर को मास्टर प्लान-2021 के तहत अनुमत उपयोग में लाने के लिए 48 घंटे का समय देने की बात लिखी थी।
बेसमेंट के इस्तेमाल पर है मुख्य विवाद
नोटिस में मुख्य मुद्दा संपत्ति के बेसमेंट के इस्तेमाल को बताया गया है। एमसीडी के नोटिस में निर्देश दिया गया था कि बेसमेंट का ऐसा इस्तेमाल रोका जाए जो नियमों के तहत अनुमति प्राप्त उपयोग से बाहर है। साथ ही परिसर को मास्टर प्लान-2021 के तहत अनुमत उपयोग के दायरे में लाने को कहा गया था। यदि ऐसा नहीं किया जाता तो व्यावसायिक गतिविधि के लिए परिसर को सील किए जाने की बात नोटिस में कही गई थी। यानी कार्रवाई के पीछे मुख्य सवाल सिर्फ दुकान चलाने का नहीं, बल्कि इमारत के बेसमेंट और उसके उपयोग के नियमों का पालन है।
कारोबारियों का आरोप—एमसीडी और पुलिस अचानक पहुंची
व्यापारियों का आरोप है कि एमसीडी और पुलिस की टीम कूचा महाजनी पहुंची और कई इमारतों में दुकानों पर नोटिस चस्पा करने के बाद सीलिंग की कार्रवाई की गई। कारोबारियों का कहना है कि अगर नियमों का उल्लंघन था तो उन्हें पहले स्पष्ट सूचना, समय और अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर दिया जाना चाहिए था। हालांकि, इन आरोपों पर एमसीडी की तरफ से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। इसलिए फिलहाल व्यापारियों के आरोप और एमसीडी की कार्रवाई—दोनों पहलुओं को अलग-अलग देखना जरूरी है।
दुकानों के अंदर करोड़ों का सोना-चांदी होने का दावा
सील की गई दुकानों को लेकर सबसे बड़ी चिंता कारोबारियों के पास रखे कीमती सामान की है। एसोसिएशन और व्यापारियों का दावा है कि कई दुकानों के अंदर करोड़ों रुपये मूल्य के सोने और चांदी के आभूषण मौजूद थे। सीलिंग के बाद कारोबारियों के सामने यह सवाल है कि अंदर रखा माल कब और किस प्रक्रिया के तहत बाहर निकाला जा सकेगा। हालांकि, कुल कितनी कीमत का सोना-चांदी दुकानों के अंदर था, इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है।
व्यापारियों ने पूछा—सिर्फ दुकानदारों पर ही कार्रवाई क्यों?
ऑल इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन ने इस कार्रवाई के साथ एक बड़ा सवाल भी उठाया है। एसोसिएशन का कहना है कि अगर दिल्ली में खतरनाक और नियमों का उल्लंघन करने वाली इमारतों के खिलाफ कार्रवाई हो रही है, तो क्या इसका असर केवल कारोबारियों पर ही पड़ेगा या संबंधित सरकारी विभागों और जिम्मेदार नेताओं की जवाबदेही भी तय होगी? यह सवाल सत्य निकेतन हादसे के बाद और महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि उस हादसे ने दिल्ली में इमारतों की सुरक्षा और सरकारी निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
नियमों का पालन जरूरी, लेकिन कार्रवाई की प्रक्रिया भी सवालों में
यह साफ है कि अगर किसी इमारत या बेसमेंट का इस्तेमाल नियमों के खिलाफ हो रहा है तो नगर निगम को कार्रवाई करने का अधिकार है। लेकिन दूसरी तरफ, व्यापारियों का यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि क्या कार्रवाई से पहले पर्याप्त और स्पष्ट सूचना दी गई थी? अगर नोटिस मई का था और सीलिंग सितंबर में हुई, तो इस पूरे समय के दौरान संबंधित कारोबारियों को क्या निर्देश दिए गए, उन्होंने उनका पालन किया या नहीं, और कार्रवाई से पहले उन्हें अपनी बात रखने का कितना मौका मिला—इन सवालों के जवाब सामने आना जरूरी है।
चांदनी चौक में कार्रवाई का असर बड़ा हो सकता है
कूचा महाजनी दिल्ली का प्रमुख सर्राफा बाजार है। यहां बड़ी संख्या में आभूषण और सर्राफा कारोबार से जुड़े व्यापारी काम करते हैं। ऐसे इलाके में एक साथ 56 दुकानों की सीलिंग का असर केवल दुकानदारों तक सीमित नहीं रह सकता। कर्मचारियों, ग्राहकों, छोटे कारोबारियों और पूरे बाजार की गतिविधियों पर इसका असर पड़ सकता है। इसलिए अब व्यापारियों और एमसीडी के बीच नियमों, नोटिस और आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट होना बेहद जरूरी है।
अब एमसीडी के जवाब का इंतजार
फिलहाल इस मामले में सबसे जरूरी सवाल एमसीडी के आधिकारिक पक्ष से जुड़े हैं—56 दुकानों को सील करने का सटीक आधार क्या था? कितने परिसरों में बेसमेंट के नियमों का उल्लंघन पाया गया? मई में जारी नोटिस के बाद क्या कारोबारियों को अतिरिक्त समय या सुनवाई का मौका दिया गया? और सील दुकानों के अंदर मौजूद करोड़ों रुपये के आभूषणों को लेकर आगे की प्रक्रिया क्या होगी?
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में नियमों के खिलाफ इमारतों पर कार्रवाई जरूरी है, लेकिन कार्रवाई जितनी सख्त हो, उतनी ही पारदर्शी भी होनी चाहिए। अब सवाल यही है—चांदनी चौक में हुई 56 दुकानों की सीलिंग क्या दिल्ली में सुरक्षा नियमों को लागू करने की बड़ी शुरुआत है, या कारोबारियों और प्रशासन के बीच एक नए टकराव की शुरुआत?



