ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 13 सितंबर 2026
सुबह 4 बजे तक चली बातचीत, फिर बनी बात
नई दिल्ली में चल रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत ने एक बड़ी कूटनीतिक सफलता हासिल की है। कई संवेदनशील मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच मतभेद के बावजूद 45 पन्नों और 140 बिंदुओं वाली नई दिल्ली घोषणा-2026 को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन में घोषणा करते हुए कहा कि किसी भी सदस्य देश ने आपत्ति नहीं जताई और घोषणा को सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया। इस सहमति तक पहुंचना आसान नहीं था। रिपोर्टों के मुताबिक, बातचीत और समझौते की कोशिशें शनिवार सुबह करीब 4 बजे तक चलती रहीं। खास तौर पर पश्चिम एशिया के संघर्ष को लेकर ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच अलग-अलग रुख को देखते हुए भारत के सामने सभी देशों को एक साथ लाने की बड़ी चुनौती थी।
आतंकवाद पर ब्रिक्स का सख्त संदेश
नई दिल्ली घोषणा में आतंकवाद के खिलाफ बेहद स्पष्ट रुख अपनाया गया है। ब्रिक्स देशों ने हर तरह के आतंकवाद, सीमा पार आतंकवाद, आतंकवाद के लिए आर्थिक मदद और आतंकवादियों को सुरक्षित ठिकाने देने की कड़ी निंदा की। घोषणा में 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले की भी कड़े शब्दों में निंदा की गई, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी। ब्रिक्स ने आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की बात कही और आतंकवाद से जुड़े लोगों को जवाबदेह बनाने पर जोर दिया। साथ ही संयुक्त राष्ट्र में लंबे समय से अटकी अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक संधि को जल्द अपनाने की अपील भी की गई। भारत के लिए यह हिस्सा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि नई दिल्ली लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद और आतंकवाद के खिलाफ दोहरे मापदंड खत्म करने की मांग करता रहा है।
गाजा पर युद्ध रोकने और फिलिस्तीन के समर्थन की बात
घोषणा में दुनिया के दूसरे बड़े संकटों पर भी ब्रिक्स ने अपना रुख सामने रखा। सदस्य देशों ने संघर्षों को रोकने और उनके मूल कारणों को दूर करने की जरूरत बताई। विवादों का समाधान बातचीत, कूटनीति और आपसी सलाह से करने पर जोर दिया गया। गाजा को लेकर ब्रिक्स देशों ने युद्धविराम बनाए रखने और मानवीय सहायता को बिना रुकावट पहुंचाने की अपील की। फिलिस्तीनियों को जबरन विस्थापित करने का विरोध किया गया और 1967 की सीमाओं के आधार पर एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी देश तथा दो-राष्ट्र समाधान के समर्थन को दोहराया गया।
एकतरफा टैरिफ और प्रतिबंधों पर भी निशाना
ब्रिक्स घोषणा में वैश्विक व्यापार को लेकर भी बड़ा संदेश दिया गया। सदस्य देशों ने एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों पर चिंता जताई और कहा कि ऐसे कदम वैश्विक व्यापार को प्रभावित करते हैं तथा विश्व व्यापार संगठन के नियमों के अनुरूप नहीं हैं। इसके साथ ही उन एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों का भी विरोध किया गया जिन्हें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी हासिल नहीं है। ब्रिक्स का कहना है कि ऐसे प्रतिबंधों का सबसे ज्यादा असर गरीब और कमजोर वर्गों पर पड़ सकता है।
ऊर्जा सुरक्षा पर बड़ा फोकस
दुनिया में जारी युद्धों और तनाव के बीच ऊर्जा सुरक्षा को भी घोषणा में खास जगह दी गई। ब्रिक्स ने कहा कि ऊर्जा का बदलाव जरूरी है, लेकिन इसके साथ ऊर्जा सुरक्षा और स्थिर आपूर्ति भी बनी रहनी चाहिए। घोषणा में माना गया कि जीवाश्म ईंधन आने वाले समय में भी खासकर विकासशील देशों की ऊर्जा जरूरतों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। साथ ही स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में न्यायपूर्ण और संतुलित बदलाव, ऊर्जा स्रोतों में विविधता और महत्वपूर्ण ऊर्जा ढांचे की सुरक्षा पर जोर दिया गया।
मोदी ने बदली वैश्विक व्यवस्था की बात उठाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स सम्मेलन में सिर्फ संगठन के मौजूदा मुद्दों की बात नहीं की, बल्कि वैश्विक व्यवस्था में बड़े बदलाव का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि दुनिया के ग्लोबल साउथ को केवल दूसरे देशों द्वारा बनाए नियमों का पालन करने वाला नहीं, बल्कि नियम बनाने में भूमिका निभाने वाला बनना चाहिए। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग करते हुए कहा कि अब इसे और टाला नहीं जा सकता। मोदी ने वैश्विक शासन व्यवस्था को ‘विशेषाधिकार की पिरामिड’ जैसी व्यवस्था बताते हुए इसे साझेदारी के मंच में बदलने की जरूरत बताई।
ब्रिक्स के अगले 20 साल का एजेंडा भी सामने
भारत ने ब्रिक्स के लिए अगले 20 वर्षों का एजेंडा तैयार करने की जरूरत भी बताई। मोदी ने सुझाव दिया कि हर साल अध्यक्षता बदलने के बावजूद फैसलों को लागू करने के लिए एक मजबूत व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने ब्रिक्स ट्रोइका के जरिए फैसलों की निगरानी और एक सुरक्षित डिजिटल व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया, जिसमें हर फैसले की जिम्मेदारी, समयसीमा और उसकी प्रगति दर्ज हो।
महिलाओं की भूमिका पर भी जोर
नई दिल्ली घोषणा में महिलाओं को केवल लाभार्थी नहीं बल्कि नेता, निर्णय लेने वाली और आर्थिक विकास की प्रमुख शक्ति के रूप में मान्यता दी गई। ब्रिक्स देशों ने महिलाओं की शासन, अर्थव्यवस्था, डिजिटल क्षेत्र, कौशल विकास, उद्यमिता, शांति निर्माण और जलवायु कार्रवाई में भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया।
भारत के लिए क्यों अहम है यह घोषणा?
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ब्रिक्स के अंदर सदस्य देशों के बीच कई मुद्दों पर गंभीर मतभेद मौजूद हैं। पश्चिम एशिया का संघर्ष इसका बड़ा उदाहरण है। इसके बावजूद भारत की अध्यक्षता में सभी देशों को एक साझा दस्तावेज पर सहमत करना नई दिल्ली की कूटनीतिक क्षमता की बड़ी परीक्षा थी। आतंकवाद, पहलगाम, गाजा, व्यापार, प्रतिबंध, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक शासन सुधार जैसे मुद्दों पर साझा भाषा तैयार करना भारत के लिए निश्चित रूप से महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
अब असली सवाल यह है कि क्या नई दिल्ली घोषणा सिर्फ 45 पन्नों का दस्तावेज बनकर रह जाएगी, या ब्रिक्स वास्तव में इन फैसलों को जमीन पर उतारकर दुनिया की वैश्विक व्यवस्था में अपनी प्रभावी भूमिका साबित करेगा?



