अंतरराष्ट्रीय/व्यापार | ABC NATIONAL NEWS | ओटावा | 9 सितंबर 2026
कारोबार की जंग अब खुली टैरिफ लड़ाई में बदली
अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापार युद्ध अब और तेज हो गया है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने साफ कहा है कि अमेरिका से व्यापारिक दूरी बनाने और नए बाजार तलाशने की प्रक्रिया में कीमत चुकानी पड़ेगी, लेकिन उनके मुताबिक अमेरिकी टैरिफ के सामने चुप बैठना उससे भी महंगा साबित होगा। कनाडा ने मंगलवार से अमेरिका से आने वाले करीब 28 अरब कनाडाई डॉलर यानी लगभग 20 अरब अमेरिकी डॉलर के सामान पर जवाबी शुल्क लागू कर दिया है। इन वस्तुओं पर टैरिफ 15% से लेकर 50% तक होगा।
दूध, गोल्फ क्लब से लेकर कपड़ों तक पर भारी टैक्स
कनाडा ने अमेरिकी दूध, स्टील, एल्युमिनियम, गोल्फ क्लब, जैकेट और टी-शर्ट जैसी कई वस्तुओं पर 50% तक टैरिफ लगाया है। अमेरिकी चीज़, टॉयलेट पेपर और कुछ घरेलू उपकरणों पर 25% शुल्क लगाया जाएगा, जबकि फोर्कलिफ्ट ट्रक और औद्योगिक उपकरणों पर 15% शुल्क लगेगा। यह कदम अमेरिका की ओर से कनाडाई कारों, ट्रकों, स्टील, एल्युमिनियम और लकड़ी समेत कई उत्पादों पर लगाए गए शुल्क के जवाब में आया है।
कार्नी बोले—अमेरिका पर निर्भरता घटाएगा कनाडा
प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का कहना है कि कनाडा अब अपनी अर्थव्यवस्था और व्यापार को एक ही देश पर निर्भर रखने के बजाय दूसरे देशों के साथ संबंध मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि कनाडा के पास अपनी अर्थव्यवस्था को नए रास्ते पर ले जाने के लिए जरूरी संसाधन मौजूद हैं। लेकिन उन्होंने यह भी साफ किया कि इस बदलाव की कीमत होगी। सवाल यह है कि क्या कनाडा दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के साथ लंबे समय तक चलने वाली व्यापारिक लड़ाई का आर्थिक दबाव झेल पाएगा?
अमेरिका भी जवाबी टैरिफ के लिए तैयार
कनाडा के कदम के बाद अमेरिका ने भी पलटवार के संकेत दिए हैं। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने कहा कि वॉशिंगटन कनाडा के टैरिफ के जवाब में उसी तरह के शुल्क लगाने पर विचार कर सकता है। यानी जिस व्यापार युद्ध को बातचीत के जरिए सुलझाने की कोशिश होनी थी, वह अब टैरिफ के बदले टैरिफ की खतरनाक स्थिति में पहुंचता दिखाई दे रहा है।
बॉम्बार्डियर पर ट्रंप की धमकी से बढ़ा तनाव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडाई विमान निर्माता बॉम्बार्डियर को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है। ट्रंप ने धमकी दी है कि अगर कंपनी अपना उत्पादन अमेरिका नहीं ले जाती तो अमेरिका में उसके कारोबार को रोकने के कदम उठाए जा सकते हैं। बॉम्बार्डियर कनाडा की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण कंपनी है और 2024 में उसने कनाडा के GDP में 7 अरब कनाडाई डॉलर से अधिक का योगदान दिया था।
ट्रेड वॉर का सीधा असर आम लोगों की जेब पर
टैरिफ लगाने का तर्क यह दिया जाता है कि इससे घरेलू उद्योग मजबूत होगा और कंपनियां अपने उत्पादन को देश के भीतर बढ़ाएंगी। लेकिन अर्थशास्त्रियों की चेतावनी है कि आयात पर भारी शुल्क का बोझ आखिरकार उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है। यानी अमेरिकी और कनाडाई बाजार में रोजमर्रा की चीजें महंगी हो सकती हैं। व्यापार युद्ध का असली सवाल यही है—क्या विदेशी सामान पर टैक्स लगाने से घरेलू उद्योग मजबूत होगा या आम उपभोक्ता को महंगाई का बोझ उठाना पड़ेगा?
करीब 900 अरब डॉलर का कारोबार दांव पर
अमेरिका और कनाडा के बीच दुनिया के सबसे बड़े द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों में से एक है, जिसका मूल्य पिछले साल करीब 900 अरब डॉलर रहा। कनाडा की बड़ी हिस्सेदारी वाले निर्यात का बाजार अमेरिका है, जबकि अमेरिकी अर्थव्यवस्था कनाडा की अर्थव्यवस्था से करीब 13 गुना बड़ी है। ऐसे में दोनों देशों के बीच लंबे समय तक चलने वाली टैरिफ लड़ाई का असर सिर्फ दोनों देशों तक सीमित नहीं रह सकता।
हालांकि कनाडा ने व्यापार के दूसरे रास्ते तलाशने शुरू कर दिए हैं। जुलाई के आंकड़ों के मुताबिक कनाडा के कुल निर्यात में अमेरिका जाने वाले सामान की हिस्सेदारी अब करीब 66% रह गई है, जबकि व्यापार युद्ध से पहले यह औसतन करीब 75% थी। दूसरी तरफ कनाडा की अर्थव्यवस्था ने दूसरी तिमाही में 3.3% की वृद्धि दर्ज की, लेकिन अगस्त में करीब 41,000 नौकरियां कम हुईं।
अब सवाल—कौन झुकेगा?
कनाडा कह रहा है कि वह अमेरिकी बाजार पर अपनी निर्भरता कम करेगा। अमेरिका का दावा है कि उसके टैरिफ घरेलू उत्पादन और निवेश को बढ़ावा देंगे। लेकिन दोनों देशों के बीच बातचीत अगस्त के अंत में टूट चुकी है और अभी नई वार्ता तय नहीं हुई है।
अब असली सवाल यह है—क्या ट्रंप की टैरिफ नीति अमेरिका को फायदा पहुंचाएगी, या दुनिया के सबसे बड़े पड़ोसी व्यापार संबंध को ही नुकसान पहुंचाएगी? और क्या मार्क कार्नी का कनाडा अमेरिकी दबाव के सामने टिककर नए वैश्विक बाजार बना पाएगा?




