खेल | ABC NATIONAL NEWS | 8 सितंबर 2026
45.7 किलो वजन, 140 किलो की लिफ्ट और फिर सोशल मीडिया पर डरावना हमला
दक्षिण अफ्रीका के सन सिटी में आयोजित 2026 आईपीएफ विश्व सब-जूनियर और जूनियर क्लासिक पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में भारत के लिए रजत पदक जीतकर सुर्खियों में आईं कीया बनर्जी ने अपनी सफलता के तुरंत बाद सोशल मीडिया के उस भयावह चेहरे का सामना किया, जिसकी शायद उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी। 21 वर्षीय कीया ने महिला 47 किलोग्राम वर्ग में 45.7 किलोग्राम वजन के बावजूद 140 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक जीता। यानी उन्होंने अपने शरीर के वजन से करीब तीन गुना वजन उठाकर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। उनकी शानदार उपलब्धि का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और लाखों लोगों ने इसे देखा, लेकिन इसी प्रसिद्धि के साथ उनके सामने एआई से बनाए गए फर्जी फोटो और वीडियो, फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट और बेहद आपत्तिजनक टिप्पणियों का ऐसा दौर आया जिसने इस युवा खिलाड़ी को सार्वजनिक रूप से आवाज उठाने के लिए मजबूर कर दिया।
‘लोग मुझे यौन नजर से देखने लगे’
कीया ने बताया कि उन्हें देशभर से बहुत सारे सकारात्मक और उत्साह बढ़ाने वाले संदेश मिले, लेकिन इसके साथ सोशल मीडिया का एक बेहद डरावना चेहरा भी सामने आया। उनके अनुसार, उनकी प्रतियोगिता की आधिकारिक तस्वीरें उन्होंने किसी के साथ साझा तक नहीं की थीं, इसके बावजूद हजारों पेजों पर उनकी तस्वीरें एआई की मदद से बदलकर प्रसारित की गईं। कई वास्तविक प्रतियोगिता तस्वीरों में भी उनके चेहरे पर अतिरिक्त मेकअप जोड़ दिया गया। इसके बाद कुछ फर्जी खातों ने उनकी पहचान का इस्तेमाल करते हुए आपत्तिजनक एआई सामग्री पोस्ट करना शुरू कर दिया। कीया ने कहा कि सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बात यह थी कि ऑनलाइन चर्चाओं में लोग उन्हें यौन नजर से देख रहे थे और उनकी जाति तथा वंश को लेकर अपमानजनक टिप्पणियां कर रहे थे।
जिस जीत पर देश को गर्व था, उसी के बाद शुरू हुआ साइबर उत्पीड़न
कीया के लिए यह उपलब्धि वर्षों की मेहनत का परिणाम थी। उन्होंने जून 2024 में 19 वर्ष की उम्र में पावरलिफ्टिंग शुरू की थी और करीब आठ महीने बाद पेशेवर प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना शुरू किया। उनकी डेडलिफ्ट में तेजी से सुधार ने उन्हें महसूस कराया कि वह अपनी वजन श्रेणी में राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ सकती हैं और आईपीएफ विश्व चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई कर सकती हैं। लेकिन पावरलिफ्टिंग जैसे अपेक्षाकृत कम चर्चित खेल से अचानक दुनिया भर में चर्चा में आने के बाद उन्हें सोशल मीडिया की उस भीड़ का सामना करना पड़ा, जहां उपलब्धि और मेहनत के बजाय उनके शरीर को निशाना बनाया गया।
‘मैंने लड़कियों को दिखाने के लिए आवाज उठाई’
आपत्तिजनक और एआई से बदली सामग्री के सामने कीया ने चुप रहने के बजाय सोशल मीडिया पर अपनी बात रखी। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे एआई से बनाए गए या बदले गए फोटो और वीडियो पर भरोसा न करें। उन्होंने कहा कि उन्होंने इसलिए आवाज उठाई ताकि छोटी लड़कियां भी यह समझ सकें कि अपने खिलाफ हो रहे गलत व्यवहार पर चुप रहना जरूरी नहीं है और वे अपने लिए सवाल उठा सकती हैं। कीया की यह बात सिर्फ एक खिलाड़ी की व्यक्तिगत परेशानी नहीं है, बल्कि सोशल मीडिया और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उस खतरनाक इस्तेमाल की ओर भी ध्यान खींचती है, जिसमें किसी महिला की वास्तविक तस्वीर को बदलकर उसकी प्रतिष्ठा और निजता को नुकसान पहुंचाया जा सकता है।
पावरलिफ्टिंग और वेटलिफ्टिंग एक नहीं हैं
कीया ने यह भी स्पष्ट किया कि पावरलिफ्टिंग और वेटलिफ्टिंग को एक ही खेल समझना सही नहीं है। पावरलिफ्टिंग में स्क्वाट, बेंच प्रेस और डेडलिफ्ट तीन मुख्य लिफ्ट होती हैं, जबकि वेटलिफ्टिंग में स्नैच तथा क्लीन एंड जर्क शामिल होते हैं। पावरलिफ्टिंग अभी ओलंपिक खेल नहीं है। कीया अंतरराष्ट्रीय पावरलिफ्टिंग महासंघ के तहत प्रतिस्पर्धा करती हैं और उनका लक्ष्य विश्व तथा एशियाई स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए लगातार पदक जीतना है। वह चाहती हैं कि भविष्य में पावरलिफ्टिंग को भी ओलंपिक में शामिल किया जाए और अगर ऐसा होता है तो भारत के लिए ओलंपिक पदक जीतना उनका बड़ा लक्ष्य होगा।
अब निशाने पर एशियाई रिकॉर्ड
रजत पदक को कीया अपनी मंजिल नहीं, बल्कि शुरुआत मानती हैं। उनका अगला बड़ा लक्ष्य अपनी वजन श्रेणी में 147.5 किलोग्राम के एशियाई रिकॉर्ड को आधिकारिक प्रतियोगिता में तोड़ना है। इसके साथ वह आने वाले वर्षों में विश्व रिकॉर्ड बनाने और भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतने का सपना देख रही हैं। उनका कहना है कि पावरलिफ्टिंग लंबी अवधि और बेहद तकनीकी खेल है, जिसमें प्रदर्शन वर्षों की ट्रेनिंग और हजारों अभ्यास सत्रों के बाद धीरे-धीरे आगे बढ़ता है।
कीया की कहानी सिर्फ पदक की नहीं, हिम्मत की भी है
कीया बनर्जी की कहानी में एक तरफ 45.7 किलोग्राम के शरीर से 140 किलोग्राम वजन उठाने वाली असाधारण खेल क्षमता है, तो दूसरी तरफ उस उपलब्धि के तुरंत बाद एआई के दुरुपयोग और ऑनलाइन उत्पीड़न के खिलाफ खड़े होने का साहस भी। एक युवा भारतीय खिलाड़ी ने दुनिया के मंच पर देश का नाम रोशन किया, लेकिन सोशल मीडिया के एक हिस्से ने उसकी उपलब्धि देखने के बजाय उसके शरीर और पहचान को निशाना बनाया। कीया का जवाब साफ है—खेल मैदान में मेहनत से मिली पहचान को कोई फर्जी तस्वीर या एआई वीडियो मिटा नहीं सकता और महिलाओं को अपने सम्मान के लिए आवाज उठाने से डरना नहीं चाहिए।




