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वैभव सूर्यवंशी को लेकर बीसीसीआई का बड़ा प्लान: ‘वन ईयर वंडर’ नहीं, सचिन जैसा लंबा करियर बनाने पर जोर

15 साल के इस युवा सितारे पर बोर्ड की खास नजर, बीसीसीआई बोला—एक सीरीज या एक साल की चमक नहीं, वर्षों तक देश की सेवा करे

खेल | ABC NATIONAL NEWS | मुंबई | 4 सितंबर 2026

15 साल की उम्र में तूफानी शुरुआत, अब बीसीसीआई की नजर भविष्य पर

सिर्फ 15 साल की उम्र में क्रिकेट की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना चुके वैभव सूर्यवंशी के करियर को लेकर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने बड़ी और लंबी योजना बनाई है। वैभव ने जिस तेजी से आईपीएल से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक का सफर तय किया है, उसने क्रिकेट प्रशंसकों के साथ-साथ बीसीसीआई का भी ध्यान अपनी ओर खींचा है। लेकिन बोर्ड अब उनकी शुरुआती सफलता को लेकर जल्दबाजी नहीं करना चाहता। मुंबई में हुई बीसीसीआई की उच्चस्तरीय बैठक में वैभव के भविष्य पर भी चर्चा हुई, जिसमें बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया, भारतीय टेस्ट और वनडे कप्तान शुभमन गिल, टी-20 कप्तान श्रेयस अय्यर, मुख्य कोच गौतम गंभीर और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण समेत कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बोर्ड का संदेश साफ है—इतनी कम उम्र में मिली असाधारण सफलता को संभालना भी उतना ही जरूरी है, जितना मैदान पर रन बनाना।

बीसीसीआई चाहता है—वैभव सचिन तेंदुलकर जैसा लंबा सफर तय करें

बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने वैभव को लेकर बोर्ड की सोच खुलकर सामने रखी है। उनका कहना है कि बोर्ड चाहता है कि वैभव केवल कुछ मैचों या कुछ सीरीज में अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी बनकर न रह जाएं, बल्कि लंबे समय तक भारतीय क्रिकेट की सेवा करें। सैकिया ने सचिन तेंदुलकर का उदाहरण देते हुए कहा कि बोर्ड की इच्छा है कि वैभव भी सचिन की तरह लंबे और शानदार अंतरराष्ट्रीय करियर की ओर बढ़ें। इसी वजह से बीसीसीआई वैभव के खेल, प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय करियर में उनके हर अगले कदम पर करीबी नजर रख रहा है।

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‘वन ईयर वंडर’ बनने से बचाना सबसे बड़ी चुनौती

बीसीसीआई के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वैभव की असाधारण शुरुआती सफलता उनके ऊपर जरूरत से ज्यादा दबाव न डाल दे। क्रिकेट में कई युवा खिलाड़ी कम उम्र में शानदार प्रदर्शन करके सुर्खियों में आते हैं, लेकिन लगातार उम्मीदों, मीडिया की चर्चा और प्रदर्शन के दबाव के बीच उसी स्तर को लंबे समय तक बनाए रखना आसान नहीं होता। सैकिया ने इसी वजह से साफ किया कि बोर्ड नहीं चाहता कि वैभव की कहानी सिर्फ एक सीरीज या एक साल के चमत्कार तक सीमित रह जाए। बोर्ड उन्हें सही प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और पर्याप्त समय देना चाहता है, ताकि उनका खेल उम्र के साथ और मजबूत होता जाए।

आईपीएल 2026 में वैभव ने मचा दिया था तहलका

वैभव की मौजूदा पहचान के पीछे 2026 का आईपीएल सबसे बड़ा कारण रहा। राजस्थान रॉयल्स की ओर से खेलते हुए इस युवा बल्लेबाज ने 16 मैचों में 776 रन बनाए और उनका स्ट्राइक रेट 237.30 रहा। उन्होंने इस दौरान एक शतक और पांच अर्धशतक लगाए। उनकी विस्फोटक बल्लेबाजी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने पूरे सीजन में 72 छक्के लगाए। उनके शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें ऑरेंज कैप, सबसे मूल्यवान खिलाड़ी, उभरते खिलाड़ी, सुपर स्ट्राइकर और सुपर सिक्सेस जैसे कई सम्मान मिले।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भी आते ही छोड़ी छाप

आईपीएल में शानदार प्रदर्शन के बाद वैभव को भारतीय पुरुष टीम में जगह मिली और वह भारत के सबसे कम उम्र के पुरुष अंतरराष्ट्रीय पदार्पण करने वाले खिलाड़ी बने। जिम्बाब्वे के खिलाफ शुरुआती अंतरराष्ट्रीय सीरीज में भी उन्होंने अपनी बल्लेबाजी का असर दिखाया। तीन मैचों में वैभव ने 151 रन बनाए और उन्हें प्लेयर ऑफ द सीरीज चुना गया। इसके बाद घरेलू क्रिकेट में भी उनका प्रदर्शन जारी रहा। 15 साल और 157 दिन की उम्र में उन्होंने दलीप ट्रॉफी के इतिहास में सबसे कम उम्र में अर्धशतक लगाने का रिकॉर्ड भी अपने नाम किया।

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बीसीसीआई की नजर सिर्फ वैभव पर नहीं

बोर्ड की योजना केवल वैभव सूर्यवंशी को लेकर नहीं है। बीसीसीआई सचिव के मुताबिक बोर्ड ने लगभग 10 से 15 युवा खिलाड़ियों का एक विशेष समूह तैयार किया है, जिनके खेल और विकास पर लगातार नजर रखी जा रही है। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण इन खिलाड़ियों के प्रशिक्षण, कौशल विकास और भविष्य की तैयारी में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इसका उद्देश्य यह है कि भारत की युवा प्रतिभाओं को केवल शुरुआती सफलता के बाद राष्ट्रीय टीम में लाने के बजाय उन्हें लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर के लिए व्यवस्थित तरीके से तैयार किया जाए।

लक्ष्मण की निगरानी में तैयार होंगे भविष्य के सितारे

उम्र के स्तर के क्रिकेट से वरिष्ठ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक पहुंचना किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए बड़ी चुनौती होती है। यहां केवल प्रतिभा और रन पर्याप्त नहीं होते। फिटनेस, तकनीक, मानसिक मजबूती, अनुशासन और लगातार प्रदर्शन करने की क्षमता भी उतनी ही जरूरी होती है। बीसीसीआई इसलिए वैभव और दूसरे युवा खिलाड़ियों को जल्द से जल्द हर मैच में उतारने के बजाय उनके विकास की गति को समझकर आगे बढ़ाना चाहता है। वीवीएस लक्ष्मण की निगरानी में इन खिलाड़ियों को ऐसी तैयारी देने की कोशिश होगी, जिससे शुरुआती सफलता आगे चलकर स्थायी करियर में बदल सके।

सचिन की मिसाल इसलिए सबसे खास है

सचिन तेंदुलकर भी किशोर उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में आए थे और बहुत कम समय में दुनिया की नजरों में छा गए थे। लेकिन उनकी महानता सिर्फ कम उम्र में रिकॉर्ड बनाने में नहीं थी। उन्होंने करीब ढाई दशक तक विश्व क्रिकेट के सर्वोच्च स्तर पर प्रदर्शन किया और भारतीय क्रिकेट की सबसे बड़ी हस्तियों में शामिल हुए। बीसीसीआई अब वैभव के मामले में भी इसी लंबी सोच के साथ आगे बढ़ना चाहता है। लक्ष्य सिर्फ यह नहीं है कि वैभव 15 साल की उम्र में कितने रिकॉर्ड बनाते हैं, बल्कि असली लक्ष्य यह है कि वह आने वाले 15-20 वर्षों तक भारतीय क्रिकेट को कितना योगदान दे पाते हैं। यही वजह है कि वैभव की शुरुआती चमक के साथ अब उनके लंबे क्रिकेट सफर की तैयारी पर भी उतना ही जोर दिया जा रहा है।

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