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होर्मुज का संकट गहराया तो सीरिया ने दिया नया रास्ता, ट्रंप बोले—“यह बहुत शानदार है!”

अंतरराष्ट्रीय | एबीसी नेशनल न्यूज़ | दमिश्क | 4 सितंबर 2026

होर्मुज के विकल्प के तौर पर सीरिया का नया प्रस्ताव

ईरान युद्ध के बीच दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य पर दबाव बढ़ने का असर अब पश्चिम एशिया की पूरी ऊर्जा और व्यापार व्यवस्था पर दिखाई देने लगा है। इसी बीच सीरिया ने अपने भूगोल और भूमध्यसागर तक पहुंच का इस्तेमाल करते हुए ऊर्जा और सामान की आवाजाही के लिए एक वैकल्पिक रास्ता तैयार करने की कोशिश शुरू की है। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल से ही दक्षिणी इराक की तेल रिफाइनरियों और सीरिया के भूमध्यसागरीय बंदरगाह बानियास के बीच ट्रकों के जरिए आवाजाही का परीक्षण किया जा रहा है। इस प्रस्ताव का मकसद ऐसा जमीनी गलियारा तैयार करना है, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता कम की जा सके।

ट्रंप ने कहा—“यह बहुत शानदार है”

सीरिया की इस पहल से जुड़ी रिपोर्ट सामने आने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसकी सराहना करते हुए इसे “ग्रेट!” कहा। ट्रंप की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है और वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ी है। होर्मुज से होकर दुनिया के बड़े हिस्से की तेल और गैस आपूर्ति गुजरती है, इसलिए इस समुद्री मार्ग में किसी भी बड़ी रुकावट का सीधा असर तेल की कीमतों, समुद्री परिवहन और दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

बासरा से बानियास तक बनेगी बड़ी पाइपलाइन

इस वैकल्पिक रास्ते की सबसे बड़ी योजना इराक के बासरा से सीरिया के बानियास तक पाइपलाइन बिछाने की है। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने शेवरॉन के नेतृत्व वाली ऐसी पाइपलाइन परियोजना का समर्थन किया है, जिसकी क्षमता प्रतिदिन करीब 20 लाख बैरल कच्चा तेल ले जाने की होगी। करीब 1,000 मील लंबी और 5.7 अरब डॉलर की इस परियोजना को पूरा होने में कम से कम ढाई साल लग सकते हैं। हालांकि यह पाइपलाइन समुद्र के रास्ते एक साथ बड़ी मात्रा में तेल ले जाने वाले टैंकरों की पूरी बराबरी नहीं कर सकती, लेकिन इससे पश्चिम एशिया के तेल परिवहन के लिए एक अतिरिक्त रास्ता जरूर तैयार हो सकता है।

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सीरिया भूमध्यसागर के रास्ते यूरोप से जुड़ने की कोशिश में

सीरिया के नए राष्ट्रपति अहमद अल-शरा के नेतृत्व में देश अब अपनी भूमध्यसागरीय स्थिति का इस्तेमाल करके खुद को एक बड़े व्यापार और ऊर्जा गलियारे के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। बानियास बंदरगाह सीरिया को भूमध्यसागर से जोड़ता है और वहां से यूरोप तक समुद्री संपर्क बनाया जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, सीरियाई अधिकारियों ने तुर्किये और सऊदी अरब के साथ यूरोप से लाल सागर तक सीरिया के रास्ते पुराने रेल नेटवर्क को फिर से बहाल करने के समझौते भी किए हैं। अगर ये योजनाएं जमीन पर उतरती हैं तो सीरिया केवल तेल के लिए ही नहीं, बल्कि व्यापक क्षेत्रीय व्यापार के लिए भी एक महत्वपूर्ण ट्रांजिट देश बन सकता है।

लेकिन रास्ता आसान नहीं, सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती

सीरिया को वैकल्पिक ऊर्जा और व्यापार गलियारा बनाने में कई बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, अहमद अल-शरा की सरकार का देश के हर हिस्से पर अभी पूरी तरह नियंत्रण नहीं है और अलग-अलग इलाकों में हिंसक घटनाएं तथा हमले जारी हैं। प्रस्तावित पाइपलाइन को पश्चिमी इराक के इलाके से भी गुजरना होगा, जहां सुरक्षा की अपनी अलग चुनौतियां हैं। ऐसे में अरबों डॉलर की परियोजना के लिए केवल आर्थिक निवेश ही नहीं, बल्कि लंबे समय तक स्थिर राजनीतिक और सुरक्षा व्यवस्था भी जरूरी होगी।

कुवैत, बहरीन और सऊदी अरब की भी हो सकती है दिलचस्पी

इस नए गलियारे में क्षेत्र के दूसरे तेल उत्पादक देशों की भी संभावित दिलचस्पी बताई जा रही है। ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, कुवैत और बहरीन भविष्य में इस मार्ग से जुड़ने पर विचार कर सकते हैं। सऊदी अरब भी अपने तेल निर्यात के लिए वैकल्पिक रास्तों की तलाश करता रहा है। यदि सीरिया-इराक के बीच प्रस्तावित ऊर्जा गलियारा सफल होता है तो इससे पश्चिम एशिया के कई देशों को समुद्री मार्गों पर अपनी निर्भरता कम करने का विकल्प मिल सकता है।

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होर्मुज संकट ने बढ़ाई वैकल्पिक रास्तों की जरूरत

अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष ने होर्मुज जलडमरूमध्य की रणनीतिक अहमियत को एक बार फिर पूरी दुनिया के सामने ला दिया है। संघर्ष के कारण इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही सामान्य स्तर से नीचे बनी हुई है और ईरानी हमले के खतरे के चलते कंपनियां और देश वैकल्पिक रास्तों पर विचार कर रहे हैं। ऐसे माहौल में सीरिया का यह प्रस्ताव केवल एक पाइपलाइन या सड़क-रेल परियोजना नहीं है, बल्कि पश्चिम एशिया की बदलती ऊर्जा और व्यापार व्यवस्था का हिस्सा बन सकता है। हालांकि परियोजना को पूरा होने में वर्षों लगेंगे और सुरक्षा संबंधी कई सवाल अभी बाकी हैं, लेकिन होर्मुज पर बढ़ते दबाव ने सीरिया को एक ऐसे वैकल्पिक गलियारे की पेशकश करने का मौका जरूर दिया है, जिसे अमेरिका भी फिलहाल सकारात्मक नजर से देख रहा है।

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