राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | श्रीनगर | 4 सितंबर 2026
यासीन मलिक ने हत्या के आरोपों को नकारा
जेल में बंद प्रतिबंधित जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के प्रमुख यासीन मलिक ने कश्मीरी पंडित महिला की हत्या के मामले में खुद को निर्दोष बताया है। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, मलिक ने श्रीनगर की विशेष अदालत के सामने 25 पन्नों का हलफनामा दाखिल किया है। इसमें उन्होंने कहा कि वह खुद को दोषी नहीं मानते, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि वह मामले में बचाव पक्ष की ओर से मुकदमा लड़ना नहीं चाहते और अदालत उन्हें मौत की सजा दे सकती है। यानी मलिक ने आरोपों को स्वीकार नहीं किया है, लेकिन उन्होंने अपने लिए सबसे कठोर सजा की मांग जरूर रखी है।
“मामला जांच नहीं, बनाई गई कहानी है”
मलिक ने अपने हलफनामे में पुलिस की जांच और मामले की कहानी पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप किसी वास्तविक पुलिस जांच की तरह नहीं लगते, बल्कि एक बनाई गई कहानी जैसे दिखाई देते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह मामला कई दशक बाद उन्हें फंसाने के लिए तैयार किया गया। हालांकि ये मलिक के अपने दावे हैं और अदालत में मामले के सबूतों तथा अभियोजन पक्ष के तर्कों के आधार पर ही अंतिम फैसला होगा।
मुकदमा लड़ने से इनकार, फिर मौत की सजा की मांग क्यों?
इस मामले में मलिक का रुख सबसे ज्यादा चर्चा में इसलिए है क्योंकि उन्होंने एक तरफ खुद को निर्दोष बताया है और दूसरी तरफ मामले को चुनौती देने के बजाय मौत की सजा की मांग की है। सामान्य तौर पर कोई आरोपी अपने ऊपर लगे आरोपों को गलत साबित करने के लिए अदालत में अपना बचाव करता है, लेकिन मलिक ने कहा है कि वह इस मामले को चुनौती नहीं देंगे। उनका कहना है कि अगर अदालत उन्हें दोषी मानती है तो उन्हें मौत की सजा दी जाए। इससे इस मामले की कानूनी प्रक्रिया और भी असामान्य नजर आ रही है।
कश्मीरी पंडितों से जुड़ा मामला बेहद संवेदनशील
कश्मीरी पंडितों के खिलाफ हिंसा और हत्या से जुड़े मामले जम्मू-कश्मीर के सबसे संवेदनशील मुद्दों में रहे हैं। 1990 के दशक में बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडितों को घाटी छोड़कर जाना पड़ा था और उस दौर की हिंसा से जुड़े कई मामले लंबे समय तक जांच और अदालतों में चलते रहे। ऐसे मामलों में पीड़ित परिवारों के लिए न्याय की प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए यासीन मलिक के खिलाफ चल रहा यह मामला भी केवल एक व्यक्ति पर लगे आरोपों तक सीमित नहीं है, बल्कि कश्मीर के उस हिंसक दौर से जुड़े बड़े सवालों के बीच देखा जा रहा है।
अब अदालत के सामने सबूत सबसे महत्वपूर्ण
मलिक ने अपने हलफनामे में आरोपों को खारिज करते हुए मामले को अपने खिलाफ बनाई गई कहानी बताया है, लेकिन अंतिम फैसला अदालत को उपलब्ध सबूतों और कानून के आधार पर करना होगा। किसी आरोपी का आरोपों से इनकार करना या अपनी ओर से कोई दावा करना अपने आप में दोष या निर्दोष होने का प्रमाण नहीं है। अब अदालत के सामने यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए सबूत क्या हैं और वे आरोपों को किस तरह साबित करते हैं।
फैसले पर टिकी सबकी नजर
यासीन मलिक का 25 पन्नों का हलफनामा इस मामले में उनकी कानूनी रणनीति को लेकर कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने हत्या में अपनी भूमिका से इनकार किया है, मामले की जांच पर सवाल उठाए हैं और साथ ही मौत की सजा की मांग की है। अब इस पूरे मामले में अदालत की आगे की कार्रवाई और उपलब्ध सबूत सबसे महत्वपूर्ण होंगे। कश्मीरी पंडित महिला की हत्या के इस पुराने मामले में अब सबकी नजर इस बात पर है कि अदालत मलिक के दावों और अभियोजन पक्ष के सबूतों को किस तरह देखती है और आखिर न्यायिक प्रक्रिया किस निष्कर्ष तक पहुंचती है।




