राज्य | ABC NATIONAL NEWS | गुरुग्राम | 31 अगस्त 2026
142 में से 88 ब्लॉकों में TDS स्वीकार्य सीमा से ऊपर
विधानसभा के मानसून सत्र में सरकार की ओर से प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में हरियाणा के 142 ब्लॉकों में से 88 ब्लॉकों के भूजल में औसत TDS 500 मिलीग्राम प्रति लीटर की स्वीकार्य सीमा से अधिक दर्ज किया गया। इनमें 35 ब्लॉकों में TDS का स्तर 1,000 मिलीग्राम प्रति लीटर या उससे भी ज्यादा था।
कांग्रेस विधायक आदित्य सुरजेवाला ने इन आंकड़ों के आधार पर राज्य सरकार पर पेयजल की गुणवत्ता को लेकर गंभीरता से काम नहीं करने का आरोप लगाया है। हालांकि आंकड़े विधानसभा में सरकार द्वारा प्रस्तुत किए गए हैं, लेकिन विधायक द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोपों को उनके दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
तीन साल में राज्य का औसत TDS भी बढ़ा
आंकड़ों के मुताबिक हरियाणा के भूजल का औसत TDS वर्ष 2022 में 658 मिलीग्राम प्रति लीटर था, जो 2025 में बढ़कर 737 मिलीग्राम प्रति लीटर हो गया। यानी तीन वर्षों में राज्य के औसत स्तर में भी वृद्धि दर्ज की गई।
विधायक के मुताबिक 2022 की तुलना में 93 ब्लॉकों यानी करीब 65.5 प्रतिशत ब्लॉकों में पानी की गुणवत्ता खराब हुई है। यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हरियाणा के कई हिस्सों में लोग घरेलू जरूरतों और खेती के लिए भूजल पर काफी निर्भर हैं।
पलवल में TDS 74% बढ़ा
पलवल जिले की स्थिति विशेष रूप से चिंता बढ़ाने वाली बताई गई है। यहां औसत TDS तीन वर्षों में 940 मिलीग्राम प्रति लीटर से बढ़कर 1,636 मिलीग्राम प्रति लीटर पहुंच गया। यानी इसमें लगभग 74 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
TDS पानी में मौजूद घुले हुए पदार्थों की कुल मात्रा को दर्शाता है। इसमें कैल्शियम, मैग्नीशियम, सोडियम, क्लोराइड और अन्य घुले खनिज शामिल हो सकते हैं। हालांकि केवल TDS का आंकड़ा पानी को पीने योग्य या अयोग्य घोषित करने के लिए पर्याप्त नहीं होता। पानी की वास्तविक गुणवत्ता समझने के लिए अन्य रासायनिक और जैविक मानकों की भी जांच आवश्यक होती है।
नूंह के इंद्री ब्लॉक में सबसे ज्यादा चिंता
नूंह के इंद्री ब्लॉक में भी स्थिति गंभीर बताई गई है। यहां TDS का स्तर 1,974 मिलीग्राम प्रति लीटर तक पहुंच गया, जो वर्ष 2022 के स्तर का लगभग दोगुना है।
पानी में घुले लवण और खनिजों की अधिकता स्वाद, घरेलू उपयोग और पानी की समग्र गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। ऐसे क्षेत्रों में लगातार भूजल की जांच और लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण हो जाता है।
बढ़ता TDS क्यों चिंता का विषय है?
TDS बढ़ने के पीछे भूजल में प्राकृतिक खनिजों की मौजूदगी के साथ-साथ स्थानीय भूगर्भीय परिस्थितियां, भूजल का अत्यधिक दोहन, सिंचाई और अन्य मानवीय गतिविधियां भी भूमिका निभा सकती हैं। इसलिए किसी एक कारण को जिम्मेदार ठहराने से पहले वैज्ञानिक अध्ययन जरूरी है।
उच्च TDS वाला पानी कई बार स्वाद में खारा या अप्रिय लग सकता है और घरेलू उपकरणों में जमाव जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है। लेकिन स्वास्थ्य पर असर इस बात पर निर्भर करता है कि TDS में कौन-कौन से पदार्थ मौजूद हैं और उनकी सांद्रता कितनी है। इसलिए केवल TDS के आधार पर स्वास्थ्य संबंधी निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
सरकार के सामने बड़ी चुनौती
हरियाणा में भूजल की गिरती गुणवत्ता केवल पेयजल का मुद्दा नहीं है। इसका संबंध कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और भविष्य में उपलब्ध होने वाले सुरक्षित पानी से भी है। जिन इलाकों में भूजल की गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है, वहां नियमित जल परीक्षण, वैकल्पिक पेयजल स्रोत, वर्षाजल संचयन और भूजल पुनर्भरण पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।
साथ ही, अलग-अलग ब्लॉकों में पानी की गुणवत्ता क्यों बिगड़ रही है, इसका वैज्ञानिक अध्ययन भी जरूरी है। यदि किसी क्षेत्र में लगातार TDS बढ़ रहा है तो केवल उपचार संयंत्र लगाना पर्याप्त नहीं होगा; समस्या के मूल कारण को समझकर भूजल प्रबंधन की दीर्घकालिक योजना बनानी होगी।
पानी की गुणवत्ता पर राजनीति से आगे समाधान जरूरी
हरियाणा के 93 ब्लॉकों में पानी की गुणवत्ता बिगड़ने का दावा अगर सरकारी आंकड़ों से पुष्ट होता है, तो इसे केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रखा जा सकता। सुरक्षित पेयजल सीधे लोगों के जीवन और भविष्य से जुड़ा सवाल है। सरकार को ब्लॉक स्तर पर पानी की नियमित निगरानी, सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जांच रिपोर्ट और खराब गुणवत्ता वाले क्षेत्रों के लिए स्पष्ट कार्ययोजना सामने रखनी चाहिए।
हरियाणा के सामने चुनौती सिर्फ पानी बचाने की नहीं, बल्कि उपलब्ध पानी को पीने और इस्तेमाल के योग्य बनाए रखने की भी है। भूजल आज खराब हुआ तो उसका असर आने वाली पीढ़ियों पर पड़ेगा।




