Home » International » नेपाल में तबाही: 100 से अधिक लोगों की मौत; सैकड़ों लापता; 105 भारतीयों पर संकट, बिहार-UP हाई अलर्ट

नेपाल में तबाही: 100 से अधिक लोगों की मौत; सैकड़ों लापता; 105 भारतीयों पर संकट, बिहार-UP हाई अलर्ट

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | काठमांडू/नई दिल्ली | 26 अगस्त 2026

नेपाल में बुधवार को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने हिमालयी क्षेत्र में भारी तबाही मचा दी है। भोटेकोशी नदी में अचानक आए उफान ने रासुवा, नुवाकोट और धादिंग समेत कई इलाकों में गांवों, सड़कों, बाजारों, जलविद्युत परियोजनाओं और संचार व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है। शाम तक नेपाल पुलिस के अनुसार मृतकों की संख्या बढ़कर 95 हो गई है, जबकि सैकड़ों लोग अब भी लापता या संपर्क से बाहर हैं। राहत और बचाव अभियान जारी रहने के बीच मृतकों का आंकड़ा और बढ़ने की आशंका है।

नेपाल पर्यटन बोर्ड की प्रारंभिक जानकारी के अनुसार प्रभावित इलाकों में 384 यात्री लापता या संपर्क से बाहर बताए गए हैं। इनमें 291 विदेशी और 93 नेपाली नागरिक शामिल हैं। प्रारंभिक सूची में 105 भारतीय नागरिकों के नाम भी बताए गए हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह अंतिम आंकड़ा नहीं है और यात्रा एजेंसियों, गाइडों, स्थानीय प्रशासन तथा सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलान कर जानकारी का सत्यापन किया जा रहा है।

भोटेकोशी के उफान ने मचाई तबाही

रासुवा जिले में भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने के बाद बाढ़ का पानी बेहद तेजी से आसपास के इलाकों में फैल गया। कई सड़कें बह गईं, पुल और बाजार क्षतिग्रस्त हुए तथा बिजली और दूरसंचार व्यवस्था पर भी असर पड़ा। जलविद्युत परियोजनाओं और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचने की खबर है।

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद को बताया कि बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों और सरकारी कर्मचारियों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। रासुवा में नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के 26 जवान, जबकि तिमुरे और मेलुंग में तैनात 44 नेपाली सेना के जवान भी संपर्क से बाहर बताए गए हैं। रसुवागढ़ी सीमा क्षेत्र में तैनात कुछ सीमा शुल्क और आव्रजन अधिकारियों तथा स्थानीय नागरिकों की भी जानकारी नहीं मिल पाई है।

नेपाल पुलिस के प्रवक्ता के मुताबिक अब तक 95 मौतों की पुष्टि हुई है और करीब 28 पुलिसकर्मियों के भी लापता होने की सूचना है।

30 से ज्यादा हेलीकॉप्टर राहत अभियान में

नेपाल सेना और निजी संचालकों के 30 से अधिक हेलीकॉप्टर खोज एवं बचाव अभियान में लगाए गए हैं। लेकिन पहाड़ी इलाकों में टूटी सड़कों, मलबे, खराब मौसम और ऊंचे जलस्तर के कारण राहत दलों के सामने बड़ी चुनौती है।

कई प्रभावित इलाकों तक सड़क मार्ग से पहुंचना संभव नहीं है। ऐसे में हेलीकॉप्टरों के जरिए लोगों को निकालने और राहत सामग्री पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। नेपाल सरकार ने प्रभावित लोगों को बचाने के लिए हर उपलब्ध संसाधन इस्तेमाल करने का भरोसा दिया है।

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने देशवासियों से एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा कि सरकार बचाव, उपचार, भोजन और आश्रय की पूरी जिम्मेदारी लेगी।

105 भारतीयों की जानकारी ने बढ़ाई चिंता

सबसे बड़ी चिंता नेपाल में मौजूद भारतीय नागरिकों को लेकर है। प्रारंभिक सूची में 105 भारतीयों के नाम शामिल होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि यह संख्या सत्यापन के अधीन है और इसे अंतिम आंकड़ा नहीं माना जा सकता।

भारतीय दूतावास ने प्रभावित भारतीय नागरिकों और उनके परिवारों के लिए आपातकालीन संपर्क व्यवस्था शुरू की है। दूतावास के अनुसार वह नेपाल सरकार के साथ मिलकर भारतीय नागरिकों की जल्द खोज और सुरक्षित निकासी के लिए समन्वय कर रहा है।

भारत ने भी राहत अभियान में मदद का हाथ बढ़ाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से फोन पर बात कर जनहानि पर संवेदना जताई और हरसंभव मानवीय एवं राहत सहायता का भरोसा दिया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी नेपाल में हुई जनहानि पर दुख जताते हुए राहत और बचाव अभियान में सहयोग की प्रतिबद्धता व्यक्त की है।

राहत सामग्री लेकर नेपाल जाएंगे IAF के दो विमान

भारत ने राहत अभियान को और मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है। भारतीय वायुसेना के दो परिवहन विमान राहत सामग्री लेकर नेपाल जाएंगे। C-130 विमान के बुधवार देर रात हिंडन एयरबेस से रवाना होने की उम्मीद है, जबकि C-17 विमान अतिरिक्त राहत सामग्री लेकर गुरुवार सुबह नेपाल जाने वाला है।

विदेश मंत्रालय ने भी स्पष्ट किया है कि काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास नेपाल सरकार के साथ लगातार संपर्क में है और प्रभावित भारतीयों की जल्द सुरक्षित निकासी के लिए समन्वय कर रहा है।

तमिलनाडु के 50 तीर्थयात्री फंसे

नेपाल में तमिलनाडु से गए करीब 50 तीर्थयात्रियों के फंसे होने की खबर ने भी चिंता बढ़ा दी है। ये यात्री हिमालयी क्षेत्र में मंदिर की ओर जा रहे थे, तभी फ्लैश फ्लड और भूस्खलन के कारण रास्ता बाधित हो गया।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने अधिकारियों को तेजी से बचाव अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। तंजावुर जिले से गए 57 यात्रियों में से 20 की पहचान और स्थिति की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 37 लोगों का अभी पता नहीं चल पाया है। अधिकारियों के मुताबिक पहाड़ी इलाकों में संपर्क बाधित होने के कारण यात्रियों की सही स्थिति की जानकारी जुटाने में कठिनाई हो रही है।

बिहार-UP में हाई अलर्ट

नेपाल की बाढ़ का खतरा अब भारत के सीमावर्ती इलाकों तक पहुंच गया है। केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के आधार पर NDRF ने बिहार और उत्तर प्रदेश को हाई अलर्ट पर रखा है। नेपाल में संभावित ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) के कारण त्रिशूली नदी में जलस्तर बढ़ने और आगे चलकर गंडक नदी में बाढ़ की लहर आने की आशंका जताई गई है।

बिहार में गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर के खतरे को देखते हुए गंडक बैराज के सभी 36 गेट खोल दिए गए हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों के साथ स्थिति की समीक्षा की है। केंद्र की ओर से गृह मंत्री अमित शाह ने भी बिहार सरकार को हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया है।

NDRF की टीमें बिहार और उत्तर प्रदेश में तैनात की गई हैं। बिहार में पश्चिम चंपारण और मुजफ्फरपुर में दो NDRF टीमें तत्काल तैनात की गई हैं। उत्तर प्रदेश में महाराजगंज और कुशीनगर समेत नेपाल सीमा से लगे क्षेत्रों में प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। गंडक और नारायणी नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है।

SSB ने भी भारत-नेपाल की करीब 1,751 किलोमीटर लंबी सीमा पर अपनी सभी फॉर्मेशनों को अलर्ट कर दिया है और 18 राहत एवं बचाव टीमों को तैनात किया है।

चीन के तिब्बत में भी भारी तबाही

नेपाल के साथ-साथ चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी प्राकृतिक आपदा ने भारी नुकसान पहुंचाया है। नेपाल-चीन सीमा के पास ग्यिरोंग क्षेत्र में भूस्खलन से कई इमारतें मलबे में दब गईं और बड़ी संख्या में लोगों के मारे जाने या लापता होने की आशंका है।

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने प्रभावित इलाके में व्यापक खोज एवं बचाव अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। करीब 145 अधिकारी और जवान राहत अभियान में भेजे गए हैं।

दक्षिण कोरिया के आठ नागरिकों के भी नेपाल में लापता होने की खबर है, जबकि 10 अन्य दक्षिण कोरियाई नागरिक प्रभावित क्षेत्र में फंसे बताए गए हैं।

हिमालयी क्षेत्र के लिए बड़ी चेतावनी

नेपाल की यह त्रासदी अब केवल एक देश की प्राकृतिक आपदा नहीं रह गई है। नेपाल, भारत और चीन के सीमावर्ती हिमालयी क्षेत्रों में इसका असर दिखाई दे रहा है। अचानक बाढ़, भूस्खलन और संभावित GLOF ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्र में सीमा-पार आपदा प्रबंधन और समय रहते चेतावनी प्रणाली की जरूरत को सामने ला दिया है।

फिलहाल प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश, भारतीय नागरिकों समेत सभी प्रभावित लोगों की सुरक्षित निकासी और भारत के सीमावर्ती इलाकों को संभावित बाढ़ से बचाना है। राहत एवं बचाव अभियान अभी जारी है और संपर्क बहाल होने के बाद ही इस विनाशकारी आपदा में हुई वास्तविक जनहानि और नुकसान की पूरी तस्वीर सामने आ सकेगी।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted