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परांदूर एयरपोर्ट प्रोजेक्ट रद्द, चेन्नई में बनेगा नया टर्मिनल; दूसरे एयरपोर्ट के लिए वैकल्पिक जगहों की तलाश

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | चेन्नई | 24 अगस्त 2026

तमिलनाडु सरकार ने चेन्नई के दूसरे एयरपोर्ट के लिए प्रस्तावित परांदूर परियोजना को रद्द करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने सोमवार को विधानसभा में सुओ मोटू बयान देते हुए कहा कि परांदूर के बजाय चेन्नई के दूसरे एयरपोर्ट के लिए अब वैकल्पिक स्थानों की पहचान की जाएगी। सरकार ने साथ ही मौजूदा चेन्नई एयरपोर्ट की क्षमता बढ़ाने की दिशा में भी बड़ा फैसला लिया है। इसके तहत चेन्नई एयरपोर्ट के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में टर्मिनल-5 विकसित किया जाएगा। इसके साथ अप्रोच रोड और फ्लाईओवर बनाने की योजना भी है। सरकार यह काम एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के साथ मिलकर करेगी।

मुख्यमंत्री विजय ने विधानसभा में यह घोषणा ऐसे समय की है जब चेन्नई की बढ़ती हवाई यातायात जरूरतों को देखते हुए लंबे समय से दूसरे एयरपोर्ट की आवश्यकता पर चर्चा होती रही है। परांदूर को चेन्नई के दूसरे हवाई अड्डे के लिए प्रस्तावित किया गया था, लेकिन इस परियोजना को लेकर लगातार राजनीतिक और स्थानीय स्तर पर विवाद भी सामने आते रहे। अब सरकार ने इस परियोजना से पीछे हटते हुए नई जगह तलाशने का फैसला किया है। इसका अर्थ यह है कि चेन्नई के दूसरे एयरपोर्ट की आवश्यकता को सरकार ने समाप्त नहीं किया है, बल्कि परांदूर के विकल्प की तलाश शुरू करने का निर्णय लिया है।

मौजूदा चेन्नई एयरपोर्ट का भी होगा विस्तार

सरकार की योजना केवल परांदूर परियोजना को छोड़ने तक सीमित नहीं है। मुख्यमंत्री ने बताया कि मौजूदा चेन्नई एयरपोर्ट परिसर में टर्मिनल-5 विकसित किया जाएगा। इसके लिए एयरपोर्ट के उत्तर-पश्चिमी हिस्से का इस्तेमाल किया जाएगा। नए टर्मिनल के साथ यात्रियों और विमानों की आवाजाही को बेहतर बनाने के लिए अप्रोच रोड और फ्लाईओवर भी बनाया जाएगा। सरकार का मानना है कि मौजूदा एयरपोर्ट की सुविधाओं को मजबूत करने से चेन्नई की तत्काल हवाई यातायात जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी, जबकि दूसरी ओर भविष्य की जरूरतों के लिए नए दूसरे एयरपोर्ट की संभावित जगह तलाशने का काम जारी रहेगा।

इस फैसले के बाद चेन्नई के एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर सरकार की रणनीति दो स्तरों पर दिखाई दे रही है। एक तरफ मौजूदा एयरपोर्ट में अतिरिक्त क्षमता तैयार करने की कोशिश होगी और दूसरी तरफ चेन्नई के दूसरे एयरपोर्ट के लिए नई जगह खोजी जाएगी। यानी परांदूर परियोजना को छोड़ने का फैसला चेन्नई के दूसरे एयरपोर्ट की जरूरत से पीछे हटना नहीं, बल्कि उसके लिए नया विकल्प तलाशना है।

विधानसभा में फैसले पर हंगामा, DMK का वॉकआउट

मुख्यमंत्री के बयान के बाद विधानसभा में इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव भी देखने को मिला। मुख्य विपक्षी दल DMK ने इस मुद्दे पर बोलने की मांग की, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष जे.सी.डी. प्रभाकर ने कहा कि नियम 110 के तहत मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा पर बहस की अनुमति नहीं दी जाएगी। पूर्व वित्त मंत्री थंगम थेन्नारसु ने स्पष्ट किया कि वह बहस नहीं करना चाहते, बल्कि कुछ स्पष्टीकरण देना चाहते हैं। इसके बावजूद अध्यक्ष ने अपनी स्थिति कायम रखी। इसके बाद DMK के सदस्यों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।

विपक्ष की आपत्ति ऐसे समय सामने आई है जब परांदूर एयरपोर्ट परियोजना तमिलनाडु की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मुद्दा रही है। अब सरकार के इस फैसले के बाद आने वाले दिनों में इस बात को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है कि परांदूर परियोजना को रद्द करने का निर्णय किन परिस्थितियों में लिया गया और नए एयरपोर्ट के लिए वैकल्पिक स्थान चुनने की प्रक्रिया किस आधार पर आगे बढ़ेगी।

परांदूर के बाद अब नए स्थानों की तलाश

मुख्यमंत्री विजय ने साफ किया है कि चेन्नई के लिए दूसरा एयरपोर्ट अभी भी सरकार की प्राथमिकता में है। इसके लिए वैकल्पिक स्थानों की पहचान की जाएगी। यह प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी क्योंकि दूसरे एयरपोर्ट के लिए केवल जमीन उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं होगा। स्थान का चेन्नई से संपर्क, सड़क और परिवहन नेटवर्क, भविष्य में विस्तार की संभावना तथा एयर ट्रैफिक की जरूरतों जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखना होगा। हालांकि सरकार ने फिलहाल वैकल्पिक स्थानों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं।

चेन्नई जैसे तेजी से बढ़ते महानगर के लिए एयरपोर्ट क्षमता आने वाले वर्षों में एक बड़ा बुनियादी ढांचा मुद्दा रहने वाला है। मौजूदा एयरपोर्ट पर यात्री और हवाई यातायात बढ़ने के साथ अतिरिक्त क्षमता की आवश्यकता लगातार महसूस की जाती रही है। ऐसे में टर्मिनल-5 का प्रस्ताव तत्काल और मध्यम अवधि की जरूरतों को पूरा करने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है, जबकि नए दूसरे एयरपोर्ट की तलाश लंबी अवधि की जरूरतों को ध्यान में रखकर की जाएगी।

अब फैसले की असली परीक्षा क्रियान्वयन में

परांदूर परियोजना को रद्द करने के बाद सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि नए दूसरे एयरपोर्ट के लिए उपयुक्त स्थान कितनी जल्दी खोजा जाता है और परियोजना को कितनी तेजी से आगे बढ़ाया जाता है। दूसरी ओर मौजूदा चेन्नई एयरपोर्ट पर प्रस्तावित टर्मिनल-5, अप्रोच रोड और फ्लाईओवर का निर्माण भी महत्वपूर्ण होगा। इन दोनों योजनाओं की गति ही यह तय करेगी कि सरकार चेन्नई की बढ़ती हवाई यातायात जरूरतों को कितनी प्रभावी ढंग से पूरा कर पाती है।

फिलहाल मुख्यमंत्री विजय की घोषणा ने चेन्नई के एयरपोर्ट विस्तार की पूरी दिशा बदल दी है। परांदूर एयरपोर्ट का प्रस्ताव अब आगे नहीं बढ़ेगा, चेन्नई को टर्मिनल-5 मिलेगा और दूसरे एयरपोर्ट के लिए नई जमीन की तलाश शुरू होगी। इस फैसले ने एक पुरानी परियोजना पर विराम जरूर लगा दिया है, लेकिन चेन्नई के दूसरे एयरपोर्ट की जरूरत को खत्म नहीं किया है। अब नजर इस बात पर होगी कि सरकार नया स्थान कब तय करती है और वहां प्रस्तावित एयरपोर्ट की योजना कितनी तेजी से जमीन पर उतरती है।

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