बिजनेस | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 22 अगस्त 2026
केंद्र सरकार ने देश में मोबाइल फोन के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए ₹62,500 करोड़ की Mobile Phone Manufacturing Scheme (MPMS) को अधिसूचित कर दिया है। सरकार का लक्ष्य भारत को मोबाइल निर्माण का बड़ा वैश्विक केंद्र बनाना और देश में बनने वाले मोबाइल फोन में घरेलू स्तर पर तैयार होने वाले पुर्जों की हिस्सेदारी बढ़ाना है।
मोबाइल निर्माण के लिए ₹62,500 करोड़ का बड़ा दांव
यह योजना मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनियों को उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन यानी PLI देगी। सरकार का मानना है कि इससे भारत में मोबाइल फोन का उत्पादन बढ़ेगा, कंपनियों की लागत और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बेहतर होगी और देश में मोबाइल निर्माण से जुड़ी पूरी सप्लाई चेन मजबूत होगी।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि योजना का उद्देश्य भारत में मोबाइल निर्माण का पैमाना बढ़ाने के साथ-साथ घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को मजबूत करना और Domestic Value Addition यानी देश के भीतर होने वाले वास्तविक उत्पादन का हिस्सा बढ़ाना है।
पांच साल चलेगी योजना
Mobile Phone Manufacturing Scheme पांच साल के लिए लागू होगी। यह योजना 1 अप्रैल 2026 से शुरू होकर वित्त वर्ष 2030-31 तक चलेगी। सरकार ने इसके तहत मोबाइल निर्माण क्षेत्र को दो हिस्सों में बांटा है।
पहला हिस्सा Target Segment 1 यानी TS1 है। इसके तहत भारत में मोबाइल फोन के निर्माण को प्रोत्साहन दिया जाएगा। दूसरा हिस्सा Target Segment 2 यानी TS2 है, जिसका उद्देश्य भारतीय मोबाइल फोन ब्रांडों को मजबूत करना है।
TS2 के तहत कुछ कंपनियों को कारोबार शुरू करने और उत्पादन बढ़ाने के लिए एक साल तक का अतिरिक्त समय भी दिया जा सकता है।
घरेलू पुर्जों के निर्माण पर जोर
इस योजना की एक अहम बात यह है कि सरकार केवल भारत में मोबाइल फोन की असेंबली बढ़ाने पर जोर नहीं दे रही है। योजना में मोबाइल निर्माण में इस्तेमाल होने वाले महत्वपूर्ण components और sub-assemblies की घरेलू खरीद को भी प्रोत्साहन दिया जाएगा।
इसके लिए कंपनियों को अतिरिक्त 1.5 प्रतिशत तक का प्रोत्साहन मिल सकता है। इसका मकसद भारत में मोबाइल फोन के साथ-साथ उसके महत्वपूर्ण पुर्जों का निर्माण भी बढ़ाना है।
भारत को वैश्विक मोबाइल हब बनाने की कोशिश
भारत पिछले कुछ वर्षों में मोबाइल फोन निर्माण के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ा है। बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ-साथ भारतीय कंपनियों ने भी देश में उत्पादन बढ़ाया है। सरकार अब इस बढ़त को अगले स्तर पर ले जाना चाहती है।
नई योजना का उद्देश्य केवल घरेलू बाजार की जरूरत पूरी करना नहीं है। सरकार चाहती है कि भारत में बनने वाले मोबाइल फोन दुनिया के दूसरे देशों में भी प्रतिस्पर्धा कर सकें।
इसके लिए उत्पादन का पैमाना बढ़ाना, तकनीक और गुणवत्ता बेहतर करना और मोबाइल फोन के जरूरी पुर्जों का देश में ही निर्माण करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारतीय ब्रांडों के लिए भी मौका
इस योजना में खास तौर पर भारतीय मोबाइल ब्रांडों के लिए अलग प्रावधान किया गया है। TS2 के जरिए सरकार घरेलू कंपनियों को बड़े अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों के मुकाबले मजबूत बनाने की कोशिश कर रही है।
अगर भारतीय कंपनियां बड़े पैमाने पर उत्पादन करने और नई तकनीक अपनाने में सफल होती हैं, तो इससे देश में एक मजबूत घरेलू मोबाइल ब्रांड इकोसिस्टम तैयार हो सकता है।
रोजगार और सप्लाई चेन को फायदा
मोबाइल फोन निर्माण का फायदा केवल मोबाइल बनाने वाली कंपनियों तक सीमित नहीं रहता। इसके साथ चार्जर, बैटरी, डिस्प्ले, कैमरा, सेमीकंडक्टर से जुड़े हिस्से, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स जैसे कई क्षेत्रों में भी कारोबार बढ़ता है।
इसलिए सरकार को उम्मीद है कि नई योजना से मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग के साथ उससे जुड़ी सप्लाई चेन में भी निवेश बढ़ेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
असली चुनौती घरेलू उत्पादन की गहराई
हालांकि योजना बड़ी है, लेकिन इसकी सफलता इस बात से तय होगी कि भारत केवल मोबाइल फोन की असेंबली का केंद्र बनता है या वास्तव में मोबाइल निर्माण की पूरी सप्लाई चेन देश में विकसित कर पाता है।
मोबाइल फोन में इस्तेमाल होने वाले महत्वपूर्ण और महंगे पुर्जों के लिए अगर लंबे समय तक दूसरे देशों पर निर्भरता बनी रहती है, तो भारत का घरेलू मूल्यवर्धन सीमित रहेगा।
इसीलिए नई योजना में components और sub-assemblies की घरेलू खरीद पर जोर महत्वपूर्ण है।
भारत के लिए बड़ा औद्योगिक अवसर
₹62,500 करोड़ की यह योजना मोबाइल फोन उद्योग को अगले चरण में ले जाने की सरकार की बड़ी कोशिश है। अगर इसका सही तरीके से क्रियान्वयन होता है तो भारत मोबाइल फोन का बड़ा उत्पादन केंद्र बनने के साथ-साथ मोबाइल components के निर्माण और निर्यात में भी अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है।
आने वाले पांच वर्षों में सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि सरकार के प्रोत्साहन से कंपनियां सिर्फ ज्यादा मोबाइल बनाएं नहीं, बल्कि भारत में ज्यादा से ज्यादा मूल्य भी पैदा करें।




