राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 20 अगस्त 2026
केंद्र सरकार ने नागरिकता संशोधन अधिनियम यानी CAA के तहत लंबित नागरिकता आवेदनों की प्रक्रिया को लेकर बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया है। गृह मंत्रालय ने आठ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के जिला कलेक्टरों को CAA के तहत लंबित आवेदनों की जांच और प्रक्रिया आगे बढ़ाने का अधिकार दिया है। इससे पहले इन आवेदनों को केंद्र सरकार के अधिकारियों वाली सशक्त समितियां देख रही थीं।
गृह मंत्रालय के 19 अगस्त के आदेश के मुताबिक गुजरात, राजस्थान, पंजाब, पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के जिला कलेक्टर अब CAA के तहत आने वाले आवेदनों को प्रोसेस कर सकेंगे। हालांकि, असम और त्रिपुरा में जनजातीय क्षेत्रों को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है।
इस बदलाव के बाद पहले से काम कर रही बहु-विभागीय सशक्त समितियों की भूमिका खत्म हो जाएगी। इन समितियों में जनगणना, इंटेलिजेंस ब्यूरो और डाक विभाग समेत केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल थे। अब आवेदन प्रक्रिया को जिला स्तर पर अधिक सीधे तरीके से आगे बढ़ाया जा सकेगा।
CAA के तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को नागरिकता देने का प्रावधान है। कानून के तहत उन लोगों को इसके दायरे में रखा गया है जो 31 दिसंबर 2014 या उससे पहले भारत आए थे और जिनके पास वैध दस्तावेज नहीं थे या जो बिना वैध दस्तावेज के भारत में दाखिल हुए थे।
CAA में किए गए नियम संबंधी बदलाव 11 मार्च 2024 को लागू हुए थे। इसके बाद नागरिकता के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू की गई थी। अब लंबित आवेदनों को जिला कलेक्टरों के स्तर पर निपटाने का फैसला प्रक्रिया को विकेंद्रीकृत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इस फैसले का राजनीतिक महत्व भी है। खास तौर पर पश्चिम बंगाल में इस बदलाव पर नजर रहेगी, क्योंकि राज्य में इस साल बीजेपी के सत्ता में आने के बाद CAA से जुड़े आवेदनों को लेकर प्रशासनिक प्रक्रिया में यह बदलाव हुआ है।
अब जिला स्तर पर अधिकारियों की भूमिका बढ़ने के साथ यह भी महत्वपूर्ण होगा कि लंबित आवेदनों की जांच कितनी तेजी से होती है और पात्र आवेदकों को नागरिकता देने की प्रक्रिया किस समय सीमा में पूरी की जाती है।




