राष्ट्रीय/ तमिलनाडु | ABC NATIONAL NEWS | चेन्नई | 18 अगस्त 2026
तमिलनाडु की राजनीति में स्वतंत्रता दिवस समारोह के बाद एक नया विवाद खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और अभिनेत्री त्रिशा कृष्णन की स्वतंत्रता दिवस समारोह में मौजूदगी को लेकर डीएमके से जुड़े मुखपत्र मुरासोली ने मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला है। चेन्नई के फोर्ट सेंट जॉर्ज में आयोजित 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में त्रिशा की अग्रिम पंक्ति में मौजूदगी और मुख्यमंत्री विजय के साथ उनके सलामी के आदान-प्रदान को लेकर मुरासोली ने सवाल उठाया है। अखबार ने पूछा कि क्या एक आधिकारिक स्वतंत्रता दिवस समारोह में किसी अभिनेत्री की इस तरह की मौजूदगी और मुख्यमंत्री के साथ सार्वजनिक रूप से सलामी का आदान-प्रदान उचित था। विवाद सिर्फ त्रिशा तक सीमित नहीं है। डीएमके के मुखपत्र ने विजय सरकार के शुरुआती कार्यकाल, उनके राजनीतिक प्रभाव, मंत्रियों और विधायकों से जुड़े विवादों, फिल्मी दुनिया से जुड़े लोगों की नियुक्तियों और सरकार की कार्यशैली को लेकर भी कई सवाल खड़े किए हैं। यानी स्वतंत्रता दिवस समारोह की एक तस्वीर से शुरू हुआ विवाद अब तमिलनाडु की नई सत्ता बनाम पुराने राजनीतिक ढांचे की खुली भिड़ंत का रूप लेता दिखाई दे रहा है।
फ्रंट रो में त्रिशा की मौजूदगी पर डीएमके का हमला
विवाद का सबसे बड़ा केंद्र चेन्नई में हुआ स्वतंत्रता दिवस समारोह है। मुख्यमंत्री विजय के आधिकारिक कार्यक्रम में अभिनेत्री त्रिशा की अग्रिम पंक्ति में मौजूदगी ने राजनीतिक हलकों का ध्यान खींचा। समारोह के दौरान मुख्यमंत्री विजय और त्रिशा के बीच सलामी का आदान-प्रदान भी कैमरों में दर्ज हुआ। इसी को आधार बनाकर डीएमके के मुखपत्र मुरासोली ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधा। अखबार ने सवाल उठाया कि स्वतंत्रता दिवस जैसे संवैधानिक और राष्ट्रीय महत्व के सरकारी समारोह में अभिनेत्री को फ्रंट रो में स्थान देना और मुख्यमंत्री के साथ इस तरह सलामी का आदान-प्रदान करना कितना उचित था। मुरासोली ने इसे लेकर मुख्यमंत्री के समर्थकों और आम मतदाताओं के बीच भी सवाल खड़े किए और कहा कि इस तरह की स्थिति को केवल प्रशंसक स्वीकार कर सकते हैं। यहां विवाद का राजनीतिक पहलू इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विजय पहले अभिनेता थे और अब तमिलनाडु के मुख्यमंत्री हैं। ऐसे में उनके सार्वजनिक कार्यक्रमों में फिल्म जगत से जुड़े चेहरों की मौजूदगी को लेकर राजनीतिक विरोधियों की नजर स्वाभाविक रूप से और ज्यादा तीखी हो गई है।
विजय और त्रिशा की नजदीकी फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में
त्रिशा की विजय के आधिकारिक कार्यक्रमों में मौजूदगी कोई पहली घटना नहीं है। वह मई में विजय के शपथ ग्रहण समारोह में भी शामिल हुई थीं, जहां उन्हें भावुक होते हुए देखा गया था। विजय और त्रिशा की दोस्ती लंबे समय से सार्वजनिक चर्चा का विषय रही है और उनके निजी जीवन को लेकर भी मीडिया में अटकलें लगती रही हैं। हालांकि इन निजी चर्चाओं को राजनीतिक तथ्यों के साथ मिलाना उचित नहीं होगा, लेकिन मौजूदा विवाद इसलिए बड़ा हो गया है क्योंकि अब यही तस्वीरें और मौजूदगी विपक्षी राजनीति के निशाने पर हैं। स्वतंत्रता दिवस समारोह जैसे सरकारी कार्यक्रम में किसी फिल्मी हस्ती की मौजूदगी को लेकर उठाए गए सवाल मूल रूप से प्रोटोकॉल, प्राथमिकता और राजनीतिक संदेश से जुड़े हैं। मुरासोली ने इसी मुद्दे को पकड़ते हुए विजय सरकार की कार्यशैली पर व्यापक हमला शुरू कर दिया है।
सिर्फ त्रिशा नहीं, विजय के तीन महीने के शासन पर भी सवाल
डीएमके के मुखपत्र ने मुख्यमंत्री विजय के सत्ता संभालने के शुरुआती महीनों को भी निशाने पर लिया। अखबार ने दावा किया कि सत्ता में आने के कुछ ही महीनों के भीतर मुख्यमंत्री अपने राजनीतिक प्रभाव और सरकार की स्थिति को लेकर चिंतित दिखाई दे रहे हैं। स्वतंत्रता दिवस पर विजय के भाषण में जनता से सरकार के साथ बने रहने की अपील को भी मुरासोली ने इसी संदर्भ में देखा। विजय ने लोगों से सरकार का समर्थन जारी रखने और उसके कामों में साथ देने की अपील की थी। डीएमके के मुखपत्र ने सवाल किया कि अगर सरकार को अपने काम पर इतना भरोसा है तो उसे इतनी जल्दी जनता से लगातार समर्थन की अपील क्यों करनी पड़ रही है। हालांकि यह पूरी तरह राजनीतिक विश्लेषण है, लेकिन इससे साफ है कि तमिलनाडु में नई सरकार के शुरुआती दौर में ही सत्ता पक्ष और डीएमके के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो चुका है।
‘हमने किया है, अब आपके साथ की जरूरत है’—विजय की अपील पर भी निशाना
स्वतंत्रता दिवस के भाषण में विजय ने सरकार के कामों का उल्लेख करते हुए जनता से आगे भी सरकार के साथ खड़े रहने की अपील की। मुरासोली ने इसी बयान को आधार बनाकर मुख्यमंत्री की राजनीतिक स्थिति पर सवाल खड़े किए। अखबार के अनुसार विजय का संदेश यह था कि सरकार ने जो करना था, वह किया है, लेकिन आगे की योजनाओं को लागू करने के लिए जनता का साथ जरूरी है। डीएमके ने इस अपील को राजनीतिक चिंता के संकेत के तौर पर पेश किया। अखबार ने यहां तक दावा किया कि कुछ मतदाता अपने चुनावी फैसले पर पछतावा व्यक्त कर रहे हैं और सोशल मीडिया पर सरकार के खिलाफ टिप्पणियां तेजी से प्रसारित हो रही हैं। हालांकि सोशल मीडिया पर चलने वाले दावों की व्यापक स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक तौर पर यह साफ है कि विजय सरकार के खिलाफ डीएमके ने शुरुआती चरण में ही आक्रामक मोर्चा खोल दिया है।
फिल्मी दुनिया से जुड़े लोगों की नियुक्तियों पर भी सवाल
मुरासोली ने विजय सरकार में उन नियुक्तियों को लेकर भी सवाल उठाए जिनका संबंध मुख्यमंत्री के फिल्मी करियर से जुड़े लोगों से बताया गया है। अखबार ने विजय की अंतिम फिल्म Jananayagan के निर्माता वेंकट नारायण, Bigil और Code की निर्माता अर्चना कल्पथी तथा Leo के निर्माता जगदीश पलानीस्वामी जैसे नामों का उल्लेख करते हुए पूछा कि क्या फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों को सत्ता के करीब लाने की कोई विशेष प्रक्रिया अपनाई जा रही है। यहां भी आरोप और तथ्य अलग-अलग रखना जरूरी है। किसी व्यक्ति का मुख्यमंत्री से पेशेवर या व्यक्तिगत परिचय अपने आप में किसी नियुक्ति को गलत साबित नहीं करता। लेकिन अगर सरकारी पद या जिम्मेदारी देने में राजनीतिक या व्यक्तिगत संबंधों का प्रभाव पड़ा है, तो प्रक्रिया और योग्यता की जांच जरूरी होगी। यही वह सवाल है जिसे मुरासोली ने राजनीतिक हमले का हिस्सा बनाया है।
मंत्रियों और विधायकों पर भी विजय सरकार से सवाल
डीएमके के मुखपत्र ने मुख्यमंत्री से यह भी पूछा कि उनकी सरकार ने मंत्रियों और विधायकों के खिलाफ सामने आने वाली शिकायतों पर कितनी कार्रवाई की। अखबार ने एक विजय समर्थक की ओर से एक विधायक के खिलाफ की गई यौन शिकायत का उल्लेख करते हुए सरकार की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाया। मुरासोली का दावा है कि शिकायतकर्ता को पार्टी से बाहर कर दिया गया, जबकि संबंधित मंत्री को पुलिस सुरक्षा मिली। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अलग से आवश्यक है, लेकिन राजनीतिक विवाद का मुद्दा स्पष्ट है—क्या विजय सरकार शिकायतों पर समान और निष्पक्ष कार्रवाई कर रही है या राजनीतिक समीकरणों के आधार पर अलग-अलग मानदंड अपनाए जा रहे हैं?
सोशल मीडिया आलोचकों पर कार्रवाई का भी आरोप
मुरासोली ने विजय सरकार पर सोशल मीडिया पर आलोचना करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का आरोप भी लगाया। अखबार ने दावा किया कि सरकार की आलोचना करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई और अदालतों ने भी कई मौकों पर प्रशासन के कामकाज पर सवाल उठाए। इन दावों की कानूनी और तथ्यात्मक पुष्टि संबंधित मामलों के रिकॉर्ड से ही हो सकती है। लेकिन राजनीतिक दृष्टि से यह आरोप बेहद गंभीर है, क्योंकि किसी लोकतांत्रिक सरकार की सबसे बड़ी परीक्षा केवल अपने समर्थकों के साथ नहीं, बल्कि अपने आलोचकों के प्रति उसके रवैये से भी होती है। अगर सरकार के खिलाफ बोलने वालों पर कार्रवाई कानून के मुताबिक है तो उसका आधार सार्वजनिक होना चाहिए और अगर कार्रवाई केवल आलोचना दबाने के लिए हुई है तो यह लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर बड़ा सवाल बन सकता है।
कोयंबटूर की 10 साल की बच्ची से जुड़े मामले को लेकर भी हमला
डीएमके के मुखपत्र ने कोयंबटूर में 10 साल की बच्ची से जुड़े यौन अपराध के मामले को लेकर भी विजय सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाया। अखबार ने आरोप लगाया कि सरकार ने इस मामले को ठीक से संभाला नहीं। बच्चों के खिलाफ यौन अपराध बेहद संवेदनशील और गंभीर विषय हैं, इसलिए इस तरह के मामले में पुलिस जांच, अभियोजन और प्रशासनिक कार्रवाई की वास्तविक स्थिति को आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर देखना जरूरी है। राजनीतिक दलों के आरोपों से अलग, ऐसे मामलों में न्यायिक प्रक्रिया और पीड़ित को न्याय दिलाना सबसे महत्वपूर्ण होना चाहिए।
‘लोग मूर्ख नहीं हैं’—डीएमके मुखपत्र का सीधा संदेश
मुरासोली ने विजय सरकार की राजनीतिक स्थिति पर हमला करते हुए यह संदेश देने की कोशिश की कि जनता को केवल राजनीतिक प्रचार से प्रभावित नहीं किया जा सकता। अखबार ने सोशल मीडिया पर चल रहे उन संदेशों का हवाला दिया जिनमें कुछ लोग सरकार को वोट देने पर पछतावा जताने की बात कर रहे हैं। इसी आधार पर उसने दावा किया कि विजय का जनता से सरकार के साथ बने रहने का आग्रह उनकी राजनीतिक चिंता को दिखाता है। अखबार का संदेश बेहद सीधा था—लोग सरकार के कामकाज को देख रहे हैं और केवल लोकप्रियता के आधार पर हमेशा समर्थन नहीं देते।
विजय के सामने असली चुनौती अब लोकप्रियता नहीं, शासन की विश्वसनीयता
इस पूरे विवाद को केवल त्रिशा की मौजूदगी या स्वतंत्रता दिवस समारोह की एक तस्वीर तक सीमित करना आसान होगा, लेकिन तमिलनाडु की राजनीति में इसकी गूंज इससे कहीं आगे जा सकती है। विजय एक लोकप्रिय फिल्म स्टार से मुख्यमंत्री बने हैं और उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती यह साबित करने की है कि फिल्मी लोकप्रियता को वह प्रभावी प्रशासन में बदल सकते हैं। दूसरी तरफ डीएमके लंबे समय से तमिलनाडु की राजनीति की सबसे मजबूत ताकतों में रही है और उसके लिए विजय की नई राजनीतिक शक्ति को चुनौती देना स्वाभाविक है। ऐसे में हर सरकारी नियुक्ति, हर आधिकारिक कार्यक्रम और हर प्रशासनिक फैसला राजनीतिक जांच के दायरे में आएगा। स्वतंत्रता दिवस समारोह का विवाद इसी बड़े राजनीतिक संघर्ष की एक झलक है।
एक समारोह से शुरू हुआ विवाद अब सरकार की पूरी कार्यशैली तक पहुंच गया
फोर्ट सेंट जॉर्ज में त्रिशा की फ्रंट रो में मौजूदगी और मुख्यमंत्री विजय के साथ सलामी से शुरू हुआ विवाद अब विजय सरकार की नियुक्तियों, मंत्रियों-विधायकों से जुड़े मामलों, सोशल मीडिया आलोचकों पर कार्रवाई और प्रशासनिक फैसलों तक पहुंच गया है। डीएमके का हमला बताता है कि विपक्ष नई सरकार को शुरुआती दौर में ही घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है। वहीं विजय सरकार के लिए चुनौती यह है कि वह इन राजनीतिक हमलों का जवाब केवल बयानबाजी से नहीं, बल्कि पारदर्शी प्रशासन और ठोस फैसलों से दे। क्योंकि तमिलनाडु की जनता के सामने आखिरकार सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि अभिनेता से मुख्यमंत्री बने विजय अपनी लोकप्रियता को कितने प्रभावी शासन में बदल पाते हैं।




