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जनगणना में OBC कॉलम गायब! कांग्रेस का मोदी सरकार पर बड़ा हमला, बोली—‘जानबूझकर छिपाई जा रही आबादी’

जनगणना की प्रश्नावली में OBC का अलग कॉलम नहीं होने पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार को घेरा; अनिल जय हिंद ने लगाया गंभीर आरोप, कहा—OBC आबादी को आधिकारिक आंकड़ों में दर्ज होने से रोकने की कोशिश।

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 18 अगस्त 2026

देश में प्रस्तावित जनगणना को लेकर अब सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस ने जनगणना की प्रश्नावली में OBC यानी अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए अलग कॉलम नहीं होने को लेकर मोदी सरकार पर सीधा हमला बोला है। कांग्रेस का आरोप है कि OBC समुदाय की वास्तविक आबादी को आधिकारिक आंकड़ों में सामने आने से रोकने के लिए जानबूझकर यह कॉलम गायब रखा गया है। पार्टी ने इसे महज प्रशासनिक चूक मानने से इनकार करते हुए केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। कांग्रेस का कहना है कि जिस देश में सामाजिक प्रतिनिधित्व, आरक्षण और सरकारी योजनाओं को लेकर लगातार बहस होती रही है, वहां जनगणना में OBC आबादी का स्पष्ट आंकड़ा दर्ज नहीं किया जाना गंभीर सवाल खड़े करता है।

कांग्रेस के OBC विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल जय हिंद ने सोमवार को पार्टी कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस मुद्दे को उठाया। उनके मुताबिक, 14 अगस्त को जारी जनगणना की प्रश्नावली में दसवें सवाल के तहत OBC श्रेणी का उल्लेख नहीं किया गया है। कांग्रेस ने इसी आधार पर केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का तर्क है कि जनगणना देश की आबादी की वास्तविक तस्वीर सामने लाने का सबसे बड़ा आधिकारिक माध्यम है और ऐसे में समाज के बड़े वर्ग की आबादी से जुड़ा स्पष्ट आंकड़ा इसमें शामिल होना चाहिए। कांग्रेस का कहना है कि OBC की संख्या को लेकर विश्वसनीय और आधिकारिक आंकड़े उपलब्ध होने से सरकार को सामाजिक और आर्थिक नीतियां बनाने में भी मदद मिल सकती है।

कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि OBC समुदाय को आधिकारिक जनगणना के आंकड़ों से बाहर रखने का असर सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगा। पार्टी के मुताबिक, आबादी से जुड़े आंकड़े सरकारी योजनाओं, सामाजिक कल्याण, प्रतिनिधित्व और संसाधनों के वितरण की नीतियों के लिए महत्वपूर्ण आधार होते हैं। ऐसे में यदि किसी बड़े सामाजिक वर्ग की वास्तविक संख्या ही स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं होगी, तो उस वर्ग की जरूरतों का आकलन कैसे होगा और उसके लिए नीतियां किस आधार पर तैयार की जाएंगी—यह बड़ा सवाल है। कांग्रेस इसी सवाल को लेकर केंद्र सरकार पर दबाव बना रही है।

कांग्रेस ने इस मामले को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर राजनीतिक आरोप भी लगाए हैं और इसे एक “गहरी साजिश” बताया है। पार्टी का कहना है कि OBC आबादी का वास्तविक आंकड़ा सामने नहीं आने देने से देश की सामाजिक संरचना की पूरी तस्वीर आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हो पाएगी। हालांकि, यह कांग्रेस का आरोप है और उपलब्ध जानकारी में केंद्र सरकार की ओर से इस आरोप पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए फिलहाल यह पूरा विवाद कांग्रेस के आरोपों और सरकार की संभावित सफाई के बीच खड़ा है। अब सबसे अहम यह होगा कि केंद्र सरकार प्रश्नावली में OBC कॉलम को लेकर अपनी स्थिति किस तरह स्पष्ट करती है।

OBC आबादी की गणना का मुद्दा नया नहीं है। देश में लंबे समय से सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर यह मांग उठती रही है कि अन्य पिछड़ा वर्ग की आबादी का स्पष्ट और आधिकारिक आंकड़ा सामने आना चाहिए। आरक्षण से लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक प्रतिनिधित्व तक कई महत्वपूर्ण मुद्दों में जनसंख्या के आंकड़ों की भूमिका होती है। यही वजह है कि जनगणना की प्रश्नावली में OBC से जुड़े कॉलम को लेकर उठे सवाल ने एक बार फिर इस पुरानी बहस को राजनीतिक केंद्र में ला दिया है।

कांग्रेस का कहना है कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि OBC से संबंधित आंकड़े किस माध्यम से जुटाए जाएंगे और यदि जनगणना प्रश्नावली में इसका अलग कॉलम नहीं है, तो इसके पीछे क्या वजह है। पार्टी का तर्क है कि यदि सरकार के पास OBC आबादी का आंकड़ा जुटाने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था है तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। वहीं यदि OBC की गणना जनगणना का हिस्सा नहीं होगी, तो केंद्र को इसकी वजह देश के सामने बतानी चाहिए। कांग्रेस के मुताबिक, सामाजिक न्याय की नीतियों के लिए विश्वसनीय आंकड़े बेहद जरूरी हैं।

इस विवाद का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जनगणना सिर्फ आबादी गिनने की प्रक्रिया नहीं होती, बल्कि इससे देश की सामाजिक और जनसांख्यिकीय तस्वीर तैयार होती है। इसी तस्वीर के आधार पर सरकार भविष्य की कई नीतियों और योजनाओं की दिशा तय करती है। ऐसे में किसी बड़े सामाजिक वर्ग से संबंधित आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक रूप से गंभीर विषय बन जाता है। OBC समुदाय की आबादी कितनी है, अलग-अलग राज्यों में उसकी हिस्सेदारी कितनी है और सामाजिक-आर्थिक स्थिति क्या है—इन सवालों के जवाब नीति निर्माण के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

अब इस पूरे मामले में गेंद केंद्र सरकार के पाले में है। कांग्रेस के आरोपों के बाद सरकार को यह बताना होगा कि जनगणना की प्रश्नावली में OBC श्रेणी को लेकर क्या व्यवस्था की गई है। क्या OBC से संबंधित जानकारी किसी दूसरे सवाल या अलग प्रक्रिया के माध्यम से जुटाई जाएगी? क्या सरकार इस संबंध में कोई अलग डेटा तैयार करेगी? या फिर OBC आबादी की अलग से गणना नहीं होगी? इन सवालों पर सरकार की स्थिति साफ होना इस राजनीतिक विवाद की अगली दिशा तय करेगा।

फिलहाल OBC कॉलम को लेकर कांग्रेस ने मोदी सरकार पर बड़ा राजनीतिक हमला बोल दिया है। सवाल अब सिर्फ एक कॉलम का नहीं, बल्कि देश की सामाजिक तस्वीर और आधिकारिक आंकड़ों की विश्वसनीयता का है। क्या जनगणना में OBC आबादी का पूरा हिसाब सामने आएगा या यह मुद्दा भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में उलझकर रह जाएगा—इस पर अब केंद्र सरकार के जवाब का इंतजार है।

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