अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | ढाका | 14 अगस्त 2026
छह महीने पुरानी सरकार के सामने पहली बड़ी चुनौती
बांग्लादेश में लगातार हो रही बिजली कटौती ने नई BNP सरकार के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में कमी के कारण देश के कई हिस्सों में घंटों बिजली गुल हो रही है। भीषण गर्मी के बीच लंबे पावर कट ने आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित किया है और सरकार के खिलाफ नाराजगी बढ़ रही है। अधिकारियों का कहना है कि ऊर्जा संकट कम से कम अगले एक सप्ताह तक जारी रह सकता है।
सुबह हो या रात, बिजली कटौती से राहत नहीं
दक्षिणी बांग्लादेश के लक्ष्मीपुर जिले के कमलनगर के निवासी अब्दुर रहमान ने बताया कि बिजली कटौती इतनी अनिश्चित और लंबी हो गई है कि लोग अपने दिन की योजना तक नहीं बना पा रहे हैं। उनके मुताबिक कई बार बिजली एक घंटे से ज्यादा नहीं रहती और उसके बाद कई घंटों तक चली जाती है। रात में भी अचानक बिजली कटने और लंबे समय तक वापस नहीं आने से लोगों की परेशानी और बढ़ गई है।
प्राकृतिक गैस की कमी बनी संकट की बड़ी वजह
बांग्लादेश के मौजूदा बिजली संकट के पीछे प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में कमी को प्रमुख कारण बताया जा रहा है। देश की बिजली उत्पादन व्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा गैस आधारित संयंत्रों पर निर्भर है। गैस की उपलब्धता प्रभावित होने पर बिजली उत्पादन भी सीधे प्रभावित होता है और इसका असर देश के अलग-अलग हिस्सों में बिजली कटौती के रूप में दिखाई देता है।
बाजार और दुकानें रात 8 बजे बंद करने का आदेश
बिजली संकट की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बांग्लादेश पावर डिवीजन ने 12 अगस्त को देशभर के शॉपिंग मॉल, बाजारों और दुकानों को रात 8 बजे तक बंद करने का निर्देश दिया। सरकार का उद्देश्य बिजली की मांग को नियंत्रित करना और सीमित उपलब्ध बिजली को आवश्यक क्षेत्रों के लिए बचाना है। हालांकि, इस फैसले से कारोबारियों और दुकानदारों के बीच भी असंतोष बढ़ सकता है।
भीषण गर्मी ने बढ़ाई लोगों की परेशानी
बिजली कटौती ऐसे समय हो रही है जब बांग्लादेश के कई हिस्सों में गर्म और उमस भरा मौसम लोगों के लिए पहले से मुश्किलें पैदा कर रहा है। पंखे, एयर कंडीशनर और अन्य विद्युत उपकरणों के बिना लंबे समय तक रहना आम परिवारों के लिए कठिन हो गया है। ग्रामीण इलाकों में समस्या और गंभीर बताई जा रही है, जहां बिजली की आपूर्ति पहले ही अपेक्षाकृत कमजोर रहती है।
BNP सरकार पर बढ़ रहा राजनीतिक दबाव
नई BNP सरकार के सत्ता में आए अभी करीब छह महीने ही हुए हैं, लेकिन बिजली संकट ने उसके सामने बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा कर दिया है। विपक्ष सरकार की ऊर्जा नीति और बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर सवाल उठा रहा है, जबकि आम लोगों की नाराजगी भी बढ़ती जा रही है। सरकार के लिए चुनौती केवल बिजली व्यवस्था सामान्य करने की नहीं है, बल्कि जनता के बीच यह भरोसा कायम करने की भी है कि वह बुनियादी सेवाओं से जुड़े संकट को प्रभावी तरीके से संभाल सकती है।
आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है असर
लंबे पावर कट का असर सिर्फ घरेलू जीवन तक सीमित नहीं रहता। दुकानों, बाजारों, छोटे कारोबार, उद्योगों और सेवा क्षेत्र की गतिविधियां भी प्रभावित होती हैं। रात 8 बजे बाजार बंद करने के आदेश से व्यापारिक गतिविधियों के घंटों में कमी आएगी और यदि बिजली संकट लंबा खिंचता है तो इसका आर्थिक असर भी बढ़ सकता है।
सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती
बांग्लादेश सरकार के सामने फिलहाल दोहरी चुनौती है—एक तरफ तत्काल बिजली संकट को नियंत्रित करना और दूसरी तरफ प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को स्थिर करना। यदि अगले एक सप्ताह में स्थिति में सुधार नहीं आता, तो बिजली कटौती और व्यापारिक प्रतिबंधों को लेकर जनता का असंतोष और गहरा सकता है।
संकट सिर्फ बिजली का नहीं, शासन की परीक्षा भी
बांग्लादेश का मौजूदा ऊर्जा संकट नई सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक परीक्षा बन गया है। बिजली जैसी बुनियादी सुविधा में लगातार व्यवधान सीधे आम नागरिकों के जीवन को प्रभावित करता है और उसका राजनीतिक असर भी तेजी से सामने आता है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार की प्राथमिकता यह होगी कि गैस आपूर्ति और बिजली उत्पादन के बीच पैदा हुए अंतर को जल्द से जल्द कम किया जाए और सामान्य जनजीवन को पटरी पर लाया जाए।
फिलहाल बांग्लादेश में सवाल सिर्फ यह नहीं है कि बिजली कब आएगी, बल्कि यह भी है कि नई BNP सरकार जनता के बढ़ते गुस्से और गहराते ऊर्जा संकट का सामना कितनी तेजी और प्रभावी ढंग से कर पाती है।




